About jhansi rani in hindi. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का इतिहास 2022-10-06

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ज्हांसी रानी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनका जन्म 19 अगस्त 1828 में उत्तर प्रदेश के ज्हांसी में हुआ था। उनकी माता का नाम बांसूबा था और वह एक स्वतंत्रता सेनानी थीं। ज्हांसी रानी बहुत ज्यादा बुद्धिमान और स्वयंसेवी थीं। वे अपने माता-पिता से ही स्वतंत्रता सेनानी होने की शिक्षा ली थीं।

ज्हांसी रानी ने बहुत से स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और वे भारत में स्वतंत्रता हासिल करने की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीं। 1857 में हुई भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में ज्हांसी रानी ने भारतीय स्वतंत्रता सेन

Jhansi Ki Rani (1953 film)

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आज भी स्त्री के बहादुरी के रूप के दर्शाने के लिए उसे झासी कि रानी के नाम से संबोधीत किया जाता है. They say it was during this revolt that the new and young India was born, and it is very important that we represent it right by focusing on the nuances of that time. मूल से 22 दिसंबर 2015 को. आम जनता भी राष्ट्रप्रेम दिखाने के लिए युद्ध में भाग लेने लगी. अग्रेजो द्धारा रानी के दत्तक पुत्र को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर लिया गया. रानी अपनी आखरी सांस तक झांसी के लिए अग्रेजो से लड़ी. A Journey Down Melody Lane.


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रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी

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विधि को भी नहीं दया आई। निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया, राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया, लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया। अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया, व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया, डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया, राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया। रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात, कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात, उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात? रानी लक्ष्मी बाई की कहानी रानी लक्ष्मी का जन्म 19 नवम्बर 1828 को काशी के असीघाट , वाराणसी में हुआ था. क्योकि यदि गंगाधर के मृत्यु के बाद झांसी का कोई उत्तराधिकारी नही होगा तो अग्रेजो द्धारा झांसी पर पुर्ण रूप से अंग्रेजो का अधिकार होगा. Retrieved 25 December 2014. Retrieved 25 December 2014. Retrieved 23 September 2022. Sohrab Modi The Great Mughal of Historicals. Retrieved 25 December 2014.

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Jhansi Ki Rani (TV Series 2019)

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This is my first major lead role and I am incredibly excited to portray one of the most iconic heroes from the history of Indian freedom struggle. परन्तु रानी लक्ष्मीबाई के होते यह संभव नही था. Jhansi Ki Rani is an evergreen inspirational nationalist story that needs to be told to every generation. इनका नाम रानीलक्ष्मी बाई विवाह के पश्चात पड़ा बचपन से इनका नाम मणिकर्णिका था परन्तु इन्हे प्यार से मनु कहा जाता था. जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात। बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार, उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार, सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार, 'नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'। यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान, वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान, नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान, बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान। हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी, झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी, मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी, जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम, नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम, अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम, भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम। लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में, जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में, लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में, रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में। ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार, घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार, यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार, विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार। अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी, अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी, काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी, युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी। पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! रानी ने अपनी झाँसी में स्वयं महिला सेना का गठन किया जिसमें नारीयो को भी योद्धा कि तरह लडना सिखाया गया.


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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का इतिहास

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The Shakespearean International Yearbook: Volume 12: Special Section, Shakespeare in India. Queen of Jhansi is a 1953 Indian The Tiger and the Flame, which released in 1956 with the same star cast. मा कि मृत्यु हो जाने के बाद उनकी देखभाल करने वाला कोई नही था इसलीए उनके पिता उनको अपने साथ राज दरबार हि ले जाया करते थे इसी कारण रानी लक्ष्मीबाई कि शिक्षा भी वही राज दरबार में पुरी हुई रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी शास्त्र कि शिक्षा के साथ शस्त्र कि भी शिक्षा लि. The older Manu, now called Lakshmibai gives birth to a boy who dies. अग्रेजी सरकार ने गंगाधर राव के मृत्यु के बाद झांसी को अग्रेजी राज्य में विलय करने कि निती बनाली जिसे रानी ने मानने से इंकार कर दिया. . तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी पुरी सेना कि मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्जा कर लिया रानी बहुत बहादुरी के साथ अंग्रजो से लड़ी परन्तु अंतिम समय में उनका घोड़ा एक नदी या तालाब पार नही कर पाया जिससे रानी अंग्रेजो के हाथ में आ गई और वीरगति को प्राप्त हो गई.

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Jhansi Ki Rani (2019 TV series)

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Retrieved 25 December 2014. Yhe story of fierce warrior Manikarnika who was later given the name of Rani Laxmibai , Queen of Jhansi. मूल से 18 जून 2019 को. बचपन से हि रानी ने अंग्रेजो का विरोध करना चालु कर दिया था जिससे वहा के अंग्रेज सरकार के जरनल या लार्ड गवनरल लक्ष्मीबाई से चिडते थे. Rani lakshmibai real photo रानी लक्ष्मी बाई की रियल फोटो — चित्र, 1850 या 1860 । संभवतःउनकी मृत्यु के बाद जून 1858 : वह एक बहुमूल्य मोती का हार और एक घुड़सवार महिला की वर्दी पहनती है 1857 कि यह क्रान्ति जिससे देश भर में आजादी का बिगुल बजा दिया गया वह अंग्रेजो के विरूध भारत कि पहली क्रान्ति और कोशिश थी जिससे चारों और आजादी के लिए लहर दौड उठी हर तरफ बस आजादी के लिए बिगुल बजाए गए चारों तरफ अग्रेजी सेना का वीरोध होने लगा. Retrieved 25 December 2014.

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रानी लक्ष्मीबाई

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रानी लक्ष्मीबाई विन्रम स्वभाव कि भी तथा जनता का हित चाहती थी जितनी बहादुर भी उतना हि सरल स्वाभाव रखती थी और रानी लक्ष्मीबाई एक मराठी परिवार से थी इनके पिता बाजीराव पेशवा के सेवक थे. शादी के पहले झाँसी के महाराज गंगाधर राव से अंग्रेज सरकार इतना नही डरती थी परन्तु लक्ष्मीबाई के आने के बाद अंग्रेज सरकार पर उनका दबदबा शुरू हो गया था. This further sets her against the British. Yhe story of fierce warrior Manikarnika who was later given the name of Rani Laxmibai , Queen of Jhansi. प्रसिद्ध कवियित्री सुभ्रदा कुमारी चोहान ने रानी लक्ष्मीबाई के लिए एक सुन्दर कविता लिखी थी जिसमें रानी के लिए दो लाइन पेश है. Retrieved 25 December 2014. कम उम्र में हि अर्थात 13 या 14 वर्ष के आस पास हि उनका विवाह झांसी के महाराज श्री गंगाधर राव से हुआ था.

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"झाँसी की रानी" कविता

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शादी के बाद जब रानी को पुत्र प्राप्त हुआ तो उसकी मात्र चार माह में हि मृत्यु हो गई और एक तरफ महाराज गंगाधर राव का भी स्वास्थ दिन ब दिन बिगड़ता जा रहा था जिससे उन्होने एक पुत्र को गोद लिया और उसका नाम भी अपने पहले पुत्र का नाम दामोदर दे दिया गया. जिससे महिला सेना बनाई गयी. Retrieved 25 December 2014. However, in spite of having spent lavishly on technicians, sets, war scenes and making it in colour, the film was a big box office disaster causing Modi great financial losses. Bengali Cinema: 'An Other Nation'. Retrieved 25 December 2014.

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झांसी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

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While the viewers have heard stories of this legendary queen, not many are aware of the challenges she faced after getting married at a tender age. आज तक लक्ष्मीबाई के जैसी भारत में कोई भी वीरागना नही हुई. रानी लक्ष्मीबाई के गुरू का नाम तात्या टोपे था उन्होने हि रानी लक्ष्मी बाई को शस्त्र चलाना सिखाया था. New Delhi, India: Wisdom Tree. अग्रेजो के खिलाफ रानी लक्ष्मीबाई के युद्ध में कई ओर भी शामिल हुए जो अंग्रेजो कि हडपने कि निति के शिकार हुए जैसे — बहादुर शाह जफर , बेगम हजरत महल , जीनत महल , अजीमुल्ला शाहगझढ़ के राजा और तात्या टोपे आदि ने महारानी के इस युद्ध में इनका साथ दिया. Retrieved 25 December 2014.

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