Sarvepalli radhakrishnan essay in hindi. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi Essay डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध 2022-10-23

Sarvepalli radhakrishnan essay in hindi Rating: 8,3/10 1433 reviews

Ethical behavior in business refers to the actions and decisions made by individuals and organizations that adhere to moral principles and values. It involves being honest, fair, and respectful towards others, and taking responsibility for the impact of one's actions on stakeholders such as employees, customers, suppliers, and the community.

There are numerous benefits to practicing ethical behavior in business. First and foremost, it helps to build trust and credibility with stakeholders. When individuals and organizations act in an ethical manner, they demonstrate their commitment to doing the right thing and being transparent. This can lead to increased customer loyalty and a positive reputation, which can translate into long-term financial success.

In addition, ethical behavior can improve relationships within the workplace. When employees feel that their employer is acting in an ethical manner, they are more likely to have a positive view of the organization and be more motivated to do their best work. This can lead to increased productivity and a more positive work environment overall.

Ethical behavior is also important for compliance with laws and regulations. By following ethical principles, individuals and organizations can avoid legal consequences and fines, and ensure that they are operating in a manner that is consistent with the laws and regulations of the industry in which they operate.

Furthermore, ethical behavior can contribute to the overall well-being of society. When businesses act ethically, they can have a positive impact on the community and the environment. For example, they may choose to use environmentally-friendly practices, engage in philanthropic activities, or support diversity and inclusion initiatives. This can help to create a more sustainable and equitable world.

In conclusion, ethical behavior in business has numerous benefits. It helps to build trust and credibility with stakeholders, improve relationships within the workplace, ensure compliance with laws and regulations, and contribute to the overall well-being of society. As such, it is essential for individuals and organizations to prioritize ethical behavior in their business practices.

SARVEPALLI RADHAKRISHNAN ESSAY: डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध हिंदी में कैसे लिखें

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राधाकृष्णन को हार्वर्ड विश्वविद्यालय तथा ओवर्लिन कॉलेज द्वारा डॉ. में भी प्रवेश लिया और एम. ಭಾರತದಲ್ಲಿ 1952 ರಲ್ಲಿ ಭಾರತ ರತ್ನ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ನೀಡಿ ಗೌರವಿಸಲಾಯಿತು. की उपाधि प्राप्त करने के बाद एम. ಅವರು 1975 ರಲ್ಲಿ ಟೆಂಪಲ್ಟನ್ ಪ್ರಶಸ್ತಿಯನ್ನು ಗೆದ್ದರು ಆದರೆ ಅವರು ಆಕ್ಸ್ಫರ್ಡ್ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾನಿಲಯಕ್ಕೆ ಟೆಂಪಲ್ಟನ್ ಪ್ರಶಸ್ತಿಯನ್ನು ದಾನಮಾಡಿದರು , 1961 ರಲ್ಲಿ ಜರ್ಮನ್ ಬುಕ್ ಟ್ರೇಡ್ನ ಶಾಂತಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ, ಇತ್ಯಾದಿ. राधाकृष्णन की मुलाकात गुरु और शिष्य की अनूठी परंपरा के प्रवर्तक डॉ. भारत 1 9 52 मध्ये भारत रत्न आणि 1 9 54 मध्ये भारतरत्न पुरस्कार प्रदान करण्यात आला.


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Dr s radhakrishnan in hindi Free Essays

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What are some of the major contributions of Dr. ಭಾರತದ ಉಪಾಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿ ಎರಡು ಅವಧಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಿದ ನಂತರ ಅವರು 1962 ರಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದರು ಮತ್ತು 1967 ರಲ್ಲಿ ನಿವೃತ್ತಿ ಹೊಂದಿದರು. रामास्वामी और माता का नाम श्रीमती सीता झा था। रामास्वामी एक गरीब ब्राह्मण थे और तिरुताणी कस्बे के जमींदार के यहां एक साधारण कर्मचारी के समान कार्य करते थे। डॉक्टर राधाकृष्णन अपने पिता की दूसरी संतान थे। उनके चार भाई और एक छोटी बहन थी छः बहन-भाईयों और दो माता-पिता को मिलाकर आठ सदस्यों के इस परिवार की आय अत्यंत सीमित थी। इस सीमित आय में भी डॉक्टर राधाकृष्णन ने सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। उन्होंने न केवल महान शिक्षाविद के रूप में ख्याति प्राप्त की,बल्कि देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद को भी सुशोभित किया। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को बचपन में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शुरुआती जीवन तिरुतनी और तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर ही बीता। यद्यपि इनके पिता धार्मिक विचारों वाले इंसान थे लेकिन फिर भी उन्होंने राधाकृष्णन को पढ़ने के लिए क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल,तिरुपति में दाखिल कराया। इसके बाद उन्होंने वेल्लूर और मद्रास कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त की। वह शुरू से ही एक मेधावी छात्र थे। अपने विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने बाइबल के महत्वपूर्ण अंश याद कर लिए थे,जिसके लिए उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान भी प्रदान किया गया था। उन्होंने वीर सावरकर और विवेकानंद के आदर्शों का भी गहन अध्ययन कर लिया था। सन 1902 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा अच्छे अंकों में उत्तीर्ण की जिसके लिए उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान की गई। कला संकाय में स्नातक की परीक्षा में वह प्रथम आए। इसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर किया और जल्द ही मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से किताबें पढने के शौकीन राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी गॉव में 5 सितंबर 1888 को हुआ था। साधारण परिवार में जन्में राधाकृष्णन का बचपन तिरूतनी एवं तिरूपति जैसे धार्मिक स्थलों पर बीता । वह शुरू से ही पढाई-लिखाई में काफी रूचि रखते थे, उनकी प्राम्भिक शिक्षा क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल में हुई और आगे की पढाई मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पूरी हुई। स्कूल के दिनों में ही डॉक्टर राधाकृष्णन ने बाइबिल के महत्त्वपूर्ण अंश कंठस्थ कर लिए थे , जिसके लिए उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान दिया गया था। कम उम्र में ही आपने वीर सावरकर को पढा तथा उनके विचारों को आत्मसात भी किया। आपने 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और छात्रवृत्ति भी प्राप्त की । क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास ने भी उनकी विशेष योग्यता के कारण छात्रवृत्ति प्रदान की। डॉ राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शन शास्त्र में एम. No great man ever complains of want of opportunities. Sarvepalli Radhakrishnan was a great person. ಅವರು ಗೌಡೀ ಶಾಲೆ, ತಿರುವಲ್ಲೂರು, ಲುಥೆರನ್ ಮಿಷನ್ ಶಾಲೆ, ತಿರುಪತಿ, ವೂರ್ಹೀಸ್ ಕಾಲೇಜ್, ವೆಲ್ಲೂರ್ ಮತ್ತು ನಂತರ ಮದ್ರಾಸ್ ಕ್ರಿಶ್ಚಿಯನ್ ಕಾಲೇಜ್ ಅವರ ಆರಂಭಿಕ ಶಿಕ್ಷಣವನ್ನು ಪಡೆದರು.

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डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध (Dr Sarvepalli Radhakrishnan Essay In Hindi)

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किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला। डॉ. He won the Templeton award which he donated to Oxford University. में प्रवेश लिया और एम. After completing his M. Sarvepalli Radhakrishnan was an Indian philosopher and statesman who served as the first Vice President and second President of India.

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Sarvepalli Radhakrishnan Essay : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर हिन्दी में निबंध

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राधाकृष्णन 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किये गये। भारत के उपराष्ट्रपति के रुप में दो कार्यकाल तक देश की सेवा करने के बाद 1962 में भारत के राष्ट्रपति के पद को सुशोभित किया और 1967 में सेवानिवृत्त हुए। वर्षों तक देश को अपनी महान सेवा देने के बाद 17 अप्रैल 1975 को इनका देहांत हो गया। डॉ. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जीवन परिचय मराठी डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन हे एक महान व्यक्ति होते जे नंतर भारताचे पहिले उपराष्ट्रपती तसेच भारताचे दुसरे राष्ट्राध्यक्ष झाले. साहब ने प्लेटो, कांट, ब्रैडले, प्लॉटिनस, बर्गसन, मार्कसिज़्म और अस्तित्ववाद की दार्शनिक व्याख्या को पढ़ा। राधाकृष्णन के आशीर्वाद को पाने के लिये अध्ययन के लिये कैंब्रिज़ को छोड़ने के दौरान 1914 में श्रीनिवासन रामानुजन नामक प्रतिभाशाली गणितज्ञ से वो मिले। 1918 में मैसूर यूनिवर्सिटी में डॉ. की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के पश्चात् सन् 1909 में वे मद्रास के एक कॉलिज में दर्शनशास्त्र के अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए। इसी क्षेत्र में कार्य करते हुए वे बाद में कलकत्ता तथा मैसूर विश्वविद्यालयों में भी दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्य करते रहे। आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति के गरिमामय पद पर भी वे कार्य करते रहे हैं। इसी प्रकार हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में लम्बे समय तक दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में उन्होंने कार्य किया। वे अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों एवं शिष्टमंडलों का नेतृत्व करते रहे। यूनेस्को के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष पद के रूप में उन्होंने 1948-49 तक कार्य किया। सोवियत संघ में उन्होंने भारतीय राजदूत के रूप में भी कार्य किया। भारत के उपराष्ट्रपति के पद पर वे सन् 1952-62 तक सुशोभित रहे। सन् 1962 से सन् 1967 तक वे भारत के महामहिम राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते रहे। इसी दौर में 1962 में चीन तथा सन् 1965 में पाक के साथ युद्ध लड़े गए थे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विद्दार्थी जीवन Student life of Dr.

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Sarvepalli Radhakrishnan : सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन पर हिंदी निबंध

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राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। जीवन परिचय- 5 सितंबर 1888 को चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित एक छोटे से कस्बे तिरुताणी में डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वी. Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi पढेंगे। इसमें हमने उनके जन्म, विद्यार्थी, राजनीति और निजी जीवन, पुरस्कार और मृत्यु से जुडी सभी जानकारियाँ दी है। क्या आप जानते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का राजनितिक जीवन Dr. शिक्षक समाज के ऐसे शिल्पकार होते हैं जो बिना किसी मोह के इस समाज को तराशते हैं। शिक्षक का काम सिर्फ किताबी ज्ञान देना ही नहीं बल्कि सामाजिक परिस्थितियों से छात्रों को परिचित कराना भी होता है। शिक्षकों की इसी महत्ता को सही स्थान दिलाने के लिए ही हमारे देश में सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पुरजोर कोशिशें की, जो खुद एक बेहतरीन शिक्षक थे। जीवन परिचय - 5 सितंबर 1888 को चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित एक छोटे से कस्बे तिरुताणी में डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वी. Later in 1931, he got selected as the Vice Chancellor of Andhra University and Vice Chancellor of Banaras Hindu University in 1939. पुढे 1 9 31 मध्ये आंध्र विद्यापीठाचे कुलगुरू व बनारस हिंदू विद्यापीठाचे कुलगुरू म्हणून 1 9 3 9 मध्ये त्यांची निवड झाली. परिचय एवं शिक्षा- डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित एक छोटे से कस्बे तिरूतनी में हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वी.


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10 Lines on Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi for Students

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And, after independence, he became the ambassador of the Soviet Union. Sarvepalli Radhakrishnan in English: Dr. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सामाजिक बुराइयों को हटाने के लिए शिक्षा को ही कारगर मानते थे। जीवन के उत्तरार्द्ध में भी उच्च पदों पर रहने के दौरान शैक्षिक क्षेत्र में उनका योगदान सदैव बना रहा। 17 अप्रैल, 1975 को सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने लंबी बीमारी के बाद अपना देह त्याग दिया। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों की वजह से आज भी उन्हें एक आदर्श शिक्षक के रूप में याद किया जाता है। शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने वाले डॉ. ನಂತರ ಅವರು ಮೊದಲ ಉಪಾಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿದ್ದರು. Radhakrishnan is best known for his writings on comparative religion and philosophy, which aimed to bridge the gap between the East and the West. गोपाल ने 1989 में उनकी जीवनी का प्रकाशन भी किया। इसके पूर्व डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व तथा जीवन की घटनाओं के संबंध में किसी को भी आधिकारिक जानकारी नहीं थी। स्वयं उनके पुत्र ने भी माना कि उनके पिता की व्यक्तिगत जिंदगी के विषय में लिखना एक बड़ी चुनौती थी और एक नाजुक मामला भी। लेकिन डॉक्टर एस.

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Essay on Sarvepalli Radhakrishnan for Students

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He was also a philosopher and introduced the thinking of western idealist philosophers into Indian thought. Sarvepalli Radhakrishnan Biography Hindi language? Sarvepalli Radhakrishnan in English Who was Dr. He died in 1975, at the age of 86. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जीवनी Dr Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi. He was very interested in the Philosophy and completed his B.

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डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi

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रामास्वामी और माता का नाम श्रीमती सीता झा था। रामास्वामी एक गरीब ब्राह्मण थे और तिरुताणी कस्बे के जमींदार के यहां एक साधारण कर्मचारी के समान कार्य करते थे। डॉक्टर राधाकृष्णन अपने पिता की दूसरी संतान थे। उनके चार भाई और एक छोटी बहन थी छः बहन-भाईयों और दो माता-पिता को मिलाकर आठ सदस्यों के इस परिवार की आय अत्यंत सीमित थी। इस सीमित आय में भी डॉक्टर राधाकृष्णन ने सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। उन्होंने न केवल महान शिक्षाविद के रूप में ख्याति प्राप्त की,बल्कि देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद को भी सुशोभित किया। अपने विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने बाइबल के महत्वपूर्ण अंश याद कर लिए थे,जिसके लिए उन्हें विशिष्ट योग्यता का सम्मान भी प्रदान किया गया था। उन्होंने वीर सावरकर और विवेकानंद के आदर्शों का भी गहन अध्ययन कर लिया था। सन 1902 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा अच्छे अंकों में उत्तीर्ण की जिसके लिए उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान की गई।. ನಂತರ 1931 ರಲ್ಲಿ ಅವರು ಆಂಧ್ರ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾನಿಲಯದ ಉಪಕುಲಪತಿ ಮತ್ತು 1939 ರಲ್ಲಿ ಬನಾರಸ್ ಹಿಂದೂ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾನಿಲಯದ ಉಪಾಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿ ಆಯ್ಕೆಯಾದರು. ಅವರನ್ನು ಶಾಶ್ವತವಾಗಿ ಗೌರವಿಸುವ ಸಲುವಾಗಿ, ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾನಿಲಯವು 1989 ರಲ್ಲಿ ರಾಧಾಕೃಷ್ಣನ್ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿವೇತನವನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಿತು, ನಂತರ ಇದನ್ನು ಮರುನಾಮಕರಣ ಮಾಡಲಾಯಿತು ರಾಧಾಕೃಷ್ಣನ್ ಚೆವೆನಿಂಗ್ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿವೇತನಗಳು. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शैक्षिक जगत में अविस्मरणीय व अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उनके अमुल्य विचार के साथ अपनी कलम को यहीं विराम देते हैं। सर्वपल्ली डॉ. He was a leading figure in the Indian independence movement and a prominent scholar of comparative religion and philosophy. He was a strong advocate for international cooperation and was instrumental in establishing the Non-Aligned Movement during the Cold War.

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Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi Essay डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर निबंध

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Education Day is being celebrated every year on 5 September since 1962 for the incomparable contribution of Sarvepalli Radhakrishnan in the field of education. त्यांनी उपनिषद, ब्राह्मोसोत, भगवत गीता, शंकर, माधव, रामनुजा इत्यादीच्या हिंदू तत्त्वज्ञानाच्या शास्त्रीय कौशल्यांची मात केली होती. Radhakrishnan received numerous awards and honors during his lifetime, including the Bharat Ratna, the highest civilian award in India. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सामाजिक बुराइयों को हटाने के लिए शिक्षा को ही कारगर मानते थे। जीवन के उत्तरार्द्ध में भी उच्च पदों पर रहने के दौरान शैक्षिक क्षेत्र में उनका योगदान सदैव बना रहा। 17 अप्रैल, 1975 को सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने लंबी बीमारी के बाद अपना देह त्याग दिया। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों की वजह से आज भी उन्हें एक आदर्श शिक्षक के रूप में याद किया जाता है। शिक्षा को मानव व समाज का सबसे बड़ा आधार मानने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन हो गया। 10 Lines on Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi for Students 10 Lines on Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi for Higher Class Students Pattern 3 — 10 Lines Essay or Shorts Essay is very helpful for class 10,11 12, and Competitive Exams preparing Students.

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सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन पर हिन्दी निबंध

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राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। जीवन परिचय — 5 सितंबर 1888 को चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित एक छोटे से कस्बे तिरुताणी में डॉक्टर राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वी. राधकृष्णन ने 1975 में टेम्प्लेटन पुरस्कार लेकिन इन्होंने इसको ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को दान कर दिया , 1961 में जर्मन बुक ट्रेड का शांति पुरस्कार आदि भी जीता। इनको श्रद्धांजलि देने के लिये 1989 में यूनिवर्सिटी ने राधाकृष्णन छात्रवृत्ति की शुरुआत की जिसे बाद में राधाकृष्णन चिवनिंग स्कॉलरशिप्स का नाम दिया गया। Sarvepalli Radhakrishnan Essay in Hindi डॉ. राधाकृष्णन का जीवन एक निष्काम कर्मयोगी की भांति था। वे भारतीय संस्कृति के प्रेमी, प्रचारक, विद्वान और उपासक थे। वे महान् शिक्षा शास्त्री थे। उनकी शिक्षा और चिंतन का मूल आधार महान् भारतीय संस्कृति थी। अत: उनके विचार किसी एक ही समाज और व्यक्ति के कल्याण से सम्बन्ध न रख कर अखिल मानवता के उत्थान से जुड़े थे। उनके हृदय में गौतम की करुणा थी और उनके कर्म तथा चिंतन में गांधी की अहिंसा। वे भारत के सन्तों और तपस्वियों के प्रतिबिम्ब थे। वे भारत के आम आदमी के विश्वास, उदारता, सहजता, ईमानदारी के साकार रूप थे। वे जितने महान् थे, उतने ही विनम्र भी थे। ऊंचे से ऊंचे पद की ओर बढ़ते हुए वे निरन्तर पवित्र और निश्चल होते गए। ईश्वर में गहन आस्था रखते हुए वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समर्पण भाव से पुरुषार्थ के मार्ग पर बढ़ते रहते थे। विश्व के विभिन्न देशों में उन्होंने भारतीय और पाश्चात्य धर्म तथा दर्शन पर अपने प्रभावशाली भाषण दिए। उनके भाषणों में मानो विवेकानन्द और दयानन्द सरस्वती की पूँज होती थी। उनकी आध्यात्मिक शक्ति उनके भाषणों को चिंतन, कल्पना, विचार और भाषा से मण्डित करती थी। एक बार इंग्लैण्ड में रात्रि के भोजन के दौरान उन्हें एक अंग्रेज़ ने पूछा कि क्या तुम्हारी कोई संस्कृति है? In order to deliver lectures on the Hindu philosophy, he was called later to the Oxford University. Get the huge list of more than 500 Essay Topics and Ideas His life after the 1930s After the 1930s his life took many big turns and he became the vice-chancellor of many Universities that includes Banaras Hindu University and Andhra University. Read Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi Essay. Because of the poor economic status of his family he studied with the support of scholarships.

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