Short essay on pollution in hindi. वायु प्रदूषण पर निबंध 2022-10-02

Short essay on pollution in hindi Rating: 8,9/10 135 reviews

प्रदूषण एक ऐसा समस्या है जो हमारे पर्यावरण और हमारे स्वास्थ्य को बहुत ही नुकसान पहुंचाता है। इसमें हमारे घरों, सड़कों, नदियों और जल संसाधनों में विभिन्न प्रकार के तथ्याग्रह जैसे कचरा, वायु प्रदूषण, धुले हुए जल और महकमय जगहों से निकलने वाले सुगन्धित गैस जैसे कोईभी अवस्थाओं में होती है।

प्रदूषण हमारे पर्यावरण को बहुत ही नुकसान पहुंचाता है, जैसे ही हमारे वातावरण, जल संसाधन और जंगलों में प्रदूषण होता है तो वह हमारे स्वास्थ्य को भी बहुत ही नुकसान पहुंचाता है। यह हमारे शरीर में विभिन्न तरह क

short essay on pollution in hindi for class 6

short essay on pollution in hindi

पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हमें ऑक्सीजन देते हैं अगर पेड़ ही नहीं होंगे तो हमें ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और हमारा जीवन समाप्त हो जाएगा. जल प्रदूषण को कम करने के लिए हमें साफ सफाई की ओर अधिक ध्यान देना होगा हम नदियों तालाबों में ऐसे ही कचरा डाल देते है. Environmental Pollution Essay in English 150 words 15 lines about pollution from which you can easily know about it — 1. जो जल को जहरीला बना देता है जिसके कारण नदी में रहने वाले जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है और यही जहरीला जल हमें पीने को मिलता है जिसके कारण तरह-तरह की बीमारियां फैलती है. प्रदूषण के प्रकार — प्रदूषण को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मुख्यतः तीन भागों में बाटा गया है इसके अलावा भी बहुत प्रकार के प्रदूषण होते है — वायु प्रदूषण — हवा में प्रदूषित कारको के मिश्रण के कारण वायु प्रदूषण होता है वायु प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत मोटर वाहनों से निकलने वाला धुआं, कल कारखानों और चिमनीओं से निकलने वाला धुआं, धूल उड़ने से, वस्तुओं के सड़ने से उत्पन्न हुई दुर्गंध, पटाखों इत्यादि कारणों से वायु प्रदूषण फैलता है. जल प्रदूषण को बढ़ाने में हमारी सरकारें भी कम नहीं है क्योंकि गटर से निकलने वाला पानी अक्सर नदियों और समुद्रों में छोड़ दिया जाता है जिसके कारण पूरा जल प्रदूषित हो जाता है.

Next

प्रदूषण पर निबंध

short essay on pollution in hindi

. इसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति या अन्य कोई जीव जंतु कि कुछ ही समय में मृत्यु हो जाती है. हमारे भारत देश को तो जात-पात और आरक्षण से ही फुर्सत नहीं मिल रही है तो वह पर्यावरण के बारे में क्या सोचेगा. . मुख्य रूप से धुआ सबसे अधिक वायु प्रदूषण को फैलाता है. यह समस्या वहां अधिक होती हैं जहां सघन आबादी होती है, वृक्षों का अभाव होता है और वातावरण तंग होता है। प्रदूषणों के दुष्परिणाम: उपर्युक्त प्रदूषणों के कारण मानव के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है। खुली हवा में लम्बी सांस लेने तक को तरस गया है आदमी। गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियां पैदा करती हैं। भोपाल गैस कारखाने से रिसी गैस के कारण हजारों लोग मर गए, कितने ही अपंग हो गए। पर्यावरण-प्रदूषण के कारण न समय पर वर्षा आती है, न सर्दी-गर्मी का चक्र ठीक चलता है। सुखा, बाढ़, ओला आदि प्राकृतिक प्रकोपों का कारण भी प्रदूषण है।. हमें वायु को भी कम दूषित करना चाहिए और अधिक से अधिक पेड पौधे लगाने चाहिये ताकि अम्लीय वर्षा को रोक। ज। सके । 13.

Next

पर्यावरण प्रदुषण विषय पर निबंध / Essay On Pollution In Hindi

short essay on pollution in hindi

इसके कारण बड़े महानगरों में जीवन बहुत कठिन हो गया है यहां पर हर दिन कोई ना कोई नई बीमारी जन्म ले रही है. प्रदूषण के कारण तरह-तरह की विकराल बीमारियां जन्म ले रही है जिसे कैंसर, डायबिटीज, अस्थमा, हृदय की बीमारी इत्यादि के कारण मानव की आयु कम हो गई है. पुन: उपयोग योग्य डस्टर और झाड़ू का उपयोग करें। 9. Short Essay on Paryavaran Pradushan in Hindi प्रदूषण की बात करें तो सरल से शब्दों में कहा जाए तो ये एक ऐसी बीमारी है जिसका खात्मा होना नामुमकिन ही है लेकिन इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रदूषण से प्रत्येक व्यक्ति, जनजाति, पशु, पक्षी, जीव जन्तु सब के सब परेशान है। प्रदूषण ऐसी बीमारी है जिसका इलाज करना मुश्किल है। प्रत्येक वर्ष हम प्रदूषण की मात्रा में वृद्धि पाते है, प्रत्येक वर्ष प्रदूषण में वृद्धि हो रही है। प्रदूषण के कारण बच्चों में कुपोषण की स्थिति पायी जाती है। बच्चे बचपन से ही किसी न किसी रोग से निरस्त रहते है जैसे की- आंखे कमजोर होना, दौड़ने पर सांस फूलना, बचपन से ही बुद्धि कमजोर होना, चेहरे की चमक ऊढ़ जाना। प्रदूषण से न जाने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गयी है। प्रदूषण के बारे में कहा जाए की ये एक दीमक की तरह पूरे संसार को खोकला कर रही है तो शायद ये गलत नही होगा। प्रदूषण से आज कल के लोग समय से पहले ही बूढ़े दिखने लग जाते है। समय से पहले ही उनकी अनेकों बीमारियों की चलते मृत्यु हो जाती है समय से पहले ही उनकी न जाने कितनी बीमारियां हो जाती हैं। प्रदूषण के कारण लोगों को कैंसर जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। हम सभी को प्रदूषण से बचना चाहिए। यदि हम सभी प्रदूषण से बचे रहेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी भी प्रदूषण से बची रहेगी। यदि आज हम प्रदूषण फैलाएंगे और प्रदूषण को बढ़ाने में उसकी मदद करेंगे तो यकीन मानिए बहुत ही कम समय बचेगा जब यह दुनिया खत्म होने वाली होगी। प्रदूषण की बात करें तो ये हर जगह हवा की तरह फैला हुआ है जैसे की बात की जाए तो हवा में कारखानों द्वारा निकले धुएँ से हृदय रोग फैलते है, आंखों में जलन पैदा होती है, मिट्टी प्रदूषण से हमारे फल सब्जी, फसल आदि प्रदूषित हो जाती है, नदी नालों में अपशिष्ठ फेकने से भी हैजा पेट दर्द, पथरी जैसे अनेकों बीमारी फैलती है। बात की जाए तो इस दुनिया में रहने वाले सभी लोग आज के समय में बिना वाहनों के इधर से उधर नहीं जाते हैं उन वाहनों में डाला गया पेट्रोल डीजल जिससे धुआ बनता है वह सबसे ज्यादा प्रदूषण फैला रहा है। यदि हम उस प्रदूषण को नहीं रोक पाए तो यकीन मानिए एक समय ऐसा आएगा कि जो व्यक्ति आज 50, 60 की 70 की उम्र तक पहुंच जाता है। उसकी आयु मात्र 20 साल ही रह जाएगी या हो सकता है उससे भी कम देखिए प्रदूषण की समस्या कोई छोटी मोटी समस्या नहीं है जो सुलझाया जा सके। प्रदूषण की समस्या बहुत बड़ी समस्या है और देखा जाए तो इसे हम सब रोक सकते है। यदि आप प्रदूषण के प्रति जागरूक है तो आप सभी को पता होगा कि प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है और यदि नहीं पता है तो मैं आपको बताता हूं प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे पहले तो आपको यह देखना होगा कि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है जैसे कि मान लीजिए आपकी गाड़ी है, आपकी गाड़ी की सर्विस अगर आप समय पर नहीं कराते हैं तो गाड़ी से निकलने वाला काला धुआं है बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलता है। गाड़ी के इंजन से काला धुआं निकलता जो कि सबसे ज्यादा हानिकारक होता है आप नशा पान धूम्रपान करते हैं उससे जो धुआ निकलता है वह भी एक कारण है। आप यदि आपके पास फैक्ट्री है या नाले है जहां पर लोग सफाई की स्वच्छता नहीं रख पाते है, सफाई को बरकरार नहीं रख पाते हैं उस जगह प्रदूषण फेलने का सबसे ज्यादा उम्मीद की जा सकती है। यकीन मानिए प्रदूषण को रोकना तो बहुत मुश्किल है लेकिन उसे कम जरूर किया जा सकता है। यदि आप प्रदूषण के खिलाफ एक मुहिम चलाएं। मान लीजिए अगर आपके आसपास में कहीं लोग कूड़ा गली के आस पास बैठते हैं तो आप उनको खुद उठा कर या फिर किसी से कह कर उनको इकठ्ठा करवा कर कहीं उसको अलग सही जगह भेज सकते है जिससे प्रदूषण पर रोकथाम हो सकती है। हो सके तो आप ईंधन का प्रयोग न करके बिजली द्वारा निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करेंगे तो काफी हद तक प्रदूषण पर रोक की जा सकती है। प्लास्टिक का प्रयोग न करके कागज के प्रयोग कर सकते है। आपको प्रदूषण से बचना चाहिए और अपने आस पास प्रदूषण फेलने से रोकथाम करनी चाहिए। आपको अगर हमारा ये लेख अच्छा लगा हो तो इसे share करना न भूलें Types of Pollution Essay in English — First of all, factories should be kept away from areas where people are populated so that people do not get harmed by pollution from the factories, and CNG and electric vehicles should be used in vehicles. हमारे विश्व की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण होता है यह प्रदूषण जीव जंतु से लेकर एक आम मानव के जीवन का काल बन चुका है। 3. कुछ स्थानों पर तो ऐसा लगता है कि नदी में जल की जगह कचरा बह रहा है, कुछ लोग अपनी नित्य क्रिया, कपड़े धोने, जानवरों को नहलाना भी नदियों के पास करते है जिसके कारण उनका जल दूषित हो जाता है.

Next

प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi)

short essay on pollution in hindi

जो भी व्यक्ति या संस्थान प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है उन पर सख्त कार्यवाही की जा रही है. Water is a precious gem that will not be found again. हमें लोगों को समझाना होगा कि अगर हम यूं ही प्रदूषण फैलाते रहे तो आगे आने वाली पीढ़ी का जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा. विज्ञान ने आज बहुत तरक्की कर ली है लेकिन प्रदूषण को रोकने में आज भी सफल नहीं हो पाई है. जल, वायु, मृदा तथा संपूर्ण भूमंडल प्रदूषण की चपेट में आ गया है.

Next

प्रदूषण पर निबंध / Essay on Pollution in Hindi

short essay on pollution in hindi

Because of this their hearing power is reduced. जल प्रदूषण — जल में कई प्रकार के हानिकारक केमिकल्स, जीवाणु इत्यादि मिलने के कारण जल प्रदूषण होता है जल प्रदूषण के मुख्य स्रोत फैक्ट्री और कारखानों से निकलने वाला प्रदूषित जल का नदियों और तालाबों में मिलना, गटर लाइन को नदियों में छोड़ना, जल में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ डालने के कारण जल प्रदूषण फैलता है. यह प्रदूषण आंखों से दिखाई नहीं देता लेकिन स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक खतरनाक होता है. वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा कैंसर चर्म रोग आंखों में जलन हृदय संबंधी बीमारियां हो जाती है जिसके कारण मानव और अन्य जीव जंतुओं की असमय मृत्यु हो जाती है. प्रदूषण इतनी तेजी से फैल रहा है कि आजकल तो ऐसा लग रहा है कि यह हमारे जीवन का हिस्सा सा बन गया है.

Next

वायु प्रदूषण पर निबंध

short essay on pollution in hindi

भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण आदि. इससे नदियों में रहने वाले जीवो की मृत्यु हो जाती है. प्रदूषण की वजह से हमारी पृथ्वी की ओजोन परत नष्ट हो रही है। प्रदूषण के चलते चारों ओर बना वातावरण नष्ट हो रहा है, यह वातावरण हमें सूरज से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है जो आज प्रदूषण की वजह से खतरे में है। 8. उपसंहार — हमारी पृथ्वी पर प्रदूषण जिस तरह से बढ़ रहा है आने वाले कुछ सालों में यह विनाश का रूप ले लेगा, अगर जल्द ही प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ सख्त नियम नहीं बनाए गए तो हमारी पृथ्वी का पूरा वातावरण खराब हो जाएगा और हमारा जीवन संकट में पड़ सकता है. आजकल हर व्यक्ति अपना वाहन लेकर चलता है जो कि वायु प्रदूषण की समस्या को और बढ़ा देता है. और आजकल अधिक रोशनी वाली लाइटो का उपयोग किया जाता है जिसके कारण रात में भी दिन जैसा लगता है.


Next

Pollution Essay in Hindi ( प्रदूषण पर निबंध हिंदी में ) 500+ Words

short essay on pollution in hindi

In such a situation people should eat clean and hygienic vegetables. जिसके कारण वह जल बहुत अधिक गर्म हो जाता है और वह सीधा नदियों में छोड़ दिया जाता है जिसके कारण अचानक जल के तापमान में बदलाव हो जाता है. किसी बाहरी कारक के कारण वायु के भौतिक तत्वों में बदलाव आना ही वायु प्रदूषण कहलाता है. वर्तमान में विज्ञान की प्रगति के कारण बिजली का बहुत अधिक उपयोग हो रहा है. Otherwise, it is very difficult to get a drop of water till their time, open and clear air is available. उपसंहार — हमारे देश में पर्यावरण प्रदूषण के निराकरण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए है, हमारी सरकार ने मध्य प्रदेश में प्रदूषण संस्थान की स्थापना की है जोकि प्रत्येक वर्ष सरकार को प्रदूषण संबंधी जानकारियां देंगी. वायु प्रदूषण वर्तमान समय पूरे विश्व में विशेषरुप से औद्योगिकीकरण के कारण बड़े शहरों में सबसे बड़ी समस्या है। पर्यावरण में धूंध, धुआं, विविक्त, ठोस पदार्थों आदि का रिसाव शहर के वातावरण को संकेन्द्रित करता है जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरनाक बीमारी हो जाती हैं। लोग दैनिक आधार पर बहुत सा गंदा कचरा फैलाते हैं, विशेषरुप से बड़े शहरों में जो बहुत बड़े स्तर पर शहर के वातावरण को प्रदूषित करने में अपना योगदान देता है।मोटर साइकिल बाइक , औद्योगिक प्रक्रिया, कचरे को जलाना आदि के द्वारा निकलने वाला धुआं और प्रदूषित गैसें वायु प्रदूषण में में अपना योगदान देती हैं। कुछ प्राकृतिक प्रदूषण भी जैसे पराग-कण, धूल, मिट्टी के कण, प्राकृतिक गैसें आदि वायु प्रदूषण के स्त्रोत है। वायु प्रदूषण पर छोटे तथा बड़े निबंध Short and Long Essay on Air Pollution in Hindi, Vayu Pradushan par Nibandh Hindi mein निबंध 1 250 शब्द वायु प्रदूषण पूरी वायुमंडलीय हवा में बाह्य तत्वों का मिश्रण है। उद्योगों और मोटर वाहनों से उत्सर्जित हानिकारक और बिषैली गैसें मौसम, पेड़-पौधों और मनुष्य सभी को बहुत हानि पहुँचाती हैं। कुछ प्राकृतिक और कुछ मानवीय संसाधन वायु प्रदूषण के कारक हैं। हालांकि सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण मानव गतिविधियों के कारण होता है जैसे: जीवाश्म, कोयला और तेल का जलना, हानिकारक गैसों को छोड़ना और कारखानों और मोटर वाहनों के पदार्थ आदि। इस तरह के हानिकारक रासायनिक तत्व जैसे कार्बन ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, ठोस पदार्थ आदि ताजी हवा में मिश्रित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बड़े स्तर पर बढ़ा है, जिसका कारण पिछली शताब्दी में मोटर वाहनों की बढ़ती हुई आवश्यकता है, जिससे 69% तक वायु प्रदूषण में वृद्धि की है। वायु प्रदूषण के अन्य स्त्रोतों में लैंडफिल में कचरे का अपघटन और ठोस पदार्थों के निराकरण की प्रक्रिया से मीथेन गैस जो स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक होता है का निकलना है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, स्वचलित वाहनों के प्रयोग में वृद्धि, हवाई जहाज आदि ने इस मुद्दे को गंभीर पर्यावरण का मुद्दा बना दिया है। जिस हवा को हम सांस के द्वारा प्रत्येक क्षण लेते हैं, वो पूरी तरह से प्रदूषित है जो हमारे फेफड़ों और पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण के माध्यम से जाती है और अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है। प्रदूषित वायु पेड़-पौधों, पशुओं और मनुष्य के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से नष्ट करने का कारण बनती है। यदि पर्यावरण को सुरक्षित करने वाली नीतियों का गंभीरता और कड़ाई से पालन नहीं किया गया तो वायु प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर आने वाले दशकों में 1 मिलियन टन वार्षिक के आधार पर बढ़ सकता है। निबंध 2 300 शब्द जब शुद्ध ताजी हवा धूल, धुआं, विषैली गैसों, मोटर वाहनों, मिलों और कारखानों आदि के कारण प्रदूषित होती है, तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, ताजी हवा स्वस्थ्य जीवन का बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है, हमें यह सोचने की जरुरत है, तब क्या होगा जब पूरे वातावरण की वायु गंदी हो जायेगी। सबसे पहले वायु प्रदूषण पूरी मानव जाति के लिये बड़े खेद की बात है। वायु प्रदूषण के कुछ प्रमुख बड़े कारकों में भोले किसानों को द्वारा अपनी फसल की ऊपज को बढ़ाने के लिये विषैले उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग है। इन उर्वरकों से रासायनिक और खतरनाक गैसें अमोनिया निकलती हैं, और वायु में मिलकर वायु प्रदूषण का कारण बनती है। जीवाश्म ईधन का जलना जैसे; कोयला, पैट्रोलियम जिसमें अन्य कारखानों के जलावन भी शामिल है, आदि वायु प्रदूषण के मुख्य कारक हैं। मोटर वाहनों और स्वचलित वाहनों से निकलने वाला विभिन्न प्रकार का धुआं जैसे कारों, बसों, बाइक, ट्रक, जीप, ट्रेन, हवाई जहाज आदि भी वायु प्रदूषण का कारण हैं। उद्योगों की बढ़ती संख्या के कारण विषैले औद्योगिक धुएं और हानिकारक गैसें जैसे कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बनिक यौगिकों, हाइड्रोकार्बन, रसायन, आदि कारखानों तथा मिलों में से पर्यावरण में छोड़ी जाती हैं। कुछ घरेलू गतिवधियाँ जैसे सफाई करने के लिये अज्ञानतावश सफाई उत्पादकों का प्रयोग करना, कपड़े धोने का पाउडर, पेंट आदि भी बहुत से विषैले रसायनों को वायु में छोड़ता है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर ने इसके सजीवों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक और हानिकारक प्रभावों को भी बढ़ाया है। वायु प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने का भी कारण है क्योंकि वातावरण का तापमान ग्रीन हाउस गैसों के स्तर के बढ़ने के कारण ही बढ़ रहा है। ये ग्रीन हाउस गैसें ग्रीन हाउस प्रभाव और बढ़ता हुआ समुद्र का स्तर, ग्लेशियर का पिघलना, मौसम का बदलना, जलवायु का बदलना आदि को फिर से बढ़ाती हैं। बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण कई घातक रोगों कैंसर, हार्टअटैक, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गुर्दें की बीमारियाँ आदि और मृत्यु का कारण बन रहा है। बहुत से महत्वपूर्ण पशुओं और पेड़-पौधों की प्रजातियाँ इस ग्रह से पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। पर्यावरण में हानिकारक गैसों का बढ़ना अम्लीय वर्षा और ओजोन परत के क्षरण का कारण बन रहा है। निबंध 3 400 शब्द वातावरण की ताजी हवा में हानिकारक और विषैले पदार्थों का लगातार बढ़ना वायु प्रदूषण का कारण है। विभिन्न बाह्य तत्वों, विषाक्त गैसों और अन्य मानवीय क्रियाओं के कारण उत्पन्न प्रदूषण ताजी हवा को प्रभावित करता है जो प्रतिकूलता से फिर मानव जीवन, पेड़-पौधों और पशुओं को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण का स्तर उन सभी प्रदूषणों पर निर्भर करता है जो विभिन्न स्त्रोतों से निकलता है। स्थलाकृति और मौसम की स्थिति प्रदूषण की निरंतरता को बढ़ा रही हैं। उद्योगों में विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल से हानिकारक गैसों के उत्सर्जन की मात्रा बढ़ती जा रही है। बढ़ता हुआ जनसंख्या घनत्व और अधिक औद्योगिकीकरण की मांग कर रहा है, जो आखिरकार वायु प्रदूषण का कारण बनता है। वायु प्रदूषण हानिकारक तरल बूंदों, ठोस पदार्थों और विषाक्त गैसों कार्बन ऑक्साइड, हलोगेनटेड और गैर- हलोगेनटेड हाईड्रोकार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर गैसें, अकार्बनिक पदार्थ, अकार्बनिक और कार्बनिक अम्ल, बैक्टीरिया, वायरस, कीटनाशक आदि का मिश्रण है, जो सामान्यतः ताजी हवा में नहीं पाये जाते और पेड़-पौधों और पशुओं के जीवन के लिये बहुत खतरनाक है। वायु प्रदूषण दो प्रकार का होता है जोकि प्राकृतिक और मानव निर्मित स्त्रोत है। वायु प्रदूषण के कुछ प्राकृतिक स्रोतों जैसे, ज्वालामुखी विस्फोट, ज्वालामुखी राख, कार्बन डाइऑक्साइड, धुआं, धूल, और अन्य गैसें , रेत संकुचन, धूल, समुद्र और महासागर की लवणीयता, मिट्टी के कण, तूफान, जंगलों की आग, ब्रह्मांडीय कण, किरण, क्षुद्रग्रह सामग्री की बमबारी, धूमकेतु से स्प्रे , पराग अनाज, कवक बीजाणु, वायरस, बैक्टीरिया आदि है। वायु प्रदूषण के मानव निर्मित साधन उद्योग, कृषि, ऊर्जा सयंत्र, स्वचलित वाहन, घरेलू स्त्रोत आदि है। मानव निर्मित साधनों से कुछ वायु प्रदूषण जैसे धूम्रपान, धूल, धुएं, पार्टिकुलेट पदार्थ, रसोई से गैस, घरेलू ऊष्मा, विभिन्न वाहनों से निकलने वाला धुआं, कीटनाशकों का उपयोग, खर-पतवार को मारने के लिये प्रयोग की जाने वाली विषाक्त गैसें, ऊर्जा संयत्रों से निकलने वाली ऊष्मा, फ्लाई ऐश आदि से होता है। वायु प्रदूषण की संख्या बढ़ने के कारण इसे दो प्रकार में बांटा गया, प्राथमिक प्रदूषण, और द्वितीयक प्रदूषण। प्राथमिक प्रदूषण वो है जो प्रत्यक्ष रुप से ताजी हवा को प्रभावित करता है और धुआं, राख, धूल, धुएं, धुंध, स्प्रे, अकार्बनिक गैसों, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, नाइट्रिक ऑक्साइड और रेडियोधर्मी यौगिकों से उत्सर्जित होता है। द्वितीयक प्रदूषक वो हैं जो वायु को अप्रत्यक्ष रुप प्राथमिक कारकों के साथ रासायनिक क्रिया करके जैसे सल्फर ट्राई ऑक्साइड, ओजोन, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, आदि से प्रभावित करते हैं। पूरी दुनिया के लोगों के सामूहिक प्रयासों के द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए, लम्बी चिमनी का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये फिल्टर और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स के साथ , छोटे तापमान सूचकों के स्थान पर उच्च तापमान संकेतकों को प्रोत्साहन, ऊर्जा के अज्वलनशील स्रोतों का उपयोग करना, पैट्रोल में गैर-नेतृत्वकारी एन्टीनॉक ऐजेंट के प्रयोग को बढ़ावा देना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और भी बहुत से सकारात्मक प्रयासों को करना। Post navigation.

Next

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

short essay on pollution in hindi

प्रदूषण का एक सबसे अहम कारण यह भी है कि आम लोग जो जंगलों को काट रहे है, पहाड़ नष्ट कर रहे है, वनस्पति के साथ खिलवाड़ कर रहे है उनकी वजह से आज प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। 7. वायु प्रदूषण चिंता का विषय है क्योंकि विश्व में सबसे विश्व में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष दश में हमारे देश के ही शहर आते है. आज संसार की लगभग सभी वस्तुएं चाहे वह सजीव है या निर्जीव किसी न किसी रूप में प्रदूषित होती जा रही है. आज ही प्रण ले अपने हर जन्मदिन पर कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं. अगर यही जल जहरीला होने लगा तो तरह-तरह की बीमारियां फैल जाएंगी जो की महामारी का रूप भी ले सकती है इसलिए हमें कूड़ा करकट नदियों और तालाबों में नहीं डालना चाहिए. प्रदूषण के कारण जीव जंतु में इसकी चपेट में आ गए हैं जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां तो विलुप्त हो चुकी है और कुछ विलुप्त होने की कगार पर है.

Next

essay on pollution : प्रदूषण पर हिन्दी निबंध

short essay on pollution in hindi

वायु प्रदूषण जैसे की हमारे यातायात के साधन जिनसे बहुत ही खतरनाक और विषैली गैस निकलती है, जो की सभी जीव जंतु के लिए बहुत ही हानिकारक होती है, इस प्रदूषण से हमें कई प्रकार बीमारियां जैसे की साँस से संबंधित, हृदय से संबंधित, आँखों से संबंधित बीमारियां हो जाती है और ये सभी के लिए बहुत ही जान लेवा होती है। 5. Earth pollution- discharge of urine and excreta as well as spitting here and there, throwing the garbage on streets instead of putting in the dustbin, the blowing of wind full of garbage, dirt and sand, the falling of garbage in bites here and there from the overloaded municipal carts and trucks add to earth pollution. नदियों को साफ करें — हम सबको मिलजुल कर नदियों तालाबों और समुद्रों को साफ करना होगा, क्योंकि वही से हमें पीने के लिए जल मिलता है और अन्य प्राणियों को भी जल मिलता है. पृथ्वी पर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मिट्टी है जो प्रत्यक्ष रुप से वनस्पतियों और धरती पर मानव जाति तथा पशुओं को अप्रत्यक्ष रुप से सहायता करती है।रसायनिक खादों, कीटनाशक दवाइयाँ, औद्योगिक कचरों आदि के इस्तेमाल के द्वारा छोड़े गये जहरीले तत्वों के माध्यम से मिट्टी प्रदूषित हो रही है जो बुरी तरह से भूमि की उर्वरता को भी प्रभावित कर रहा है। रसायनों के माध्यम से मिट्टी में अवांछनीय बाहरी तत्वों के भारी सघनता की उपलब्धता के कारण मृदा प्रदूषण मिट्टी के पोषकता को कमजोर कर रहा है। मृदा प्रदूषण पर छोटे तथा बड़े निबंध Short and Long Essay on Soil Pollution in Hindi, Mrida Pradushan par Nibandh Hindi mein मृदा प्रदूषण: उर्वरक और औद्योगिकीकरण — निबंध 1 250 शब्द मृदा प्रदूषण उपजाऊ भूमि की मिट्टी का प्रदूषण है जो कि धीरे-धीरे उर्वरक और औद्योगिकीकरण के उपयोग के कारण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। आधुनिक समय में पूरी मानव बिरादरी के लिए मृदा प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिए मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। जहाँ यह कई छोटे-छोटे जानवरों का घर है वहीँ यह पौधों का जीवन भी है। मिट्टी का मनुष्यों द्वारा जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए विभिन्न फसलों के उत्पादन के लिए भी उपयोग किया जाता है। हालांकि मानव आबादी में वृद्धि से जीवन को आराम से जीने के लिए फसलों के उत्पादन और अन्य तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता बढ़ जाती है। कई अत्यधिक प्रभावी उर्वरक बाजार में उपलब्ध हैं जो फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं लेकिन फसल पर इसका छिड़काव करते ही पूरा उर्वर मिट्टी को ख़राब करते हुए प्रदूषण फ़ैला देता हैं। अन्य कीटनाशकों की किस्में जैसे फंगीसाइड आदि भी किसानों द्वारा कीड़े और कवक से अपनी फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। इस प्रकार के कीटनाशक भी बहुत जहरीले होते हैं तथा भूमि और हवा को प्रदूषित करके पर्यावरण में उनके दुष्प्रभावों को फैलाते हैं। मृदा प्रदूषण के अन्य तरीकों में अम्लीकरण, एग्रोकेमिकल प्रदूषण, सेलीनाइजेशन और धातुओं के कचरे द्वारा फैलाया प्रदूषण शामिल है। एसिडिफिकेशन एक सामान्य प्राकृतिक कारण है जो दीर्घकालिक लीचिंग और माइक्रोबियल श्वसन से जुड़ा हुआ है जिससे धीरे-धीरे मिट्टी के जैविक पदार्थ जैसे ह्यूमिक और फुल्विक एसिड विघटित होते हैं जो फिर से लीचिंग को उत्तेजित करता है। उपजाऊ भूमि पर अकार्बनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी का प्रदूषण स्तर बढ़ गया है और मिट्टी की उर्वरता कम हो गयी है। मृदा प्रदूषण के कारण — निबंध 2 300 शब्द मृदा प्रदूषण उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो विभिन्न जहरीले प्रदूषकों की वजह से मिट्टी की उत्पादकता को कम कर देता है। जहरीले प्रदूषक बहुत खतरनाक होते हैं और मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कीटनाशकों, उर्वरक, रसायन, रेडियोधर्मी अपशिष्ट, जैविक खाद, अपशिष्ट भोजन, कपड़े, प्लास्टिक, कागज, चमड़े का सामान, बोतलें, टिन के डिब्बे, सड़े हुए शव आदि जैसे प्रदूषक मिट्टी में मिल कर उसे प्रदूषित करते हैं जो मृदा प्रदूषण का कारण बनता है। लोहा, पारा, सीसा, तांबा, कैडमियम, एल्यूमीनियम, जस्ता, औद्योगिक अपशिष्ट, साइनाइड, एसिड, क्षार आदि जैसे विभिन्न तरह के रसायनों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषक मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अम्लीय वर्षा भी एक प्राकृतिक कारण है जो मिट्टी की उर्वरता को सीधे प्रभावित करती है। पहले किसी भी उर्वरक के उपयोग के बिना मिट्टी बहुत उपजाऊ होती थी लेकिन अब एक साथ सभी किसानों ने बढ़ती आबादी से भोजन की अत्यधिक मांग के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि हेतु तेज़ी से उर्वरकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कीड़ों, कीटों, कवक आदि से फसलों को सुरक्षित करने के क्रम में मजबूत कार्बनिक या अकार्बनिक कीटनाशकों डीडीटी, बेंजीन, हेक्सा क्लोराइड, अल्द्रिन हर्बाइसाइड्स, फंगलसाइड, कीटनाशकों आदि के विभिन्न प्रकार का अनुचित, अनावश्यक और सतत उपयोग धीरे-धीरे मिट्टी को ख़राब कर रहा है। इस तरह के रसायनों के सभी प्रकार पौधों के विकास को रोकते हैं, उनका उत्पादन कम करते हैं तथा फलों के आकार को भी कम कर देते हैं जिससे मानव स्वास्थ्य पर अप्रत्यक्ष रूप से बहुत खतरनाक प्रभाव पड़ता है। ऐसे रसायन धीरे-धीरे मिट्टी और फिर पौधों के माध्यम से अंततः जानवरों और मनुष्यों के शरीर तक पहुँच कर खाद्य शृंखला के माध्यम से अवशोषित हो जाते हैं। खनन और परमाणु प्रक्रिया जैसे स्रोतों से अन्य रेडियोधर्मी अपशिष्ट पानी के माध्यम से मिट्टी तक पहुंच जाता है तथा मृदा और पौधों, पशुओं चराई के माध्यम से और मानव भोजन, दूध, मांस आदि को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार के भोजन को खाने से विकास में कमी होती है और जानवरों और मानवों में असामान्य वृद्धि होती है। आधुनिक दुनिया में औद्योगीकरण में वृद्धि से दैनिक आधार पर अपशिष्टों का भारी ढेर उत्पन्न होता है जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में मिल जाता है और इसे दूषित करता है। मृदा प्रदूषण: स्वास्थ्य के लिए खतरनाक — निबंध 3 400 शब्द मृदा प्रदूषण ताजा और उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो उसमें पनपने वाली फसलों, पौधों, जानवरों, मनुष्यों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अवांछित पदार्थों और कई स्रोतों से विषाक्त रसायनों के विभिन्न प्रकार अलग-अलग अनुपात में मिलकर पूरी मृदा के प्रदूषण का कारण बनते है। एक बार जब प्रदूषक मिट्टी में मिश्रित हो जाता है तो वह लंबे समय तक मिट्टी के साथ सीधे संपर्क में रहता है। उपजाऊ भूमि में औद्योगिकीकरण और विभिन्न प्रभावी उर्वरकों की बढ़ती खपत से लगातार धरती की मिट्टी संरचना और उसका रंग बदल रहा है जो पृथ्वी पर जीवन के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक संकेत है। उद्योगों और घरेलू सर्किलों द्वारा जारी किए जाने वाले विषाक्त पदार्थों के मिश्रण के माध्यम से पृथ्वी पर सारी उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है। मृदा प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी अपशिष्ट, रासायनिक प्रदूषकों, धातु प्रदूषण, जैविक एजेंट, रेडियोधर्मी प्रदूषण, गलत कृषि पद्धतियां आदि है। औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा जारी औद्योगिक कचरे में कार्बनिक, अकार्बनिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्रियां होती है जिनमें मिट्टी की भौतिक और जैविक क्षमताएँ बदलने की ताकत होती है। यह पूरी तरह से मिट्टी की बनावट और खनिज, बैक्टीरिया और फंगल कालोनियों के स्तर को बदल कर रख देता है। शहरी अपशिष्ट पदार्थ ठोस अपशिष्ट पदार्थ होते है जिनमे वाणिज्यिक और घरेलू कचरे शामिल होते हैं जो मिट्टी पर भारी ढेर बनाते हैं और मृदा प्रदूषण में योगदान देते हैं। रासायनिक प्रदूषक और धातु प्रदूषक, कपड़ा, साबुन, रंजक, सिंथेटिक, डिटर्जेंट, धातु और ड्रग्स उद्योगों से औद्योगिक अपशिष्ट हैं जो मिट्टी और पानी में लगातार अपने खतरनाक कचरे को डंप कर रहे हैं। यह सीधे मिट्टी के जीवों को प्रभावित करता है और मिट्टी के प्रजनन स्तर को कम करता है। जैविक एजेंट जैसे कि बैक्टीरिया, शैवाल, कवक, प्रोटोजोआ और निमेटोड्स, मिलीपैड, केचुएँ, घोंघे आदि जैसे सूक्ष्म जीव मिट्टी के भौतिक-रासायनिक तथा जैविक वातावरण को प्रभावित करते हैं और मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। परमाणु रिएक्टरों, विस्फोटों, अस्पतालों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं आदि जैसे स्रोतों से कुछ रेडियोधर्मी प्रदूषक मिट्टी में घुस जाते हैं और लंबे समय तक वहां रहकर मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अग्रिम कृषि-प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाली गलत कृषि पद्धति कीटनाशकों सहित विषाक्त उर्वरकों की भारी मात्रा में उपयोग से धीरे-धीरे मिट्टी की शारीरिक और जैविक संपत्ति में गिरावट आ जाती है। मृदा प्रदूषण के अन्य स्रोत नगरपालिका का कचरा ढेर, खाद्य प्रसंस्करण अपशिष्ट, खनन प्रथाएं आदि हैं। मृदा प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि विषाक्त रसायन शरीर में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं और पूरे आंतरिक शरीर प्रणाली को परेशान करते हैं। मृदा प्रदूषण को कम करने और प्रतिबंधित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण कानूनों सहित सभी प्रभावी नियंत्रण उपायों का अनुसरण लोगों द्वारा विशेष रूप से उद्योगपति द्वारा किया जाना चाहिए। ठोस अपशिष्टों के रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग तथा लोगों के बीच जहाँ तक संभव हो सके वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देना चाहिए। Post navigation. . वायु प्रदूषण वाहनों से निकलने वाले धुए, कल कारखानों, उड़ती हुई धूल इत्यादि कारणों से होता है. वर्तमान में लोग हर जगह शादियों, पार्टियों, किसी भी प्रकार के प्रचार में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हैं जो कि ध्वनि प्रदूषण को बहुत अधिक बढ़ा देता है.

Next