Gautam buddha life story in hindi. 5 Best Gautam Buddha Motivational Stories in Hindi 2022-10-29

Gautam buddha life story in hindi Rating: 8,3/10 727 reviews

गौतम बुद्ध एक प्रसिद्ध धर्मगीता और संत थे जो भारत में जन्मे थे। उनका जन्म सन् ५०६ ईसा पूर्व में हुआ था जिसके बाद उन्होंने अपनी जीवनकाल भगवान बुद्ध के रूप में बिताया।

बुद्ध जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश उनके बचपन से ही था जब वे एक राजा के बेटे थे और उन्होंने अपने राजकुमारी जीवन में सफलता हासिल की थी। लेकिन बुद्ध जीवन में बदलाव आने लगे जब वे अपने बचपन में स्वर्गीय जीवन की खोज में निकल गए। उन्होंने अपनी राजकुमारी छोड़ दी और धर्मगीता की पथ पर चलना शुरू किया।

बुद्ध ने अपनी धर्मगीता जीवनकाल में बहु

Gautam Buddha Story in Hindi

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इतनी राग रागनियां भर दूंगा इसके चारों तरफ की वैराग्य का विचार भी इसे बुरा लगेगा। असित मूनि कहते हैं , चाहे लाख जतन कर ले राजन , परंतु तेरा पुत्र सन्यासी ही बनेगा। इतना कहकर असित मुनि वहां से चले जाते हैं। राजा शुद्धोधन असित मुनि से कह तो देते हैं कि वे अपने पुत्र को सम्राट ही बनाएंगे, परंतु भीतर ही भीतर उन्हें चिंता सताने लगती है कि, कहीं उनका पुत्र संन्यास ही ना बन जाए। अपनी इस चिंता को लेकर राजा शुद्धोधन कुलगुरु के पास जाते हैं और उन्हें अपनी समस्या बताते हैं। कुल गुरु कहते हैं राजन असित एक सन्यासी हैं , इसलिए उन्हें सिद्धार्थ की महानता एक सन्यासी बनने में लगती है और आप एक राजा है, इसलिए आपको सिद्धार्थ की महानता एक राजा बनने में लगती है। सवाल यह नहीं है कि सिद्धार्थ क्या बनेंगे? तो अपने दोस्तो और रिश्तेदारों के साथ गौतम बुद्ध की जीवनी को अवश्य शेयर कीजिए। और उसके साथ ही आपको गौतम बुद्ध की जीवनी कैसी लगी? केवल तू ही नहीं राजन, सारा जग इसकी प्रतीक्षा कर रहा था। असित मुनि सिद्धार्थ को पालने में लिटा देते हैं और उनके चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने लगते हैं। राजा यह देखकर थोड़ा आश्चर्यचकित होता है और असित मूनि से पूछता है , मुनिवर यह आप क्या कर रहे हैं? आपको भविष्य के बारे में सब कुछ कैसे पता? जैसा आप बनना चाहते हैं, वैसा नही बन पा रहे हैं? फिर असित मुनि सिद्धार्थ के पैरों में अपना सिर रखकर रोने लगते हैं। असित मुनि को रोता देख राजा पूछते हैं , क्या हुआ मुनिवर आप रो क्यों रहे हैं? प्रबुद्ध एक enlightened one 6. भारत में नालंदा विश्वविद्यालय किस राज्य में स्थित है? क्योंकि आप उसके लायक नहीं है। आप लायक तभी बनेंगे जब आप अपने भीतर धैर्य को बढ़ाएंगे। और धैर्य कैसे बढ़ेगा? हम आशा करते है की आप सभी को निचे दी हुई गौतम बुद्ध की कहानियां पसंद आएगी और आपके लिए उपयोगी साबित होंगी. अभिगमन तिथि 12 फ़रवरी 2007. चैत्य और विहार दोनों का उपयोग जीवित प्राणी के रूप में किया जा सकता है, Ans. तुम्हें अमरत्व का फल तो अवश्य मिल सकता है किंतु इसके लिए तुम्हें खेत में बीज न बोकर अपने मन में बीज बोने होंगे यह सुनकर किसान हैरानी से बोला — प्रभु! चैत्य पूजा का स्थान है, जबकि विहार बौद्ध संतों के रहने का स्थान है, Question and Answer in this Post 1. Who was Gautam Buddh? गौतम बुद्ध का जन्म कहा हुआ था? विश्व में गौतम बुद्ध की सबसे बड़ी अखंड मूर्ति कहाँ स्थापित की गई है? मुदर्रक्ष से जुड़े गद्य और पद्य में विविध कार्य Ans.

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Inspirational Stories of Lord Buddha : भगवान बुद्ध की 4 प्रेरक कहानियां

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विहार पूजा का स्थान है, जहाँ चैत्य बौद्ध संतों के रहने के लिए है, d. चीनी यात्री हिउएन तसंग ने किस विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था? गौतम बुद्ध ने अपना पहला धर्मोपदेश कहाँ दिया था, जिसे धर्म चक्र के नाम से जाना जाता है? भगवान बुद्ध को वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई, तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। क्या बुद्ध ईश्वर को मानते थे? एक ईश्वर में विश्वास करो c. PDF से 15 अप्रैल 2007 को पुरालेखित. Ramachandran fixes the date of the Buddha's death in 1807 B. बुद्ध कहते हैं , हाँ मैं वही हूं , बस सोया हुआ था , परंतु अब जाग गया हूँ। सुजाता कहती है परंतु आपको हो क्या गया है? हीनयान बौद्ध धर्म का वर्णन Ans.

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गौतम बुद्ध की एक प्रेरक कहानी

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यानी मुझे धैर्य के साथ निरंतर अभ्यास करने की आवश्यकता है। दोस्तो अब आपको समझ आ गया की आपके पास वो क्यों नहीं है, जो आप पाना चाहते हैं! महावीर को बताए गए लंबे उपदेशों का संग्रह b. महायान बौद्ध धर्म का वर्णन c. इसके अलावा अगर आपने अभी तक हमें सोशल मीडिया जैसे Also read: Also read: Also read: Sandeep Maheshwari Quotes in Hindi 2021. तो आज की यह कहानी आपके लिए ही है। दोस्तो इस 1. कहानी छोटी हैं मगर बहुत कुछ सिखा सकती हैं इसलिए आशा करते हाँ आप इसे पूरा जरुर पढेंगे तो चलिए अब शुरू करते हैं इस बेहतरीन कहानी को — Stories of Lord Buddha गौतम बुद्ध की कहानियां भगवान बुद्ध आत्मज्ञान की खोज में तपस्या कर रहे थे। उनके मन में विभिन्न प्रकार के प्रश्न उमड़ रहे थे। उन्हें प्रश्नों का उत्तर चाहिए था लेकिन अनेक प्रयासों के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी प्रकार के अनेक प्रश्न बुद्ध के मन में उठ रहे थे। तपस्या में सफलता की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही थी और इधर बुद्ध ने प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। वे उदास मन से इन्हीं प्रश्नों पर मंथन कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें प्यास लगी। वे अपने आसन से उठे और जल पीने के लिए सरोवर के पास गए। वहां उन्होंने एक अद्भुत दृश्य देखा। एक गिलहरी मुंह में कोई फल लिए सरोवर के पास आई। फल उससे छूटकर सरोवर में गिर गया। गिलहरी ने देखा, फल पानी की गहराई में जा रहा है। गिलहरी ने पानी में छलांग लगी दी। उसने अपना शरीर पानी मे भिगोया और बाहर आ गई। बाहर आकर उसने अपने शरीर पर लगा पानी झाड़ दिया और पुनः सरोवर में कूद गई। उसने यह क्रम जारी रखा। बुद्ध उसे देख रहे थे लेकिन गिलहरी इस बात से अनजान थी। वह लगातार अपने काम में जुटी रही। बुद्ध सोचने लगे, ये कैसी गिलहरी है! अनुष्ठान का अभ्यास Ans.

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नर्क क्या है? जानिए गौतम बुद्ध के जीवन की कहानी से

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और कहां जा रहे हैं? दासी कहती है, वह नीची जात का है और आप उसे छू नहीं सकते। सिद्धार्थ पूछते हैं यह जात क्या होती है? शिक्षा का एक बड़ा केंद्र, विक्रमशिला महाविहार, किसके द्वारा स्थापित किया गया था? क्या आप इस बात के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं कि एक साल में इन पीड़ित व्यक्तियों के अलावा किसी और की मृत्यु नहीं होगी? लेकिन अगर आप लोगों की बातें खत्म हो गयी है तो मैं यहां जाऊं।' भगवान बुद्ध कि यह बात सुन वहां के लोग बड़े आर्श्चयचकित हुए। वही खड़ा एक आदमी बोला - 'ओ! दोस्तो बुद्ध के पहले पांचों शिष्यों में से एक शिष्य पूछता है की इस मार्ग का नाम क्या होगा? The Emergence of Buddhism: Classical Traditions in Contemporary Perspective अंग्रेज़ी में. दोनों प्रतिनिधियों ने गुस्से में कहा कि हम खून की नदियाँ बहा देंगें। भगवान बुद्ध ने कहा कि इसका अर्थ है कि तो तुम्हें खून चाहिए। यह बात सुनकर हैरानी से हतप्रभ होकर बुद्ध की ओर देखा फिर कहा कि ʺनहींʺ हमें सिर्फ पानी चाहिए। तब सहज भाव से बुद्ध ने कहा कि खून बहाकर तो खून ही मिलेगा, पानी कैसे मिलेगा? क्या इस बालक के भविष्य पर कोई संकट है? रात के पश्चात दिन भी तो आएगा यदि तुम वहाँ चलना आवश्यक हीं समझते हो तो मुझे कल याद दिलाना, कल चलेंगे दूसरे दिन बात आई — गई हो गई शिष्य अपने काम में लग गया और बुद्ध अपनी साधना में लीन हो गए दोपहर होने पर बुद्ध ने शिष्य से पूछा — आज रामजी के पास चलना है? किस विशेष्ता के कारण महाबोधि मंदिर बोधगया को जाना जाता है? सारनाथ किस राज्य में है? भला मन के बीज बोकर भी कभी फल प्राप्त हो सकते हैं? निश्चित ही आपके पास। मित्रों, बुद्ध के Gautam Buddha Story 3: इस दुनिया में कोई गरीब नहीं एक समय की बात है भगवान गौतम बुद्ध एक गाँव में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। लोग अपनी विभिन्न परेशानियों को लेकर उनके पास जाते और उसका हल लेकर खुशी-खुशी वहां से लौटते। उसी गांव के सड़क के किनारे एक गरीब व्यक्ति बैठा रहता तथा महात्मा बुद्ध के उपदेश शिविर में आने जाने वाले लोगों को बड़े ध्यान से देखता। उसे बड़ा आश्चर्य होता कि लोग अंदर तो बड़े दुःखी चेहरें लेकर जाते है लेकिन जब वापस आते है तो बड़े खुश और प्रसन्न दिखाई देते है। उस गरीब को लगा कि क्यों न वो भी अपनी समस्या को भगवान के समक्ष रखे? धैर्य बढ़ेगा निरंतर अभ्यास के द्वारा और अभ्यास कौन करेगा? सरोवर का जल यह कभी नहीं सुखा सकेगी लेकिन इसने हिम्मत नहीं हारी। यह पूरी शक्ति लगाकर सरोवर को खाली करने में जुटी है। अचानक बुद्ध के मन में एक विचार का उदय हुआ- यह तो गिलहरी है, फिर भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटी है। मैं तो मनुष्य हूं। आत्मज्ञान प्राप्त नहीं हुआ तो मन में निराशा के भाव आने लगे। मैं पुनः तपस्या में जुट जाऊंगा। इस प्रकार महात्मा बुद्ध ने गिलहरी से भी शिक्षा प्राप्त की और तपस्या में जुट गए। एक दिन उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हो गया और वे भगवान बुद्ध हो गए। गौतम बुद्ध की कहानियां Stories of Lord Buddha भगवान बुद्ध की इस प्रेरक कहानि को मैंने बचपन में सुना था इसलिए आज इसे मैंने आप लोगो के साथ शेयर किया हैं आशा करता हु की आपको यह कहानी पसंद आई होगी गौतम बुद्ध की कहानियां buddh stories in hindi की इस पोस्ट में महात्मा गौतम बुद्ध से सम्बन्धित 7 प्रेरक और शिक्षाप्रद कहानियां हैं, जिसका सार जिंदगी का बदल सकता हैं गौतम बुद्ध की कहानियां gautam buddha stories in hindi की इस पोस्ट में आपको अपने जीवन को किर्थार्थ करने वाली जानकारी मिली हो तो कमेंट सेक्शन में अपने विचार जरूर शेयर करना. आप यह क्या कह रहे हैं? तो आपका जीवन बदलना निश्चित है. दासी कहती आपका जन्म राजप्रसार में हुआ है, इसलिए आप युवराज हैं और उसका जन्म एक छोटे घर में हुआ है, इसलिए वह सार्थी पुत्र है। सिद्धार्थ कहते हैं तो इसमें भिन्नता क्या है? सच्चे बौद्ध का अपमान करने की शक्ति किसी में नहीं होती तुम इस बात को भुला दो जब प्रसंग भुला दोगे तो अपमान कहाँ बचा रहेगा शिष्य ने कहा — उसने आपके प्रति भी अपशब्दों का प्रयोग किया था आप चलिए तो सही, आपको देखते हीं वह शर्मिंदा हो जाएगा और क्षमा माँग लेगा इससे मैं संतुष्ट हो जाऊँगा बुद्ध कुछ विचार कर बोले — अच्छा यदि ऐसी बात है तो मैं अवश्य हीं रामजी के पास चलकर उसे समझाने का प्रयास करूँगा शिष्य ने आतुर होकर कहा — चलिए, नहीं तो रात हो जाएगी बुद्ध ने कहा — रात आएगी तो क्या? संघ के नियम 5. तो जानिए उसका असली कारण गौतम बुद्ध की कहानी से… नमस्कार दोस्तों, आप सभी का नॉलेज ग्रो मोटिवेशनल ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तो क्या आप जैसा बनना चाहते हैं, वैसा नही बन पा रहे हैं, या जो आप चाहते हैं, अगर वो नही हो रहा है! इनमें से कोई नहीं Ans. चन्ना कहता है मृत शरीर का अर्थ है जिसमें प्राण ना हो, जिसकी मृत्यु हो गई हो। फिर सिद्धार्थ कहते हैं ऐसे कैसे किसी की मृत्यु हो सकती है? Buddha was born in the year 1887 BC and his Nirvana took place in 1807 BC.

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Essay on Lord Buddha and Gautam in Hindi

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Buddha attained Nirvana when he was 80 years old. फिर उसके बाद भारत के कुशीनगर गाव में उन्होंने महापरिनिर्वाण लिया. The dates tally accurately with 27-3-1807 B. Buddha's Nirvana 1807 B. मेन्डर के राजाओं के प्रश्न b. मन में यह विचार लिए वह भी महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा। लोग पंक्तिबध खड़े होकर अपनी समस्या को बता रहे थे। जब उसकी बारी आई तो उसने सबसे पहले महात्ममा बुद्ध को प्रणाम किया और फिर कहा - 'भगवान इस गाँव में लगभग सभी लोग खुश और समृध है। फिर मैं ही क्यो गरीब हूं? मैं एक साधारण किसान हूँ बीज बोकर, हल चला कर अनाज उत्पन्न करता हूँ और तब उसे ग्रहण करता हूँ किंतु इससे मेरे मन को तसल्ली नहीं मिलती मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूँ, जिससे मेरे खेत में अमरत्व के फल उत्पन्न हों आप मुझे मार्गदर्शन दीजिए जिससे मेरे खेत में अमरत्व के फल उत्पन्न होने लगें किसान की बात सुनकर बुद्ध मुस्कराकर बोले — भले व्यक्ति! वर्धमान महावीर Another Important Question and Answer In this post 1. भगवान बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था ज्ञान प्राप्ति के बाद वह बुद्ध के नाम से जाने जाने लगे। भगवान बुद्ध ने ज्ञान कैसे प्राप्त किया? बल्की सवाल यह है कि क्या हमने गौतम बुद्ध की जीवनी से कुछ ऐसा सीखा जो हमारे जीवन को पूरी तरह से रूपांतरित कर सकता है? The dates tally with 27-3-1807 as the date of Nirvana of Lord Buddha.

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गौतम बुद्ध की 7 प्रेरणादायक कहानियां

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गौतम बुद्ध ने आत्मज्ञान प्राप्त किया 4. बुद्ध ने कहा है ध्यान करो क्यूंकि मैंने ध्यान से ही अपने दुखों से मुक्ति पाई है और बस बात खत्म हो गई। अब और कुछ सुनने की क्या आवश्यकता है? बौद्ध धर्म में, पतिमोक्खए किसके प्रतीक होता है? तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके गौतम बुद्ध के विचार हिंदी में पढ़ सकते है. बुद्ध बोले — मैं अपने शरीर को नियंत्रण में रखने वाला एक इंसान हूँ लड़के ने उन्हें अपनी बात स्पष्ट करने के लिए कहा तब उन्होंने कहा — जो तीर चलाना जानता है, वह तीर चलाता है जो नाव चलाना जानता है, वह नाव चलाता है जो मकान बनाना जानता है, वह मकान बनाता है, मगर जो ज्ञानी है, वह स्वयं पर शासन करता है लड़के ने पूछा — वह कैसे? निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्ध धर्म के आठ-गुना पथ में झुकाव नहीं है? भाई हम तुम्हारा गुणगान नहीं कर रहे है। हम तो तुम्हें गालियाँ दे रहे हैं। क्या इसका तुम पर कोई असर नहीं होता??? बौद्ध धर्म में तीसरे वाहन के रूप में जाना जाता था — a. लुम्बिनी गौतम बुद्ध का जन्म स्थान था, जिसे किसके शिलालेख द्वारा साक्ष्यांकित किया गया है? अभिगमन तिथि 14 अप्रैल 2010. दोस्तों गौतम बुद्ध ने इसा पूर्व 483 में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने भिक्षुओ से कहा की में अब महापरिनिर्वाण लेने वाला हु, दोस्तों महापरिनिर्वाण यानि की अपने शरीर को त्यागना. तुम्हें अमरत्व का फल तो अवश्य मिल सकता है किन्तु इसके लिए तुम्हें खेत में बीज न बोकर अपने मन में बीज बोने होंगे।ʺ Lord Buddha कि ऐसी बात सुनकर किसान हैरानी से बोला — प्रभु! निम्नलिखित में से कौन बौद्धों की पवित्र पुस्तक है? इसीलिए मैं चाहता हूं कि तुम्हारा विवाह एक वीर के साथ हो ना कि भविष्य में होने वाले एक जोगी के साथ हो। जरुर पढ़े: यशोधरा का स्वयंवर के लिए परीक्षा फिर यशोधरा कहती हैं यदि आपको सिद्धार्थ की योग्यता पर शक है, तो आप उनकी परीक्षा ले सकते हैं। यशोधरा के पिता कहते हैं तो ठीक है मैं परीक्षा लूंगा परंतु जो भी परीक्षा में विजयी होगा, तुम्हें उसके साथ ही विवाह करना होगा। यशोधरा कहती हैं ठीक है। यशोधरा के पिता राजा दंडपानी यह घोषणा करते हैं, यशोधरा का स्वयंवर के लिए एक परीक्षा निर्धारित की जाएगी और जो उस परीक्षा में विजयी घोषित होगा, उसी के साथ यशोधरा का विवाह करा दिया जाएगा। उसके बाद यशोधरा का स्वयंवर के लिए परीक्षा भी होती है और उसमे सिद्धार्थ की जीत भी होती है। सिद्धार्थ और यशोधरा का विवाह सिद्धार्थ के स्वयंवर में विजय होने के बाद राजा शुद्धोधन और राजा दंडपानी विवाह के लिए एक उचित मुहूर्त निकलवाते हैं। सिद्धार्थ और यशोधरा के विवाह की खबर सुन पूरा कपिलवस्तु बहुत खुश होता है। और सिद्धार्थ और यशोधरा के विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। राजा शुद्धोधन और राजा दंडपानी भारतवर्ष के बड़े — बड़े राजाओं को विवाह में आमंत्रित करते हैं। विवाह के लिए एक उचित मुहूर्त निकलवाया जाता है और सभी विधि विधानों के साथ विवाह संपन्न करा दिया जाता है। सिद्धार्थ का सत्य से अवगत होना। दोस्तो जीवन के वे सभी सत्य जो अब तक उनसे छुपाए गए हुए थे, वे सभी सत्यों के बारे में उनको एक ही दिन या एक ही रात में नही पता चला था, बल्कि सिद्धार्थ को धीरे धीरे जीवन के वे सभी सत्य पता लग रहे थे, जो अब तक उनसे छुपाए गए थे। अब तक उन्होंने पशु पक्षियों की मृत्यु तो देखी थी परंतु अभी तक उन्होंने अपने किसी परिजन की मृत्यु नहीं देखी थी। जिसके कारण उन्हें लगता था कि उनके माता पिता, पत्नी, रेशेदार सभी हमेशा रहने वाले हैं, परंतु उनका यह वहम भी बहुत जल्दी टूटने वाला था। अपने मन की पीड़ा को शांत करने के लिए सिद्धार्थ अपने सार्थी चन्ना के साथ यूं ही कहीं घूमने के लिए निकल पड़ते हैं। उस मार्ग में सिद्धार्थ को एक अजीब सा दृश्य नजर आता है। ऐसा दृश्य सिद्धार्थ ने आज से पहले कभी नहीं देखा था। सिद्धार्थ देखते हैं कि चार लोगों ने अपने कंधों पर कुछ उठाया हुआ है और बहुत सारे लोग उनके पीछे चल रहे हैं और सभी के चेहरों पर एक उदासी है। सिद्धार्थ ने आज से पहले कभी भी इतने सारे उदास लोग एक साथ नहीं देखे थे। सिद्धार्थ अपने सारथी चन्ना से पूछते हैं, चन्ना ये लोग कौन हैं? गौतम बुद्ध के जीवित काल के लगभग उसी समय और कोन था? ऐसे कैसे प्राण शरीर को छोड़ सकते हैं? आप यह क्या कह रहे हैं? बौद्ध धर्म में त्रिपिटक ग्रंथों को किस भाषा में लिखा गया है? निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रस्ताव है कि भाग्य सब कुछ निर्धारित करता है, मनुष्य शक्तिहीन है? Siddhartha- Birth 1887 BC , became Buddha 1852 BC , Death nirvana 1807 B. अभ्यास करेंगे आप , तो फिर करते क्यों नही? मैं भी और तुम भी? अगर आप बुद्ध को पूरी तरह से समझना चाहते हैं तो आपको बुद्ध होना पड़ेगा और बुद्ध होने की यात्रा ध्यान से शुरू होती है। और ध्यान भी बुद्ध जैसा ही है, जिसे ना तो कहा जा सकता है और ना ही समझा जा सकता है, केवल अनुभव किया जा सकता है। बुद्ध की हर शिक्षा का ज़ोर लोगों को ध्यान की तरफ आकर्षित करने पर है, उन्हें जागरुक करने पर है, परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि लोग बुद्ध को समझना तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें अनुभव नहीं करना चाहते। दोस्तो गौतम बुद्ध की जीवनी को लिखने के पीछे मेरा उद्देश्य यह है कि आप बुद्ध को केवल समझें ही ना बल्कि अनुभव भी करें । एक बहुत गहरी बात आपको बताता हूं, उसे आप ध्यान से समझने का प्रयास करिएगा। आवश्यक यह नहीं है कि आप वह सुनें जो बुद्ध ने कहा है, बल्कि आवश्यक यह है कि आप वह न सुन लें जो बुद्ध ने नहीं कहा है। क्योंकि शब्दों में तो मिलावट हो सकती है और उन्हें अपनी मर्जी से बदला भी जा सकता है। लेकिन अनुभव में मिलावट करने का कोई तरीका नहीं है। देखिए सवाल यह नहीं है कि जिस तरह से गौतम बुद्ध की जीवनी को प्रस्तुत किया गया है, क्या ये सारी घटनाएं बिल्कुल इसी तरह से घटी थीं या नहीं? गौतम बुद्ध के उपदेश मुख्य रूप से किससे संबंधित थे?.

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Gautam Buddha Stories in Hindi ! गौतम बुद्ध की कहानियाँ

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दोस्तो मैंने आप सभी के लिए गौतम बुद्ध की कहानियों को ढूंढकर इकट्ठी किया हुआ हु, ताकि आपके जीवन में सफलता हासिल कर सकू। ये रचनात्मक और आपकी अंदरूनी गुणों से एक बार फिर से मिलवाने में आपकी मदद करेगी। दोस्तों अगर आप इन सभी कहानियो को ध्यान से पढ़कर उसे अपने जीवन में उतारते है? गौतम बुद्ध का निधन b. प्रथम बौद्ध परिषद का आयोजन निम्नलिखित में से किस शहर में हुआ था? और आप लोगो को भी इस कहानी को पढ़ते वक्त एरिटेशन होना शुरू हुआ होंगा। और जिन जिन लोगों को भी अभी एरिटेशन होनी शुरू हो गई है, उन लोगों को तो यह कहानी बड़े ध्यान से पढ़कर समझना चाहिए, क्योंकि यह कहानी आपके लिए ही है। अगले दिन फिर से सभा का आयोजन हुआ, लेकिन इस बार सभा की संख्या और ज्यादा घट गई थी, यानी इस बार सभा में सिर्फ ३० लोग ही थे। फिर उसके बाद बुद्ध सभा में आए, मुस्कुराए और फिर से बुद्ध ने वही किया, यानी बिना कुछ बोले ही वहा से चले गए। इस बार भी लोग बहुत क्रोधित हुए और इस बार लोगो ने पीछे से कुछ कहा भी और बड़बड़ाए भी। लेकिन बुद्ध ने उनके किसी भी प्रश्न का उत्तर नही दिया। दोस्तो अगले दिन फिर से सभा का आयोजन हुआ और इस बार लोगो कि संख्या बहुत ज्यादा घट गई थी, यानी इस बार सभा में कुल मिलाकर 15 लोग ही आए हुए थे। इस बार भी बुद्ध सभा में आए लेकिन इस बार बुद्ध अपना आसन ग्रहण कर लेते हैं। फिर बुद्ध बोले और बुद्ध ने उन 15 लोगो को उपदेश दिया। और वे 15 लोग ही बुद्ध के भिक्षु बन गए, और आगे चलकर उन 15 लोगो ने ही बुद्ध के ज्ञान को अलग अलग दिशाओं में फैला दिया। फिर एक दिन बुद्ध से किसी ने पूछा कि बुद्ध आप कई दिनों तक बिना बोले ही सभा से क्यों चले जाते थे? गौतम बुद्ध को किसके समय के आधीन भगवान की स्थिति में ऊंचा किया गया था? फिर कुलगुरु कहते हैं की एक बड़ा षड्यंत्र रचो , यानी सिद्धार्थ जिस भी मेहल में रहते हैं, वहा पर सर्दी हो तो गर्मी का एहसास न हो, और गर्मिया हो तो सर्दी का एहसास न हो, और उसे लड़कियों से घेरे रखो और उसके इर्द गिर्द झूठा संसार रचों। यानी उसे कभी भी ये पता नहीं चलने देना है की इस दुनिया में दुख नाम की भी कोई चीज होती भी है। बूढ़े लोगों से इसको दूर रखो, मृत्यु शैय्या से इसको दूर रखो और सुखा पिल्ला पत्ता भी उसके बाग में नहीं दिखना चाहिए। क्योंकि ऐसी चीजे उसको संन्यास लेने की ओर आकर्षित कर सकती है। और उसके बाद राजा ने प्रपच किया यानी राजा ने सिद्धार्थ के इर्द गिर्द एक झूठा संसार रचा। दोस्तो कहा जाता है कि राजा शुद्धोधन ने अपने सैनिकों को यह आदेश दे दिया था कि राज्य में कोई भी शमशान नहीं रहेगा। जहां जहां तक सिद्धार्थ जाएंगे , वहां पेड़ों पर सूखी पत्ती तक नहीं दिखनी चाहिए। फूलों की बेल या वृक्षों पर कोई मुरझाया फूल नहीं दिखना चाहिए। वृद्ध, बीमार और गरीब लोगों को तो नई नगरी में भेज ही दिया गया था। गौतम बुद्ध का बचपन Gautam Buddha Early Life समय बीतता है और सिद्धार्थ गुरुकुल जाने के योग्य हो जाते हैं, तब रानी प्रजापति राजा शुद्धोधन से सिद्धार्थ को गुरुकुल भेजने के लिए कहती हैं। परंतु राजा शुद्धोधन यह कहते हुए मना कर देते हैं, कि वे अपने पुत्र के लिए महल के पास ही गुरुकुल बनवाएँगे। क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके पुत्र को कोई भी ऐसा ज्ञान दिया जाए , जो उन्हें वैराग्य की तरफ ले जाए। गौतम बुद्ध के बचपन की कहानी सिद्धार्थ का शिक्षण शुरू होने से पहले की एक घटना है, जो आपको जरूर समझनी चाहिए। एक बार सिद्धार्थ अपने चचेरे भाइयों के साथ बगीचे में खेल रहे होते हैं, तो सिद्धार्थ का चहेरा भाई देवदत्त सिद्धार्थ को चोट पहुंचाने का प्रयास करता है, परंतु सूर्या का पुत्र चन्ना सिद्धार्थ को बचा लेता है। सूर्या यानी की राजा शुद्धोधन का सार्थी था और राजा ने सूर्या को वचन दिया था कि बड़े होकर सूर्या का पुत्र यानी चन्ना को युवराज सिद्धार्थ का सार्थी बनाएंगे। सिद्धार्थ को बचाने के चक्कर में चन्ना और सिद्धार्थ दोनों को भी चोट लग जाती है। सैनिक सिद्धार्थ को जल्दी से महल ले जाने लगते हैं। सिद्धार्थ चन्ना कों भी उनके साथ आने के लिए कहते हैं। चन्ना सिद्धार्थ के साथ महल चला जाता है। महल पहुंचने के बाद सिद्धार्थ को दवाई लगाई जाती है। सिद्धार्थ चन्ना को भी दवाई लगाने के लिए अपने पास बुलाते हैं, परंतु एक दासी सिद्धार्थ से चन्ना को अपने पास बुलाने से यह कहते हुए मना कर देती है, कि चन्ना एक सार्थी पुत्र है। वह आपके पास नहीं आ सकता। सिद्धार्थ पूछते हैं परंतु क्यों? The famous Buddha , for example , lived during 1887 to 1807 B. क्या वे कोई अन्य रोग या दुर्घटना से बचे रहेंगे? पाली में एक अनुकरणीय बौद्ध ग्रन्थ c. कनिष्क Mahatma Buddha story related Question and Answer 1. गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था c. जो आपकी आभा इतनी प्रकाशमान हो गई है। बुद्ध कहते हैं जिस खोज में मैं 6 वर्षों से था, वह खोज अब पूरी हो चुकी है। बोधि वृक्ष का इतिहास यहां पर एक बात आपको जाननी चाहिए कि बुद्ध को बुद्ध नाम और जिस वृक्ष के नीचे बुद्ध ने आत्मज्ञान पाया था , उसे बोधि वृक्ष का नाम उरुविला के लोगों ने ही दिया था। बुद्ध का अर्थ होता है जो पूर्ण रूप से जाग चुका है। गौतम बुद्ध का प्रथम उपदेश दोस्तो सिद्धार्थ बुद्ध होने के बाद अपने प्रथम उपदेश में कहते हैं, की अज्ञान ही दुख, भ्रम और चिंता को जन्म देता है। लोभ , क्रोध , भय, ईर्ष्या इसी अज्ञान की संताने हैं। माया का खेल विपरीत का है, यानी अच्छे या बुरे का है, परंतु जो ज्ञानी है वह इस माया में नहीं फँसता। क्योंकि वह किसी भी चीज की अति में नहीं पड़ता और ना तो वह अपने आपको तप के नाम पर अत्यधिक पीड़ा देता है और ना ही हर समय वासना में डूबा रहता है। बल्कि वह मध्य मार्ग चुनता है। जब हम माया के खेल को समझ जाते हैं, तब हमारे सभी दुख और सभी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। तब हमारे भीतर प्रेम और स्वीकृति का भाव पैदा होता है, जिसके बाद हम किसी से भी घृणा नहीं करते। यहां तक कि ऐसे व्यक्ति से भी नहीं , जो हम से घृणा करता है। गौतम बुद्ध के चार आर्य सत्य एक — जब तक सृष्टि रहेगी दुख मनुष्य के साथ छाया बनकर चलेगा। दो— दुख का कारण है, किसी वस्तु को स्वयं से पकड़कर रखना। जीवन के इस सत्य को न देखना कि जीवन में हर चीज क्षणभंगुर है। तीन— मुक्ति के लिए विवेक का जगाना आवश्यक है। स्वयं को केंद्रित करना सीखो, जो आए चाहे दुख की सूचना या आनन्द की परछांई। इन दोनों के बीच स्वयं को स्थिर रखो। चार— इस मार्ग पर दुख के बंधन टूटेंगे और परम सत्य की उपलब्धि होगी । बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग क्या है? इस लेख मे आप भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय Gautama Buddha Life Story History in Hindi हिन्दी मे पढ़ सकते हैं। इसमे हमने उनके जन्म, प्रारंभिक जीवन, त्याग, बौद्ध धर्म, निजी जीवन के बारे मे पूरी जानकारी दी है। आईए शुरू करते हैं — गौतम बुद्ध का जीवन परिचय व कथा Gautama Buddha Life Story History in Hindi कौन थे गौतम बुद्ध? क्या कोई ऐसा उपाय भी है जो उनके सभी दुखों को दूर कर सके? मैं तो उस युग पुरुष के दर्शन करने आया हूं, जिसने तेरे यहां पुत्र बनकर जन्म लिया है। राजा कहते हैं अवश्य मूनिवर और अपने पुत्र को असित मुनि के हाथों में थमा देते हैं। फिर असित मुनि कहते हैं, जिसकी प्रतीक्षा करते — करते आधी उम्र बीत गई, अब आया है ये! यह सुनकर सभी ने अपने सिर नीचे कर लिए इसके बाद बुद्ध बोले — भाइयों! The dates tally accurately with 27-3-1807 B. सवाल यह है कि आप उन्हें क्या बनाना चाहते हैं? चन्ना थोड़ा सा हिचकिचाते हुए कहता है युवराज ये लोग अपने किसी परिजन के मृत शरीर को शमशान ले जा रहे हैं। फिर सिद्धार्थ पूछते हैं मृत शरीर का क्या अर्थ है चन्ना? असित मुनि कहते हैं नहीं राजन, मैं बालक के लिए नहीं, बल्कि में अपने लिए रो रहा हूं। क्योंकि अब मैं अब वृद्ध हो गया हूं और बहुत दिन जीवित नहीं रहूंगा। और उसके कारण मैं इस बालक को बुद्ध बनते हुए नहीं देख सकूंगा। असित मुनि की बात सुनते ही राजा क्रोधित हो जाता है। और असित मुनि से कहते हैं की मुनिवर यह कोई ज्ञानी वैरागी नहीं, बल्कि सम्राट बनेगा। यह बुद्ध नहीं योद्धा बनेगा, एक ऐसा योद्धा जिसकी तलवार के सामने बड़े — बड़े महारथी भी काँप उठेंगे। यदि आपको इसे आशीर्वाद देना ही है, तो ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि यह हर युद्ध में विजयी हो। असित मुनि कहते हैं , ऐसा ही होगा। जीवन के हर युद्ध में यह विजयी होगा पर वह युद्ध भावनाओं का होगा। यह सारे ब्रह्मांड पर राज करेगा, पर वह ब्रह्मांड मन के भीतर होगा। असित मुनि कहते हैं , इस बालक के शरीर के सभी गुण बताते हैं कि यह भविष्य में बुद्ध होगा। राजा कहता है गुण चाहें जो भी कहते हो, परंतु थामेगा तो यह बालक तलवार ही। असित मुनि कहते हैं तलवार से केवल राज्य जीते जाते हैं परंतु तेरा पुत्र युग बदलेगा। राजा कहता है यदि यह लेख विधाता का है, तो मैं उससे भी लड़ जाऊंगा! Hindi Video Parikshit Jobanputra.

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Gautam Buddha History Hindi

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निम्न में से किसे लाइट ऑफ एशिया Light of Asia के नाम से जाना जाता है? कौटिल्य को दी गई छोटी कहानियों का संग्रह d. शिष्य बोला - 'हाँ गुरूजी, उस नदी का जल सही में बहुत गंदा था परंतु जब सभी अपना कार्य खत्म करके चले गये तब मैने कुछ देर वहां ठहर कर पानी में मिली मिट्टी के नदी के तल में बैठने का इंतजार किया। जब मिट्टी नीचे बैठ गई तो पानी साफ हो गया। वही पानी लाया हूं।' महात्मा बुद्ध शिष्य का यह उत्तर सुनकर बहुत खुश हुए तथा अन्य शिष्यों को एक शिक्षा दी कि हमारा जीवन भी नदी के जल जैसा ही है। जीवन में अच्छे कर्म करते रहने से यह हमेशा शुद्ध बना रहता है परंतु अनेको बार जीवन में ऐसे भी क्षण आते है जब हमारा जीवन दुख और समस्याओं से घिर जाता है, ऐसी अवस्था में जीवन समान यह पानी भी गंदा लगने लगता है। मित्रों, इसलिए हमें जीवन में दुःख और बुराईयों को देखकर अपना साहस नहीं खोना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए गंदगी समान ये समस्याएँ स्वयं ही धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। Gautam Buddha Story 2: अपने दुःखों का कारण आप ही है एक समय की बात है, भगवान बुद्ध एक नगर में घुम रहे थे। उस नगर के आम नागरिकों के मन में बुद्ध के विरोधियों ने यह बात बैठा दी थी कि वह एक ढोंगी है और हमारे धर्म को भ्रष्ट कर रहा है। इस वजह से वहां के लोग उन्हें अपना दुश्मन मानते थे। जब नगर के लोगों ने बुद्ध को देखा तो उन्हें भला बुरा कहने लगे और बदुआएं देने लगे। गौतम बुद्ध नगर के लोगों की उलाहने शांति से बिना बोलने सुनते रहे लेकिन जब नगर के लोग उन्हें बोलते-बोलते थक गए तो महात्मा बुद्ध बोले- 'क्षमा चाहता हूं! अभिगमन तिथि 22 अगस्त 2018. आप सबने अवश्य बहुमूल्य उपहार दिए हैं किंतु यह सब आपकी संपत्ति का दसवां हिस्सा भी नहीं है। आपने यह दान दीनों और गरीबों की भलाई के लिए नहीं किया है इसलिए आपका यह दान 'सात्विक दान' की श्रेणी में नहीं आ सकता। इसके विपरीत इस बुढ़िया ने अपने मुंह का कौर ही मुझे दे डाला है। भले ही यह बुढ़िया निर्धन है लेकिन इसे संपत्ति की कोई लालसा नहीं है। यही कारण है कि इसका दान मैंने खुले हृदय से, दोनों हाथों से स्वीकार किया है।'. गिलहरी और बुद्ध आज एक और नयी प्रेरक और ज्ञानवर्धक भगवान बुद्ध की लेकर आये हैं दोस्तों गौतम बुद्ध 563 ईसा पूर्व—483 ईसा पूर्व को महात्मा बुद्ध, भगवान बुद्ध, सिद्धार्थ व शाक्यमुनि नाम से भी जाना जाता है । आज के भगवान बुद्ध की प्रेरक कहानी के का टॉपिक — गिलहरी और बुद्ध! विचार और आचरण की पवित्रता 6. मूल से 6 जून 2011 को.

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गिलहरी और भगवान बुद्ध

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Thus he lived during 1887-1807 B. शुन्यता शुन्यवाद के सिद्धांत को निम्नलिखित में से किसने सिखाया था? Gautam Buddha Story 1: जीवन में सब्र का महत्व यह कहानी बहुत ही पुरानी है। उस समय महात्मा गौतम बुद्ध पुरे भारतवर्ष में घुम-घुम कर बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रसार कर रहे थे। धर्म प्रचार के सिलसिले में वे अपने कुछ अनुयायीयों के साथ एक गाँव में घुम रहे थे। काफी देर तक भ्रमण करते रहने से उन्हें बहुत प्यास लग गई थी। प्यास बढ़ता देख, उन्होंने एक शिष्य को पास के गाँव से पानी लाने के लिए कहा। शिष्य जब गाँव में पहुंचा तो उसने देखा की वहां एक छोटी सी नदी बह रही है जिसमें काफी लोग अपने वस्त्र साफ कर रहे थे और कई अपने गायों को नहला रहे थे। इस कारण नदी का पानी काफी गंदा हो गया था। शिष्य को नदी के पानी का ये हाल देख लगा कि गुरूजी के लिए यह गंदा पानी ले जाना उचित नहीं होगा। इस तरह वह बिना पानी के ही वापस आ गया। लेकिन इधर गुरूजी का तो प्यास से गला सूखा जा रहा था। इसलिए पुनः उन्होंने पानी लाने के लिए दूसरे शिष्य को भेजा। इस बार वह शिष्य उनके लिए मटके में पानी भर कर लाया। यह देख महात्मा बुद्ध थोड़ा आश्चर्यचकित हुए। उन्होंने शिष्य से पूछा गाँव में बहने वाली नदी का पानी तो गंदा था फिर ये पानी कहां से लाये? आपको गौतम बुद्ध की ये कहानियाँ कैसी लगीं कृपया Comment कर हमें जरुर बताएँ, क्योंकि आपकी राय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है धन्यवाद! चन्ना कहता है नहीं युवराज यह वृद्धावस्था है, जो अमीर और गरीब सभी के जीवन में आती है। वृद्धावस्था धनी और निर्धन में भेद नहीं करती। फिर सिद्धार्थ पूछते हैं की तो क्या सब इस अवस्था से गुजरते हैं? मल्ल गणतंत्र में d. Buddha's Nirvana happened in 1807 B. अभिगमन तिथि 16 अक्तूबर 2015. फिर दासी कहती है जैसे आप युवराज हैं और वह सार्थी पुत्र। सिद्धार्थ पूछते हैं तो वह मुझसे अलग कैसे है? बुद्ध चारिता के लेखक कौन थे? स्तूप स्थल जो भगवान बुद्ध के जीवन की किसी भी घटना से जुड़ा हुआ नहीं है — a. इतिहासकारों के अनूसार आनंद उनका परम प्रिय शिष्य था और वह चौबीस घंटे बुद्ध के साथ रहकर उनकी सेवा कर रहा था। यहाँ पढ़ें : पंचतंत्र की 101 कहानियां — विष्णु शर्मा गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी मेरे जीवन मे इतना दुख क्यो है? जब शरीर ही ना बचेगा तो मुक्ति मिलेगी किसे? फिर चन्ना सिद्धार्थ से कहता है की युवराज वह एक संन्यासी है, और इसने अपना सब कुछ छोड़ दिया है। क्योंकि इस जिंदगी में दुःख है, तकलीफ है , क्लेश है, इसीलिए उसने अपने दुखों का अंत करने के लिए संन्यास लिया हुआ है। अब समय करीब आ रहा था उस सीमा को पार करने का जो सिद्धार्थ और संन्यास के बीच में थी। इसी बीच सिद्धार्थ को किसी के द्वारा यह भी पता चलता है कि रानी प्रजापति सिद्धार्थ की जननी नहीं हैं, और उनकी असली मां महामाया की मृत्यु तो उन्हें जन्म देने के सात दिन पश्चात ही हो गई थी। सिद्धार्थ इस सत्य को सुनकर पूरी तरह से टूट जाते हैं, क्योंकि उन्होंने पहली बार किसी अपने को खोने का दर्द महसूस किया था। उसी बीच सिद्धार्थ को नई नगरी भी देखने का अवसर मिल जाता है। अब से पहले सिद्धार्थ ने केवल नई नगरी का नाम सुना था, परंतु कभी उसे देखा नहीं था। जैसे ही सिद्धार्थ नई नगरी पहुंचते हैं, तो उन्हें समझ नहीं आता कि वे कहां आ गए हैं। क्योंकि उन्होंने आज से पहले कभी भी ऐसे मनुष्य नहीं देखे थे। उन्हें सबसे पहले एक वृद्ध व्यक्ति दिखता है। सिद्धार्थ पूछते हैं, क्या यह व्यक्ति भी अपने पुराने जन्मों के कर्मफल भोग रहा है? भगवान गौतम बुद्ध ने अपना अंतिम सांस महापरिनिर्वाण कहाँ लिया था? दोनों में बहुत अंतर नहीं है b. संघ के नियम d.

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