Short story on friendship in hindi. 7 Friendship Stories in Hindi: इतिहास की सर्वश्रेष्ठ मित्रताएँ 2022-10-23

Short story on friendship in hindi Rating: 8,3/10 832 reviews

मैंने अपने जीवन में बहुत से दोस्त हुए हैं, लेकिन एक ऐसा दोस्त है जिससे मैंने अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा मिलाप हुआ है। उसका नाम राम है और वह मेरे बचपन से ही मेरा दोस्त है।

हम दोनों ही एक ही जगह से हैं और हमेशा एक साथ ही रहा है। हम दोनों ही स्कूल जाते थे और हमेशा एक साथ खेलते और समय बिताते थे। हम दोनों को समझदारी और ईमानदारी जैसी गुणों से भरपूर होना पसंद था और हम दोनों को अपने दोस्त में यह सबसे ज्यादा पसंद था।

समय बीतता गया और हम अपने जीवन के अलग-अलग रास्तों पर चलने लगे, लेकिन हमारा दोस्ती कभी नहीं बदला

Story on Friendship in Hindi

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दोस्ती का आधार प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की परवाह है. रहने दे बस तेरे चक्कर में हमे पिटना नही है तू जा। आयुष : हाँ रे अम्बानी की बिसरी औलाद, पता है हमें रोज सुबह शाम नोट की बारिश होती होती है तेरे घर पे अब चल चुपचाप। राज : देख आयुष मैं फिर कह रहा हूँ कोइ गड़बड़ ना हो जाए। आयुष : अरे कुछ नी होगा, तू वो सामने दावत देख रहा है हम सब जाएंगे और बिरयानी साफ करके अपने रस्ते बस किसी को कुछ पता नी चलेगा कि कौन है किसी ने पूछा तो कह देंगे हम लड़के वाले हैं सलीम : अबे ये प्रोग्राम ही बनाते रहोगे या चलोगे भी मेरे पेट में तो चूहे कूदने लगे हैं बिरयानी के ख्याल से ही…. जब दूसरे दोस्त को यह बात पता चली, तो वह अपने घायल दोस्त को बचाने भागा. एक बार उसने राजा के किसी आदेश की अवहेलना कर दी. उसे सोचा कि मोहन भी पेड़ पर चढ़ जायेगा. रमन ने अपना पारिवारिक व्यवसाय संभाल लिया और राघव ने एक छोटी सी नौकरी तलाश ली.

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Friendship story in hindi

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तब वो सर्प बोला कि तेरा यह मित्र मेरे पिछले जन्म का वैरी है और जब तक मैं इसका खून नहीं पीऊंगा तब तक मेरा प्रतिशोध शांत नहीं होंगा और मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी। इसको में डस के इसका खून पिके तभी मै यहां से चला जाऊंगा। तब उसके मित्र ने कहा कि तुझे मेरे मित्र का खून ही चाहिए ना अगर में तुझे इसका खून पिलादू तू यहां से चला जायेगा ना? मगर हम बहुत अच्छे दोस्त थे. तुम्हारा यह निवेदन स्वीकार योग्य नहीं है. Friendship Story of Shrikrishna and Arjuna श्रीकृष्ण और अर्जुन Hindi Friendship Story 1: जब भी कहीं मित्रता की मिसाल का जिक्र होता है तब श्रीकृष्ण और अर्जुन की अपूर्व दोस्ती की चर्चा सबसे पहले होती है। दोनों मित्रों के ह्रदय में एक दूसरे के प्रति कितना सम्मान, आदर और स्नेह था, इसे महाभारत का प्रत्येक पाठक जानता है। भले ही दोनों का जन्म प्रसिद्ध राजवंश में हुआ था लेकिन फिर भी उन्हें सारा जीवन संघर्षों से जूझना पड़ा। इस कारण से उन्हें एक-दूसरे का सामीप्य पाने का अवसर भी अधिक नहीं मिला, लेकिन मित्रता को सतत समीपता की चाह नहीं है, बल्कि वह तो स्नेह और निष्ठा के आधार पर टिकी है। अर्जुन स्वयं को श्रीकृष्ण का सिर्फ मित्र ही नहीं, बल्कि सेवक भी समझते थे और यही भाव श्रीकृष्ण के मन में भी था, तभी तो उन्होंने राजा होते हुए भी युद्ध में अर्जुन का सारथी बनने जैसा छोटा समझे जाने वाला कार्य भी किया। दोनों मित्रों की जुगलबंदी का परिचय कई अवसरों पर मिलता है, जैसे — खांडव वन को दोनों मित्रों ने जलाया, जबकि उसकी रक्षा का दायित्व उस इन्द्र पर था जिसके अंश से अर्जुन का जन्म हुआ था और जिसे वह अपना ही पुत्र मानते थे। लेकिन उनकी बात मानने के स्थान पर अर्जुन ने श्रीकृष्ण के पक्ष में ही रहकर युद्ध किया। इसी तरह अर्जुन ने कई अवसरों पर श्रीकृष्ण के शत्रुओं को सिर्फ इसीलिये पराजित किया, क्योंकि वह भगवान कृष्ण से शत्रुता मानते थे, हालाँकि अर्जुन से उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी। श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन और उनके समस्त परिवार की रक्षा का भार अपने ऊपर ले रखा था। महाभारत के उस भीषण महासमर में जिसमे भीष्म पितामह, कर्ण, द्रोणाचार्य और अश्वत्थामा जैसे अजेय सूरमा थे और जिन्हें देवता भी जीतने की कल्पना नहीं कर सकते थे, श्रीकृष्ण ने अर्जुन और अपने भक्त धर्मरुढ पांडवों की विजय के लिये पराजित करवा दिया। भगवान कृष्ण ने अर्जुन के लिये क्या-क्या नहीं सहा? दोनों दोस्त डर गए. कृपया मेरे मित्र कन्हैया को छोड़ दीजिये. हमेशा तो बिल्कुल नहीं। इसे भी औरो की तरह यही भ्रम था कि उसकी दोस्ती सबसे ख़ास है और सबसे अलग। पर.

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Poems on Friendship in Hindi

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राघव को रमन के इस व्यवहार पर बहुत दुःख हुआ. दोनों दोस्त डर गए. Top 5 Heart Touching Story on Friendship in Hindi Friendship Story in Hindi With Moral नमस्कार साथियों आप सभी का नॉलेज ग्रो हिन्दी ब्लॉग पर स्वागत है, दोस्तो आज का यह आर्टिकल आप सभी के लिए बहुत ही स्पेशल और शानदार होने वाला है। क्योंकि दोस्तो आज में इस आर्टिकल के माध्यम से आपके साथ Top 5 Heart Touching Story on Friendship in Hindi में शेयर करने वाला हू। इसीलिए इस आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़िए। 1. सोहन को भय था कि कहीं किसी जंगली जानवर से उनका सामना न हो जाए. Poem-7 दोस्ती का रिश्ता कहते हैं कि दोस्ती का रिश्ता बड़ा ही खूबसूरत होता है अगर दोस्ती ही बेवफा हो जाये तो यही रिश्ता सबसे बदसूरत होता है दो दोस्त अगर बिछड़ जाये तो ज़िन्दगी वीरान होती है दोस्ती दो दिलों को जोड़ती है वो बड़े से बड़े दुःख का असर तोड़ती है दोस्तों हमेशा बांध कर रखना दोस्ती प्रेम की डोर से क्योंकि दोस्ती के रिश्ते का कोई मोल नहीं होता है अकेले में दोस्त ही काम आता है ख़ुशी में भी दोस्ती के साथ हाथों में जाम आता है दोस्त को कभी न खोना तुम हमेशा दोस्त को दिल में बसाना तुम Poem-8 दोस्ती एक दिन जिंदगी ऐसे मुकाम पर पहुँच जाएँगी दोस्ती तो सिर्फ़ यादों में ही रह जाएँगी हर बात दोस्तों की याद दिलायेंगी और हँसते हँसते फिर आँख नम हो जाएँगी ऑफिस के रूम में क्लासरूम नज़र आएँगी पैसे तो बहोत होगा लेकिन खर्चा करने के लम्हें कम हो जायेंगें जी लेंगे खुल के इस पल को मेरे दोस्त क्यूँ के जिंदगी इस पल को फिर से नहीँ दोहराएँगी Special Friendship Poems in Hindi दोस्त— हर किसी के जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति … वह रिश्ता जो हम खुद चुनते हैं। हम अपने दोस्तों से पूरा दिन किसी रेस्तरां, कॉफी हाउस, सिनेमा हॉल, गार्डन या ऐसी जगह पर मिलते हैं, जहां हम घूम सकते हैं और उनके साथ मजे कर सकते हैं। इसलिए यहाँ हम अपने पाठकों के लिए कुछ Friendship Poems in Hindi पोस्ट कर रहे हैं। इन्हें अपने निकट और प्रिय लोगों को भेजें और उनके दिन को special बनाएं। Poem-9 हम हमेशा दोस्त रहेंगे हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते थे हार हो या जीत एक दुसरे का हमेशा साथ दिया करते थे कभी हम तुमसे कभी तुम हमसे रूठ जाया करते थे फिर हम तुम्हे और कभी तुम हमें मना लिया करते थे एक दूसरे की खुद से ज्यादा परवाह किया करते थे ये बात बस कल की ही लगती है हम तुम अपनी दोस्ती पर कितना इतराया करते थे Poem-10 जाना पहचाना साथी वो खुशियों की डगर, वो राहों में हमसफ़र, वो साथी था जाना पहचाना, दिल हैं उसकी यादों का दीवाना वो साथ था जाना पहचाना गम तो कई उसने भी देखे, पर राहों में चले खुशियों को लेके दिल चाहता हैं हर दम हम साथ चलें, पर इस राह में कई काले बादल हैं घने वो साथ था जाना पहचाना मेरे आसुओं को था जिसने थामा, मुझसे ज्यादा मुझको पहचाना चारों तरफ था घनघोर अँधियारा, बनकर आया था जीवन में उजियारा वो साथ था जाना पहचाना गिन-गिन कर तारे भी गिन जाऊ, पर उसकी यादों को भुला ना पाऊ कहता था अक्सर हर दिन हैं मस्ताना, हर राह में खुशियों का तराना वो साथ था जाना पहचाना कहता हैं मुझे भूल जाना, अपनी यादों में ना बसाना देना चाहूँ हर ख़ुशी उसे, इसीलिए, मिटाना चाहूँ दिल से वो साथ था जाना पहचाना By: कर्णिका पाठक Sad Poems on Friendship in Hindi Poem-11 यार किसी न किसी पे किसी को ऐतबार हो जाता है , अजनबी कोई शख्स यार हो जाता है , खूबियों से नहीं होती मोहब्बत सदा , खामियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है. Friendship Story In Hindi 3 : दोस्त की कुर्बानी एक राज्य में श्याम नामक युवक रहा करता था.

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Short Moral Stories About Friendship in Hindi

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भालू उनकी ओर बढ़ने लगा. दोस्ती की नयी दूसरी कहानी :- Friendship story in hindi Friendship story in hindi, मेरा दोस्त आज चुप क्यों बैठा है वह तो हमेशा ही बातें करता था आज ऐसा क्या हो गया कि बहुत परेशान लग रहा है मुझे चलकर बात करनी चाहिए जब मैं उसके पास गया तो वह कुछ भी नहीं बोल रहा था वह चुप क्यों था इस बारे में मुझे अधिक नहीं पता था क्योंकि अभी तक उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया था मेरा पिछला अतीत नयी कहानी मुझे तो ऐसा ही लगता था कि शायद कोई बात है जिससे वह बहुत परेशान लग रहा है अपने दोस्त से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह अब एग्जाम नहीं दे पाएगा क्योंकि उसके पास अब पैसे नहीं है जिसकी वजह से वह एग्जाम की फीस भी नहीं भर पाए यह बात सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ क्योंकि मुझे लगता था कि वह इस बात को लेकर अधिक परेशान हो रहा है इसलिए मैंने उससे कहा कि तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है मेरे पास जितना पैसा जुड़ा हुआ है उससे मैं तुम्हारी फीस को भर सकता हूं जीवन में बदलाव लाये कहानी तुम अपने एग्जाम के बारे में सोचो जो कि कुछ दिन बाद होने वाले हैं तुम्हें इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है तुम्हारी फीस भर दी जाएगी, but तुम्हे इस बात का ध्यान रखना होगा कि कभी भी कोई बात नहीं छुपाओगें क्योंकि जब तुम जानते हो मुझे ऐसा लगता है कि जीवन में बहुत सारे दोस्त मिलते हैं but कुछ ही दोस्त ऐसे होते हैं उनकी परेशानी को दूर करने के लिए हमेशा तैयार रहती है मुझे तो तुम ऐसे ही लग रहे हो उसकी बातों से मुझे ऐसा लग रहा था कि शायद वह बहुत अधिक परेशान है but परेशान होने की जरूरत नहीं है जब तक हम साथ में है कोई भी परेशानी नहीं आने वाली है यह बात उसे सोचनी चाहिए but वह इस बार दुनिया के बारे में सोचता है जिसके बारे में उसे पता है क्योंकि सभी ऐसा सोचते यहां पर कोई भी किसी की मदद करने के लिए तैयार नहीं है इसलिए हमें हमेशा अपने दोस्तों की मदद करते हुए आगे बढ़ना चाहिए हो सकता है वह किसी बात के लिए परेशान हो गया उस बात का पता लगाना चाहिए उसकी परेशानी दूर करने के लिए कोशिश करनी चाहिए शायद सच्ची दोस्ती की मिसाल यही है अगर आपको यह Friendship story in hindi, अगर आपको यह कहानी True friendship story in hindi पसंद आयी है तो शेयर जरूर करे. मैं घोड़े से गिरने के कारण चोटिल हो गया था. Friendship Story of Prithviraj and Chandbardai पृथ्वीराज चौहान और चन्दबरदाई Hindi Friendship Story 5: मध्यकाल में एक शक्तिशाली राजपूत नरेश के रूप में प्रसिद्ध रहे पृथ्वीराज चौहान के बारे में लगभग हर भारतीय जानता है। मुहम्मद गौरी के साथ हुए युद्ध में छल से मिली हार के अलावा पृथ्वीराज ने अपने समूचे जीवन में कोई युद्ध नहीं हारा था। पृथ्वीराज की जीवन गाथा का वर्णन उसके राजदरबारी रहे भाट कवि चन्दबरदाई ने पृथ्वीराज रासो में बड़े ही सुन्दर शब्दों में किया है। पर कम ही लोग जानते हैं कि चंदबरदाई सिर्फ एक राजदरबारी या कवि ही नहीं थे, बल्कि पृथ्वीराज चौहान के परम मित्र भी थे। चन्दबरदाई के जन्म और परिवार से सम्बंधित तथ्य अधिक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह सत्य है कि वह किसी कुलीन या सामंती परिवार से नहीं थे। फिर भी उनकी एक राजा के साथ मैत्री किस प्रकार हुई यह बात आश्चर्यचकित करने वाली है। दरअसल बात यह है कि पृथ्वीराज चौहान और चन्दबरदाई बचपन के मित्र थे। जहाँ पृथ्वीराज को चन्दबरदाई के बुद्धि कौशल और काव्य प्रतिभा ने आकर्षित किया, तो वहीँ चन्दबरदाई को पृथ्वीराज की सरलता और तेजस्विता ने आकर्षित किया। उनकी मित्रता इतनी घनिष्ठ थी कि चन्दबरदाई को पृथ्वीराज के महल में किसी भी समय आने-जाने का अधिकार था। यहाँ तक कि पृथ्वीराज चौहान द्वारा लडे गये प्रत्येक युद्ध में चन्दबरदाई भी साथ ही रहते थे। पृथ्वीराज-संयोगिता के स्वयंवर में भी चन्दबरदाई साथ ही गये थे और जब अपने जीवन के अंतिम युद्ध में पृथ्वीराज को मुहम्मद गौरी ने छल से बंदी बना लिया था तब भी चन्दबरदाई उनके साथ ही थे। चन्दबरदाई के गूढ और अस्पष्ट कथन का मर्म समझकर ही पृथ्वीराज ने वह शब्दवेधी बाण चलाया था जिसके कारण गौरी मरने से बाल-बाल बचा था। दुश्मन की कैद में पड़े रहकर तड़प-तड़पकर मरने से हजार गुना ज्यादा बेहतर है कि वीरोचित तरीके से मरा जाय, इस सिद्धांत में निष्ठा रखने वाले इन दोनों वीर मित्रों ने एक-दूसरे को चाकू घोंपकर मृत्यु का वरण कर लिया था। जिस तरह दोनों मित्र जीते जी साथ रहे, ठीक उसी तरह मृत्यु का आलिंगन भी दोनों ने एक साथ ही किया। लेकिन मौत भी शायद उनकी दोस्ती को नहीं मार सकी और यह फ्रेंडशिप स्टोरी भी सदा-सदा के लिये अमर हो गयी। जानिये कैसे आप अपने रिश्तों के बंधन को और मजबूत बना सकते हैं — 6. हम दोनों मिल गए थे.

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Hindi story on friendship

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वह है, जिसके जीवन में सच्चे दोस्त के रूप में यह ख़ूबसूरत रिश्ता है. सोचते-सोचते एक उपाय उसके दिमाग में आ गया. Indeed, friendship manifests in many different ways among these stories. मुझे अपने किये पर बहुत शर्मिंदगी है. अपनी अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए थे. वह भूल गया होगा.


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7 Friendship Stories in Hindi: इतिहास की सर्वश्रेष्ठ मित्रताएँ

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यदि किसी जानवर ने हम पर हमला कर दिया, तो हम क्या करेंगे? वह जमीन पर गिर पड़ा और अपनी सांस रोककर एक मृत व्यक्ति की तरह लेटा रहा. समय पर राजा के समक्ष न पहुँचने पर उसके मित्र के प्राण संकट में पड़ सकते थे. आप अपने comments के द्वारा हमें अवश्य बतायें. Best Poems on Friendship in Hindi दोस्त होना मतलब दूसरों के साथ हमारे जीवन को साझा करना। हमारे जीवन के कुछ पहलू हैं जिनकी आवश्यकता है कि हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करने के लिए एक साथ बहुत समय बिताएं। कई बार केवल कुछ शब्दों को share करना पर्याप्त से अधिक होता है। जरुरी नहीं है कि हमेशा एक लंबी बातचीत ही गहरी भावनाओं को बताती है। कभी-कभी, अभिव्यक्ति के लंबे लेख निरर्थक लग सकते हैं और इसमें प्रचुरता नहीं होती है। संक्षिप्त शब्दों में कागज़ पर शब्दों का सही combination डाल देने मात्र से काम हो सकता है। Dosti par kavita. मगर एक दिन हम दोनों मिल गए थे. राज ने पूरी बात सुनने से पहले ही सादिम के हाथ से लेकर फोन काट दिया! तब सर्प ने कहा कि हां, तब में चला जाऊंगा। अब जो मित्र जाग रहा था वो अपने मित्र जो सो रहा था उसके छाती पर हात में चाकू लेके बैठ गया, जैसे ही उसका मित्र उसके छाती पर हात में चाकू लेकर बैठ गया, तब सोते हुए मित्र कि आंख खुल गई और तब उसने देखा कि मेरा मित्र मेरे छाती के उपर बैठा हुआ है और उसके हात मै चाकू भी है। ये देखकर वो फिरसे सो गया और उसके बाद उस दूसरे मित्र ने अपने सोते हुए मित्र के सीने पे हलका सा चाकू चलाया और उसके सीने से थोड़ा सा खून निकाला और सर्प को पिलाया और उस सर्प को वहा से भगा दिया। दूसरे दिन वो दोनो जंगल से चले गए। नाही उस मित्र ने पूछा और नाही ही उस मित्र ने बताया। पर इस मित्र को बड़ा आश्चर्य हुआ कि मै इसके उपर चाकू लेकर बैठा था और ये बेपरवाह होकर सोता रहा। इसे कोई चिंता ही नही थी, फिर बाद मै इसी मित्र ने कहा कि मै आधी रात को तुम्हारे उपर चाकू लेकर बैठा था? The story takes in the themes of loneliness, alienation, and the need for human connection and friendship.

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सच्ची दोस्ती Hindi Story on True Friendship

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समीर भी बोला तो आयुष नें नम आँखों से अपने दोस्तो को देखा था। आयुष : सादिम कहाँ है??? आयुष उठ कर सलीम के गले लग गया। अच्छा साले! यदि वह वापस न आये, तो उसके स्थान पर मृत्युदंड दे दिया जाये. मुझे कुछ पता नहीं था. हमारा सच्चा दोस्त कौन है? श्याम को ६ घंटे का समय दिया गया, जिसमें उसे अपने परिवार से मिलकर वापस आना था. Indeed, friendship is the central theme in many of them. The protagonist, Jimmy Doyle, and his European friends walk around Dublin, go to dinner at a hotel, talk about politics and music among other things, and then catch the train to the harbour where they go to a yacht and proceed to get drunk dancing and playing cards. अमोघ वैष्णवास्त्र की चोट स्वयं सही, कर्ण और दूसरे महारथियों के घातक तीर सहे और सारथि बनने जैसा निंदनीय कर्म भी किया। उनकी इस मित्रता को देखकर ही श्री व्यास जी महाराज ने अर्जुन और कृष्ण को दो शरीर एक प्राण कहा है। अब आप ही बताइये क्या ऐसी फ्रेंडशिप स्टोरी आपने कहीं और सुनी है? हैसियत में अंतर होने के बावजूद दोनों पक्के दोस्त थे.


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Short story about friendship

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उनका अधिकांश समय एक-दूसरे के साथ ही गुजरता. बहुत जल्द उन्हें देश सेवा का अवसर भी प्राप्त हो गया. भरे दरबार में राजा ने उसे मृत्युदंड सुनाया. Friendship Story of Hanuman and Sugreeva हनुमान और सुग्रीव Hindi Friendship Story 4: रामायणकाल में पारिवारिक आदर्शों और मानवीय मूल्यों का बहुत ही उच्च स्तर देखने में आया है और मित्रधर्म के संबंध में तो कई जगह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इतिहास की सर्वश्रेष्ठ मित्रताएँ इसी युग में ही पनपी हों। इस श्रंखला में हम श्रीराम और निषादराज गुहा की पवित्र मैत्री का उल्लेख कर सकते हैं, जहाँ निषादराज श्रीराम की सेवा करने के लिये वन में ही रुक जाना चाहता है। यहाँ तक कि रामजी की सुरक्षा के लिये वह भरत से युद्ध करके भ्रम के कारण मृत्यु को गले लगाने का भी साहस रखता है। इसके पश्चात श्रीराम और सुग्रीव और श्रीराम और विभीषण की मित्रता भी अत्यंत ही उच्चकोटि की मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत करती है। लेकिन इस काल की एक मैत्री ऐसी भी है जिसका उल्लेख विद्वानों ने कम ही किया है और उसका कारण आसानी से समझा भी जा सकता है, क्योंकि पूरी रामायण श्रीराम, रावण और देवी सीता के इर्द-गिर्द्ध ही घूमती है। आज हम इस काल की एक ऐसी ही विस्मरण कर दी गयी मैत्री का उल्लेख कर रहे हैं जिसकी धुरी दो वानर वीर थे। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं महावीर हनुमान और वानरराज सुग्रीव की मित्रता की। केसरीनंदन हनुमानजी और सुग्रीव दोनों ही बचपन के मित्र थे और मित्रता का यह सम्बन्ध उनकी आयु बढ़ने के साथ-साथ परवान चढ़ता गया। जब सुग्रीव को उसके अतुलित बलशाली भाई बाली ने राज्य से बाहर निकाल दिया तब वह हनुमानजी ही थे जो अपने मित्र की सहायता करने के लिये अपने पिता का राज्य छोड़कर उसका साथ देने चले आये थे। वर्षों तक श्रीहनुमान ने सुग्रीव की सेवा और सुरक्षा का भार संभाले रक्खा था। श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री कराकर हनुमान ने ही उसे बाली के आतंक से मुक्त कराया और राज्य वापस दिलाया। जब सुग्रीव के अपने वचन को भुला देने के कारण लक्ष्मण का क्रोध जाग उठा था, तब हनुमानजी ने ही सुग्रीव और राज्य की रक्षा की थी। इसके पश्चात लंका युद्ध में भी हनुमानजी कई बार सुग्रीव की रक्षा करते हैं। महावीर हनुमान जी की निश्चल मित्रता और अपने प्रति स्नेह को देखकर सुग्रीव हमेशा उनके प्रति कृतज्ञ बने रहते हैं। इस मित्रता की पुष्टि स्वयं हनुमान महाभारत में भीम के साथ संवाद करते समय करते हैं। समस्त वानर जाति के एकछत्र सम्राट होने के बावजूद वह हनुमानजी को हमेशा एक सच्चे मित्र के ही रूप में देखते हैं और उनकी प्रत्येक बात का आँख मूंदकर अनुमोदन करते हैं। इसका पता तब चलता है जब विभीषण लंका छोड़कर श्रीराम की शरण में आते हैं और आश्रय मांगते हैं, लेकिन सुग्रीव शत्रु का भाई होने के कारण उसे कैद कर लेना चाहते हैं। तब हनुमानजी के कहने पर ही सुग्रीव अपने उस विचार को टालते हैं और श्रीराम की बात का समर्थन करते हैं। जानिये क्या हैं जिंदगी को खुशहाल बनाने वाले 75 Golden Rules — Real Friendship Stories in Hindi 5. उसे सोचा कि मोहन भी पेड़ पर चढ़ जायेगा.

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