Essay on rani lakshmi bai for kids in hindi. Rani Lakshmi Bai Essay for Students in English 2022-10-21

Essay on rani lakshmi bai for kids in hindi Rating: 6,1/10 323 reviews

Symbols are an integral part of human communication, and they have been used throughout history to represent ideas and convey meaning. Symbols can be found in all forms of communication, including art, literature, music, and even everyday language.

One of the most well-known symbols is the cross, which is a powerful symbol of Christianity. It represents the sacrifice of Jesus Christ and is used as a reminder of his teachings and the importance of faith. Other religious symbols, such as the Star of David for Judaism and the crescent moon for Islam, serve a similar purpose.

Symbols can also be found in literature and art. For example, in Shakespeare's play "Romeo and Juliet," the rose is used to symbolize the love between the two main characters. In the novel "The Great Gatsby," the green light on the dock represents Gatsby's desire and hope for a better future. In paintings, symbols can be found in the objects depicted or in the way they are arranged. For instance, a snake wrapped around a staff is a symbol of medicine and healing in art.

In everyday language, symbols are used to represent concepts or ideas that are difficult to express in words. For example, the heart symbol is often used to represent love, and the peace sign is used to represent the concept of peace. In mathematics, symbols are used to represent numbers, quantities, and operations.

Overall, symbols are a crucial aspect of human communication and play a vital role in representing ideas and conveying meaning. They can be found in various forms of communication, including literature, art, music, and everyday language, and they provide a way for people to express complex ideas and concepts in a simple and easily understood way.

रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध (Rani Lakshmi Bai Essay In Hindi)

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Varanasi is the place where she was born. Soon, with the help of Tantya Tope and Rao Sahib, she captured the Gwalior fort from Jivaji Rao Scindia. Rani Lakshmi Bai, the Rani of Jhansi, was the first woman warrior in Indian history to be this brave and powerful. She was a beautiful, intelligent and brave girl. The revolutionaries declared Bahadur Shah Zafar as their King. She took birth in 1828, Nov 19th, at Kashi. Lakshmi Bai was enraged by this but eventually British annexed Jhansi.

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Rani Laxmi Bai In Hindi Essay

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The Queen of Jhansi fought with impeccable valour and courage. She made a couple of petitions against Lord Dalhousie but all her attempts proved futile. कौन से वर्ष में झांसी का रानी का विवाह हुआ था? Childhood Days of Rani Laksmi Bai Since childhood, Manu was inclined towards the use of weapons. It was 1842, and he was the emperor of Jhansi. Rani and the Policy of Doctrine of Lapse According to the Policy of Doctrine of Lapse, the British annexed all those states that did not have a legal heir to the throne. The countrywide revolt began on May 31, 1857, and it spread like wildfire.

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रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध

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In 1851, she gave birth to Damodar Rao who died when he was just 4 months old. उत्तर:- लक्ष्मी बाई का विवाह सन 1842 में हुआ था। 3. दुर्ग छीन लिया और सैन्य संगठन में जुट गई । कुछ ही दिनों बाद इनका पता ह्यू रोज को लग गया। वह अपमान का बदला लेने के लिए विशाल सेना के साथ वहां पहुंच गया। गति रानी लक्ष्मीबाई ने रणचण्डी बनकर अंग्रेजों से लोहा लिया। घोड़े पर सवार रानी के मुख में लगाम थी, दोनों हाथों में तलवार थी और पीछे पीठ पर दामोदर राव को बांध रखा था। रानी अधिक देर तक विशाल सेना का सामना न कर सकी। घायलावस्था में विवश होकर घोड़ा दौड़ना पड़ा। दो अंग्रेज इनका पीछा कर रहे थे। घोड़ा नया होने के कारण नाले पर पहुंच कर रुक गया। इस विवशता में रानी ने उन दोनों अंग्रेजों का सामना किया। उन्हें मार कर स्वंय भी बेदम हो गई। पास में ही साधु की कुटिया थी। उसने रानी का दाह संस्कार कर दिया। ———————————— इस लेख के माध्यम से हमने Rani Laxmi Bai Par Nibandh Essay on Rani Lakshmi Bai in Hindi का वर्णन किया है और आप यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तेमाल कर सकते है।. Varanasi is the place she belongs to, popularly called Kashi. Just after marriage, Queen Jhansi got the name of Lakshmi Bai, as she was Laxmi, the Goddess of money in the Hindu religion. She captured the Jhansi fort on June 7, 1857, and began to rule as a Regent on behalf of her minor son, Damodar Rao.

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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का इतिहास

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In today's time also, everyone knows her as the queen of bravery and courage. She fought with her son tied on her back and died with a sword in her hand. Rani Lakshmi Bai is known as a brave freedom fighter. आज हम रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध Essay On Rani Lakshmi Bai In Hindi लिखेंगे। रानी लक्ष्मी बाई पर लिखा यह निबंध बच्चो kids और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है। रानी लक्ष्मी बाई पर लिखा हुआ यह निबंध Essay On Rani Lakshmi Bai In Hindi आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे , जिन्हे आप पढ़ सकते है। रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध Rani Lakshmi Bai Essay In Hindi प्रस्तावना भारत भूमि पर केवल वीर पुरुषो ने जन्म नही लिया है, अपितु युग की अमिट पहचान प्रस्तुत करने वाली वीर नारियो ने भी जन्म लिया है इतिहास का एक नया अध्याय जोड़ने वाली वीर भारतीय नारियो का गौरव — गान सारा संसार एक स्वर से करता है क्युकी इन्होने ना केवल अपनी अपार शक्ति से अपने देश और वातावरण को ही प्रभावित किया है, अपितु समस्त विश्व को वीरता का अभिषिष्ठ मार्ग भी दिखाया है ऐसी वीरांगनाओ में महारानी लक्ष्मी बाई का नाम अग्रणीय है इस वीरांगना से आज भी हमारा राष्ट्र और समाज गर्वित और पुलकित है महारानी लक्ष्मी बाई का जन्म महारानी लक्ष्मी बाई का जन्म 13 नवंबर सन 1835 ई. . उत्तर:- एकलौते बेटे की मृत्यु के बाद गंगाधर राव बीमार रहने लग गए और बीमार रहते हुए ही उन्होंने मृत्यु को प्राप्त कर लिया। 4. In the battle, she fought bravely and with gallantry heroism.

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रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध

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उत्तर:- झासी की रानी का जन्म 13 नवंबर सन 1835 में हुआ था। 2. On 20 th March 1958, the British sent a massive force under Sir Hugh Rose in order to recapture Jhansi. She is an icon known for her bravery. Rani Lakshmi Bai died like a hero at the young age of 29 and was amongst the most contributing characters. Her father and mother were Moropant Tambe and Bhagirathi Tambe. She single-handedly fought with the British army till one of the English horsemen struck her on the rear head, and another severely wounded her breast. Apart from Jhansi, Dalhousie from the East India Company annexed other states on the pretext of the Doctrine of lapse.

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Essay on Rani Lakshmi Bai in Hindi

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She martyred herself in a struggle to attain Swaraj and liberate the Indians from the British rule. The warrior queen of Jhansi, Rani Lakshmi Bai fought with the Britishers and helped many Indians. Unfortunately, the child died within four months of his birth because of chronic illness. Following the incidents, the British East India Company introduced the rule of Doctrine of Lapse. There are very few parallels that can be found matching Maharani Laksmi Bai. She is also popularly known as Manu among the Marathas. A huge force led by Sir Hugh Rose was sent to Jhansi for recapturing.

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रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध 2022

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Eventually the British recaptured the fort by betrayal. If there had been more warriors with the same courage, fighting along with her, India would have gained Independence long before 1947. Mutiny of 1857 However, in 1857 there broke out the first war of Indian Independence. Manu Bai or Manikarnika was born to Moropant Tambe and Bhagirathi Tambe on 19 th November 1828 at Kashi Varanasi. में काशी में हुआ था और लक्ष्मीबाई का पालन-पोषण बिठूर में हुआ था। लक्ष्मीबाई के पिता का नाम मोरोपन्त और उनकी मां का नाम भागीरथी बाई था। जब वह चार-पांच वर्ष की थी, उस वक्त इनकी मां का देहांत हो गया था। लक्ष्मीबाई का वास्तविक नाम मनुबाई था। रानी लक्ष्मीबाई की शिक्षा रानी लक्ष्मीबाई की शिक्षा उनके पिता ने पूरी करवाई थी, क्योंकि उस दौर में बेटियों की शिक्षा पर ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। साथ ही उन्होंने तरह-तरह की निशानेबाजी लगाना, घेराबंदी करना, युद्ध की पूरी शिक्षा, सैन्य शिक्षा, घुड़सवारी, तीरंदाजी करना आदि की शिक्षा प्राप्त थी। रानी लक्ष्मीबाई पढ़ाई से लेकर अस्त्र-शस्त्र में बहुत ही निपुण थी और वह एक साहसी योद्धा के रूप में निखरकर सामने आई। स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका अंग्रेजों ने झांसी पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। झांसी के खजाने पर कब्जा कर रानी लक्ष्मीबाई को झांसी का किला छोड़ने के लिए विवश कर दिया गया। अंत में रानी झांसी का किला छोड़कर रानीमहल में चली गई, मगर उन्होंने हार नहीं मानी और अंग्रेजों से लड़ाई लड़ने का फैसला किया। रानी ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए स्वयंसेवक सेना का गठन किया और अपनी सेना में महिलाओं को भी शामिल किया। साथ ही उन्हें लड़ाई लड़ने के लिए प्रशिक्षण भी दिया। कई राज्य के राजाओं ने रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अंग्रेजों ने एक बार अपने सेना सहित झांसी को चारों तरफ से घेर लिया। ऐसे में रानी लक्ष्मीबाई ने हार नहीं मानी और अपनी छोटी सेना के साथ अंग्रेजों का मुकाबला किया। सन् 1858 में ग्वालियर के पास कोटा में एक बार फिर से रानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजो के बीच युद्ध हुआ। इस दौरान अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई को बरछी मार दी, जिससे उनके शरीर से खूब बहने लगा। इसके बाद भी रानी नहीं रूकी और युद्ध करती रही। मगर जब शरीर से खून ज्यादा बहने लगा तब वह थोड़ी कमजोर हुई। उस दौरान एक अंग्रेज ने रानी लक्ष्मीबाई के सर पर तलवार से जोरदार प्रहार किया। इससे रानी लक्ष्मीबाई बुरी तरह घायल हो गई और घोड़े से नीचे गिर पड़ी। इस युद्ध में लक्ष्मीबाई का घोड़ा भी वीरगति को प्राप्त हो गया और रानी भी वीरगति को प्राप्त हुई। रानी चाहती थी कि उनके शरीर को ब्रिटिश सैनिकों को द्वारा नहीं खोजा जाए, इसलिए रानी की सेना के कुछ लोग उन्हें पास के गंगादास मठ में ले गए, जहां उनकी मृत्यु के बाद संस्कार किया गया। मृत्यु के समय वह 29 साल की थीं। Categories.

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Rani Lakshmi Bai Essay for Students in English

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She was supported by Tantya Tope. Lakshmi Bai had an unusual childhood for a Brahman girl, growing up in the family of Peshwa ruler Baji Rao II. She used to have a good time playing with Rao Sahib, Nana Sahib, Tantia Tope, and other boys who came to Peshwa's court. She was truly an inspiration for others who joined the war in their later years. But, unfortunately, Gangadhar Rao died soon due to illness and Lord Dalhousie, the then Governor-General of India denied this adoption. The revolt started at Meerut on 10th May.

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Rani Lakshmi Bai Essay for Students and Children

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After her mother's death, they moved as Moropant Tambe Rani Lakshmi Bai's father worked as an advisor in the court of Peshwa Baji Rao, general and statesman of the Maratha Empire. Despite being heavily injured, she continued the fight bravely and killed the horsemen. में मनुबाई का विवाह झाँसी के अंतिम पेशवा राजा गंगाधर राव के साथ हुआ था। विवाह के बाद ये मनुबाई, ओर छबीली से रानी लक्ष्मीबाई कहलाने लगी थी। इस खुशी में राजमहल में आनन्द मनाया गया। घर-घर मे दिया जलाए गए। विवाह के नो वर्ष बाद लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया परन्तु वो जन्म के तीन महीने बाद ही चल बसा। पुत्र वियोग में गंगाधर राव बीमार पड़ गए। तब उन्होंने दामोदर राव को गोद ले लिया। कुछ समय बाद सन 1853 ई. She is known for her courage and bravery during the 1857 revolt against Britishers. झांसी की रानी का जन्म कब हुआ? She is an inspiration and an admiration for a lot of people. Quite naturally, since it was the rule already imposed, all her attempts proved futile.

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हिन्दी निबंध : झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

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At the age of fourteen, Manu married Maharaja Gangadhar Rao Newalkar. Rani Lakshmi Bai also joined the revolt quickly and took command of the revolutionary forces. Manu spent her childhood in the company of Nana Sahib, the son of Peshwa Baji Rao II. Rani Lakshmi Bai Essay Formally known as Manikarnika Tambe, Rani Lakhsmi Bai was the brave daughter of Bhagirathi Tambe and Moropant Tambe. Rani Lakshmi Bai is a shining example of patriotism and pride in one's country. झांसी की रानी लक्ष्मी बाई को नहीं जानता, उनके बारे में कौन नहीं जानता। अंग्रेजों से आखिरी पल तक लड़ती रही थी। आज हम इस लेख में रानी लक्ष्मी बाई के बारे में ही जानेंगे… रानी लक्ष्मीबाई का परिचय लक्ष्मीबाई का जन्म 13 नवंबर सन् 1835 ई. प्रस्तावना : भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। सच्चा वीर कभी आपत्तियों से नहीं घबराता है। प्रलोभन उसे कर्तव्य पालन से विमुख नहीं कर सकते। उसका लक्ष्य उदार और उच्च होता है। उसका चरित्र अनुकरणीय होता है। अपने पवित्र उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह सदैव आत्मविश्वासी, कर्तव्य परायण, स्वाभिमानी और धर्मनिष्ठ होता है। ऐसी ही थीं वीरांगना लक्ष्मीबाई। संघर्ष : 27 फरवरी 1854 को लार्ड डलहौजी ने गोद की नीति के अंतर्गत दत्तकपुत्र दामोदर राव की गोद अस्वीकृत कर दी और झांसी को अंगरेजी राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी। पोलेटिकल एजेंट की सूचना पाते ही रानी के मुख से यह वाक्य प्रस्फुटित हो गया, 'मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी'। 7 मार्च 1854 को झांसी पर अंगरेजों का अधिकार हुआ। झांसी की रानी ने पेंशन अस्वीकृत कर दी व नगर के राजमहल में निवास करने लगीं। यहीं से भारत की प्रथम स्वाधीनता क्रांति का बीज प्रस्फुटित हुआ। अंगरेजों की राज्य लिप्सा की नीति से उत्तरी भारत के नवाब और राजे-महाराजे असंतुष्ट हो गए और सभी में विद्रोह की आग भभक उठी। रानी लक्ष्मीबाई ने इसको स्वर्णावसर माना और क्रांति की ज्वालाओं को अधिक सुलगाया तथा अंगरेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की योजना बनाई। विद्रोह :भारत की जनता में विद्रोह की ज्वाला भभक गई। समस्त देश में सुसंगठित और सुदृढ रूप से क्रांति को कार्यान्वित करने की तिथि 31 मई 1857 निश्चित की गई, लेकिन इससे पूर्व ही क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित हो गई और 7 मई 1857 को मेरठ में तथा 4 जून 1857 को कानपुर में, भीषण विप्लव हो गए। कानपुर तो 28 जून 1857 को पूर्ण स्वतंत्र हो गया। अंगरेजों के कमांडर सर ह्यूरोज ने अपनी सेना को सुसंगठित कर विद्रोह दबाने का प्रयत्न किया। लक्ष्मीबाई पहले से ही सतर्क थीं और वानपुर के राजा मर्दनसिंह से भी इस युद्ध की सूचना तथा उनके आगमन की सूचना प्राप्त हो चुकी थी। 23 मार्च 1858 को झांसी का ऐतिहासिक युद्ध आरंभ हुआ। कुशल तोपची गुलाम गौस खां ने झांसी की रानी के आदेशानुसार तोपों के लक्ष्य साधकर ऐसे गोले फेंके कि पहली बार में ही अंगरेजी सेना के छक्के छूट गए। उन्होंने नाना साहब और उनके योग्य सेनापति तात्या टोपे से संपर्क स्थापित किया और विचार-विमर्श किया। रानी की वीरता और साहस का लोहा अंगरेज मान गए, लेकिन उन्होंने रानी का पीछा किया। रानी का घोड़ा बुरी तरह घायल हो गया और अंत में वीरगति को प्राप्त हुआ, लेकिन रानी ने साहस नहीं छोड़ा और शौर्य का प्रदर्शन किया। कालपी में महारानी और तात्या टोपे ने योजना बनाई और अंत में नाना साहब, शाहगढ़ के राजा, वानपुर के राजा मर्दनसिंह आदि सभी ने रानी का साथ दिया। रानी ने ग्वालियर पर आक्रमण किया और वहां के किले पर अधिकार कर लिया। विजयोल्लास का उत्सव कई दिनों तक चलता रहा लेकिन रानी इसके विरुद्ध थीं। यह समय विजय का नहीं था, अपनी शक्ति को सुसंगठित कर अगला कदम बढ़ाने का था। उपसंहार : सेनापति सर ह्यूरोज अपनी सेना के साथ संपूर्ण शक्ति से रानी का पीछा करता रहा और आखिरकार वह दिन भी आ गया जब उसने ग्वालियर का किला घमासान युद्ध करके अपने कब्जे में ले लिया। रानी लक्ष्मीबाई इस युद्ध में भी अपनी कुशलता का परिचय देती रहीं। 18 जून 1858 को ग्वालियर का अंतिम युद्ध हुआ और रानी ने अपनी सेना का कुशल नेतृत्व किया। वे घायल हो गईं और अंततः उन्होंने वीरगति प्राप्त की। रानी लक्ष्मीबाई ने स्वातंत्र्य युद्ध में अपने जीवन की अंतिम आहूति देकर जनता जनार्दन को चेतना प्रदान की और स्वतंत्रता के लिए बलिदान का संदेश दिया।.

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