Gautam buddha life history in hindi. Gautam Buddha Story Hindi 2022-10-10

Gautam buddha life history in hindi Rating: 9,3/10 1474 reviews

गौतम बुद्ध का जीवन एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तित्व था। वे भगवान श्री कृष्ण से भी अधिक जाने जाने वाले हैं। उनका जन्म सन् 563 ई. में नेपाल के लिए हुआ था। उनका जन्म सुखदेव महाराज की राजधानी लुधियाना में हुआ था।

गौतम बुद्ध का जीवन बहुत ही सुंदर था। वे बचपन से ही एक अत्यंत बुद्धिमान थे। उन्होंने अपने बचपन में सभी धर्मों का ज्ञान प्राप्त किया था। उन्होंने बहुत से पुराणों और वेदों का ज्ञान हासिल किया था। उन्होंने सभी धर्मों में से एक धर्म चुना था जिसमें वे अपने जीवन को समझ सकते थे।

गौतम बुद्ध के जीवन म

Lord Gautam Buddha Biography In Hindi

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भगवान बुद्ध विष्णु का अवतार माना जाता है वह दशावतार में 9 वा अवतार बुद्ध को माना जाता है। 2. कुछ दूर आगे चलकर कमर झुके हुए वृद्ध व्यक्ति को देखा तथा थोड़ा आगे चलकर श्मशान को जाते हुए एक अर्थी को देखा. If you liked this article, then please comment below and tell us how you liked it. वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करते हुए अपने मत का प्रचार करते थे. इसीलिए मैं चाहता हूं कि तुम्हारा विवाह एक वीर के साथ हो ना कि भविष्य में होने वाले एक जोगी के साथ हो। जरुर पढ़े: यशोधरा का स्वयंवर के लिए परीक्षा फिर यशोधरा कहती हैं यदि आपको सिद्धार्थ की योग्यता पर शक है, तो आप उनकी परीक्षा ले सकते हैं। यशोधरा के पिता कहते हैं तो ठीक है मैं परीक्षा लूंगा परंतु जो भी परीक्षा में विजयी होगा, तुम्हें उसके साथ ही विवाह करना होगा। यशोधरा कहती हैं ठीक है। यशोधरा के पिता राजा दंडपानी यह घोषणा करते हैं, यशोधरा का स्वयंवर के लिए एक परीक्षा निर्धारित की जाएगी और जो उस परीक्षा में विजयी घोषित होगा, उसी के साथ यशोधरा का विवाह करा दिया जाएगा। उसके बाद यशोधरा का स्वयंवर के लिए परीक्षा भी होती है और उसमे सिद्धार्थ की जीत भी होती है। सिद्धार्थ और यशोधरा का विवाह सिद्धार्थ के स्वयंवर में विजय होने के बाद राजा शुद्धोधन और राजा दंडपानी विवाह के लिए एक उचित मुहूर्त निकलवाते हैं। सिद्धार्थ और यशोधरा के विवाह की खबर सुन पूरा कपिलवस्तु बहुत खुश होता है। और सिद्धार्थ और यशोधरा के विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। राजा शुद्धोधन और राजा दंडपानी भारतवर्ष के बड़े — बड़े राजाओं को विवाह में आमंत्रित करते हैं। विवाह के लिए एक उचित मुहूर्त निकलवाया जाता है और सभी विधि विधानों के साथ विवाह संपन्न करा दिया जाता है। सिद्धार्थ का सत्य से अवगत होना। दोस्तो जीवन के वे सभी सत्य जो अब तक उनसे छुपाए गए हुए थे, वे सभी सत्यों के बारे में उनको एक ही दिन या एक ही रात में नही पता चला था, बल्कि सिद्धार्थ को धीरे धीरे जीवन के वे सभी सत्य पता लग रहे थे, जो अब तक उनसे छुपाए गए थे। अब तक उन्होंने पशु पक्षियों की मृत्यु तो देखी थी परंतु अभी तक उन्होंने अपने किसी परिजन की मृत्यु नहीं देखी थी। जिसके कारण उन्हें लगता था कि उनके माता पिता, पत्नी, रेशेदार सभी हमेशा रहने वाले हैं, परंतु उनका यह वहम भी बहुत जल्दी टूटने वाला था। अपने मन की पीड़ा को शांत करने के लिए सिद्धार्थ अपने सार्थी चन्ना के साथ यूं ही कहीं घूमने के लिए निकल पड़ते हैं। उस मार्ग में सिद्धार्थ को एक अजीब सा दृश्य नजर आता है। ऐसा दृश्य सिद्धार्थ ने आज से पहले कभी नहीं देखा था। सिद्धार्थ देखते हैं कि चार लोगों ने अपने कंधों पर कुछ उठाया हुआ है और बहुत सारे लोग उनके पीछे चल रहे हैं और सभी के चेहरों पर एक उदासी है। सिद्धार्थ ने आज से पहले कभी भी इतने सारे उदास लोग एक साथ नहीं देखे थे। सिद्धार्थ अपने सारथी चन्ना से पूछते हैं, चन्ना ये लोग कौन हैं? This article is generally useful for class 1, class 2, and class 3. फिर चन्ना सिद्धार्थ से कहता है की युवराज वह एक संन्यासी है, और इसने अपना सब कुछ छोड़ दिया है। क्योंकि इस जिंदगी में दुःख है, तकलीफ है , क्लेश है, इसीलिए उसने अपने दुखों का अंत करने के लिए संन्यास लिया हुआ है। अब समय करीब आ रहा था उस सीमा को पार करने का जो सिद्धार्थ और संन्यास के बीच में थी। इसी बीच सिद्धार्थ को किसी के द्वारा यह भी पता चलता है कि रानी प्रजापति सिद्धार्थ की जननी नहीं हैं, और उनकी असली मां महामाया की मृत्यु तो उन्हें जन्म देने के सात दिन पश्चात ही हो गई थी। सिद्धार्थ इस सत्य को सुनकर पूरी तरह से टूट जाते हैं, क्योंकि उन्होंने पहली बार किसी अपने को खोने का दर्द महसूस किया था। उसी बीच सिद्धार्थ को नई नगरी भी देखने का अवसर मिल जाता है। अब से पहले सिद्धार्थ ने केवल नई नगरी का नाम सुना था, परंतु कभी उसे देखा नहीं था। जैसे ही सिद्धार्थ नई नगरी पहुंचते हैं, तो उन्हें समझ नहीं आता कि वे कहां आ गए हैं। क्योंकि उन्होंने आज से पहले कभी भी ऐसे मनुष्य नहीं देखे थे। उन्हें सबसे पहले एक वृद्ध व्यक्ति दिखता है। सिद्धार्थ पूछते हैं, क्या यह व्यक्ति भी अपने पुराने जन्मों के कर्मफल भोग रहा है? उन्होंने अपने समय में व्याप्त पाखंड व कुरीतियों को दूर कर समाज को सद्पथ दिखाने के लिए बौद्ध धर्म की स्थापना की. तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके गौतम बुद्ध के विचार हिंदी में पढ़ सकते है.

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भगवान गौतम बुद्ध व बौध धर्म का इतिहास

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सारनाथ किस राज्य में है? सात दिन तक उनकी समाधि लगी रही और उनको सत्य का बोध हो गया. सरोवर का जल यह कभी नहीं सुखा सकेगी लेकिन इसने हिम्मत नहीं हारी। यह पूरी शक्ति लगाकर सरोवर को खाली करने में जुटी है। अचानक बुद्ध के मन में एक विचार का उदय हुआ- यह तो गिलहरी है, फिर भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटी है। मैं तो मनुष्य हूं। आत्मज्ञान प्राप्त नहीं हुआ तो मन में निराशा के भाव आने लगे। मैं पुनः तपस्या में जुट जाऊंगा। इस प्रकार महात्मा बुद्ध ने गिलहरी से भी शिक्षा प्राप्त की और तपस्या में जुट गए। एक दिन उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हो गया और वे भगवान बुद्ध हो गए। गौतम बुद्ध की कहानियां Stories of Lord Buddha भगवान बुद्ध की इस प्रेरक कहानि को मैंने बचपन में सुना था इसलिए आज इसे मैंने आप लोगो के साथ शेयर किया हैं आशा करता हु की आपको यह कहानी पसंद आई होगी गौतम बुद्ध की कहानियां buddh stories in hindi की इस पोस्ट में महात्मा गौतम बुद्ध से सम्बन्धित 7 प्रेरक और शिक्षाप्रद कहानियां हैं, जिसका सार जिंदगी का बदल सकता हैं गौतम बुद्ध की कहानियां gautam buddha stories in hindi की इस पोस्ट में आपको अपने जीवन को किर्थार्थ करने वाली जानकारी मिली हो तो कमेंट सेक्शन में अपने विचार जरूर शेयर करना. The level of this essay is medium so any students can write on this topic. The Emergence of Buddhism: Classical Traditions in Contemporary Perspective अंग्रेज़ी में. When the ascetic Gautama first went to Rajagaha now it is known as Rajgir , King Bimbisara of Magadha learned of his quest, and offered him a share of his kingdom to Gautama Buddha. पाली में एक अनुकरणीय बौद्ध ग्रन्थ 2. फिर कुलगुरु कहते हैं की एक बड़ा षड्यंत्र रचो , यानी सिद्धार्थ जिस भी मेहल में रहते हैं, वहा पर सर्दी हो तो गर्मी का एहसास न हो, और गर्मिया हो तो सर्दी का एहसास न हो, और उसे लड़कियों से घेरे रखो और उसके इर्द गिर्द झूठा संसार रचों। यानी उसे कभी भी ये पता नहीं चलने देना है की इस दुनिया में दुख नाम की भी कोई चीज होती भी है। बूढ़े लोगों से इसको दूर रखो, मृत्यु शैय्या से इसको दूर रखो और सुखा पिल्ला पत्ता भी उसके बाग में नहीं दिखना चाहिए। क्योंकि ऐसी चीजे उसको संन्यास लेने की ओर आकर्षित कर सकती है। और उसके बाद राजा ने प्रपच किया यानी राजा ने सिद्धार्थ के इर्द गिर्द एक झूठा संसार रचा। दोस्तो कहा जाता है कि राजा शुद्धोधन ने अपने सैनिकों को यह आदेश दे दिया था कि राज्य में कोई भी शमशान नहीं रहेगा। जहां जहां तक सिद्धार्थ जाएंगे , वहां पेड़ों पर सूखी पत्ती तक नहीं दिखनी चाहिए। फूलों की बेल या वृक्षों पर कोई मुरझाया फूल नहीं दिखना चाहिए। वृद्ध, बीमार और गरीब लोगों को तो नई नगरी में भेज ही दिया गया था। गौतम बुद्ध का बचपन Gautam Buddha Early Life समय बीतता है और सिद्धार्थ गुरुकुल जाने के योग्य हो जाते हैं, तब रानी प्रजापति राजा शुद्धोधन से सिद्धार्थ को गुरुकुल भेजने के लिए कहती हैं। परंतु राजा शुद्धोधन यह कहते हुए मना कर देते हैं, कि वे अपने पुत्र के लिए महल के पास ही गुरुकुल बनवाएँगे। क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके पुत्र को कोई भी ऐसा ज्ञान दिया जाए , जो उन्हें वैराग्य की तरफ ले जाए। गौतम बुद्ध के बचपन की कहानी सिद्धार्थ का शिक्षण शुरू होने से पहले की एक घटना है, जो आपको जरूर समझनी चाहिए। एक बार सिद्धार्थ अपने चचेरे भाइयों के साथ बगीचे में खेल रहे होते हैं, तो सिद्धार्थ का चहेरा भाई देवदत्त सिद्धार्थ को चोट पहुंचाने का प्रयास करता है, परंतु सूर्या का पुत्र चन्ना सिद्धार्थ को बचा लेता है। सूर्या यानी की राजा शुद्धोधन का सार्थी था और राजा ने सूर्या को वचन दिया था कि बड़े होकर सूर्या का पुत्र यानी चन्ना को युवराज सिद्धार्थ का सार्थी बनाएंगे। सिद्धार्थ को बचाने के चक्कर में चन्ना और सिद्धार्थ दोनों को भी चोट लग जाती है। सैनिक सिद्धार्थ को जल्दी से महल ले जाने लगते हैं। सिद्धार्थ चन्ना कों भी उनके साथ आने के लिए कहते हैं। चन्ना सिद्धार्थ के साथ महल चला जाता है। महल पहुंचने के बाद सिद्धार्थ को दवाई लगाई जाती है। सिद्धार्थ चन्ना को भी दवाई लगाने के लिए अपने पास बुलाते हैं, परंतु एक दासी सिद्धार्थ से चन्ना को अपने पास बुलाने से यह कहते हुए मना कर देती है, कि चन्ना एक सार्थी पुत्र है। वह आपके पास नहीं आ सकता। सिद्धार्थ पूछते हैं परंतु क्यों? उनके लिए ऋतु के अनुकूल महल बनाये, आखेट आदि की सुबिधा प्रदान की लेकिन सिद्धार्थ का मन कुछ उखड़ा हुआ-सा रहता था.

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गौतम बुद्ध

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अंत में गया के निकट एक बट वृक्ष के नीचे ध्यान मग्न होकर बैठ गये. शिक्षा का एक बड़ा केंद्र, विक्रमशिला महाविहार, किसके द्वारा स्थापित किया गया था? The dates tally accurately with 27-3-1807 B. यह बौद्ध धर्म में अष्टांगिक मार्ग कहलाता है. महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था 5. मूल से 6 जून 2011 को. The dates tally accurately with 27-3-1807 B. स्तूप स्थल जो भगवान बुद्ध के जीवन की किसी भी घटना से जुड़ा हुआ नहीं है — a.

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भगवान् गौतम बुद्ध जीवन परिचय

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सच्चे बौद्ध का अपमान करने की शक्ति किसी में नहीं होती तुम इस बात को भुला दो जब प्रसंग भुला दोगे तो अपमान कहाँ बचा रहेगा शिष्य ने कहा — उसने आपके प्रति भी अपशब्दों का प्रयोग किया था आप चलिए तो सही, आपको देखते हीं वह शर्मिंदा हो जाएगा और क्षमा माँग लेगा इससे मैं संतुष्ट हो जाऊँगा बुद्ध कुछ विचार कर बोले — अच्छा यदि ऐसी बात है तो मैं अवश्य हीं रामजी के पास चलकर उसे समझाने का प्रयास करूँगा शिष्य ने आतुर होकर कहा — चलिए, नहीं तो रात हो जाएगी बुद्ध ने कहा — रात आएगी तो क्या? मल्ल गणतंत्र में 3. अत्यन्त बाल्यावस्था में ही माता का देहांत होने पर विमाता प्रभावती ने उनका लालन-पालन किया. Leela, Cambridge Scientific Publishers. We hope you have got some learning on the above subject. निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रस्ताव है कि भाग्य सब कुछ निर्धारित करता है, मनुष्य शक्तिहीन है? असित मुनि कहते हैं नहीं राजन, मैं बालक के लिए नहीं, बल्कि में अपने लिए रो रहा हूं। क्योंकि अब मैं अब वृद्ध हो गया हूं और बहुत दिन जीवित नहीं रहूंगा। और उसके कारण मैं इस बालक को बुद्ध बनते हुए नहीं देख सकूंगा। असित मुनि की बात सुनते ही राजा क्रोधित हो जाता है। और असित मुनि से कहते हैं की मुनिवर यह कोई ज्ञानी वैरागी नहीं, बल्कि सम्राट बनेगा। यह बुद्ध नहीं योद्धा बनेगा, एक ऐसा योद्धा जिसकी तलवार के सामने बड़े — बड़े महारथी भी काँप उठेंगे। यदि आपको इसे आशीर्वाद देना ही है, तो ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि यह हर युद्ध में विजयी हो। असित मुनि कहते हैं , ऐसा ही होगा। जीवन के हर युद्ध में यह विजयी होगा पर वह युद्ध भावनाओं का होगा। यह सारे ब्रह्मांड पर राज करेगा, पर वह ब्रह्मांड मन के भीतर होगा। असित मुनि कहते हैं , इस बालक के शरीर के सभी गुण बताते हैं कि यह भविष्य में बुद्ध होगा। राजा कहता है गुण चाहें जो भी कहते हो, परंतु थामेगा तो यह बालक तलवार ही। असित मुनि कहते हैं तलवार से केवल राज्य जीते जाते हैं परंतु तेरा पुत्र युग बदलेगा। राजा कहता है यदि यह लेख विधाता का है, तो मैं उससे भी लड़ जाऊंगा! गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया है — a. उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था.

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गौतम बुद्ध की जीवनी

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बुद्ध बोले — मैं अपने शरीर को नियंत्रण में रखने वाला एक इंसान हूँ लड़के ने उन्हें अपनी बात स्पष्ट करने के लिए कहा तब उन्होंने कहा — जो तीर चलाना जानता है, वह तीर चलाता है जो नाव चलाना जानता है, वह नाव चलाता है जो मकान बनाना जानता है, वह मकान बनाता है, मगर जो ज्ञानी है, वह स्वयं पर शासन करता है लड़के ने पूछा — वह कैसे? You can also visit my YouTube channel that is You can also follow us on Facebook. कौटिल्य को दी गई छोटी कहानियों का संग्रह d. चैत्य और विहार दोनों का उपयोग जीवित प्राणी के रूप में किया जा सकता है, Ans. सत्य, अहिंसा, सभी प्राणियों से समान व्यवहार, शुभ कर्म, सबकी सेवा ये पांच बुद्ध की शिक्षाएं हैं. गौतम बुद्ध का जन्म कहा हुआ था? निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और चैत्य और विहार के बीच अंतर चुनें: a. After Leaving his servant and horse behind, he journeyed into the woods and changed into monk's robes there, though in some other versions of the story it depicts that he received the robes from a Brahma deity at Anomiya. It is believed that Gautama's father as shielding him from religious teachings and from knowledge of human suffering, so that he would able to become a great king instead of a great religious leader.

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गौतम बुद्ध का जीवन परिचय Gautama Buddha Life Story History in Hindi

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इतनी राग रागनियां भर दूंगा इसके चारों तरफ की वैराग्य का विचार भी इसे बुरा लगेगा। असित मूनि कहते हैं , चाहे लाख जतन कर ले राजन , परंतु तेरा पुत्र सन्यासी ही बनेगा। इतना कहकर असित मुनि वहां से चले जाते हैं। राजा शुद्धोधन असित मुनि से कह तो देते हैं कि वे अपने पुत्र को सम्राट ही बनाएंगे, परंतु भीतर ही भीतर उन्हें चिंता सताने लगती है कि, कहीं उनका पुत्र संन्यास ही ना बन जाए। अपनी इस चिंता को लेकर राजा शुद्धोधन कुलगुरु के पास जाते हैं और उन्हें अपनी समस्या बताते हैं। कुल गुरु कहते हैं राजन असित एक सन्यासी हैं , इसलिए उन्हें सिद्धार्थ की महानता एक सन्यासी बनने में लगती है और आप एक राजा है, इसलिए आपको सिद्धार्थ की महानता एक राजा बनने में लगती है। सवाल यह नहीं है कि सिद्धार्थ क्या बनेंगे? Ramachandran fixes the date of the Buddha's death in 1807 B. मुदर्रक्ष से जुड़े गद्य और पद्य में विविध कार्य Ans. अभिगमन तिथि 12 फ़रवरी 2007. इसलिए वे जानबूझकर उन्हें भोग-विलास व राजसी ठाठ में डालने लगे. क्या आप इस बात के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं कि एक साल में इन पीड़ित व्यक्तियों के अलावा किसी और की मृत्यु नहीं होगी? कठोर तप व सत्य का बोध सिद्धार्थ जगह-जगह भटकते हुए कई सतों व ज्ञानियों के संपर्क में गये. Following his decision to stop extreme ascetic practices, Gautama sat down to meditate with the determination not to get up until full awakening had been reached. वर्धमान महावीर Another Important Question and Answer In this post 1.

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गिलहरी और भगवान बुद्ध

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संघ के नियम d. चन्ना कहता है मृत शरीर का अर्थ है जिसमें प्राण ना हो, जिसकी मृत्यु हो गई हो। फिर सिद्धार्थ कहते हैं ऐसे कैसे किसी की मृत्यु हो सकती है? क्या इस बालक के भविष्य पर कोई संकट है? विचार और आचरण की पवित्रता 6. फिर असित मुनि सिद्धार्थ के पैरों में अपना सिर रखकर रोने लगते हैं। असित मुनि को रोता देख राजा पूछते हैं , क्या हुआ मुनिवर आप रो क्यों रहे हैं? विचार और आचरण की पवित्रता b. Gautama rejected the offer but he promised to visit his kingdom first, upon attaining enlightenment. Many biographies depicts that after seeing the four sights, Gautam woke up at night and was shocked when he saw his female servant lying in corpse like pose. इस नाम का मतलब होता हैं जो सिद्धि प्राप्ति के लिये जन्मा हो लेकिन इनको बाद में सिद्धि मिली थी.

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गौतम बुद्ध का जीवन परिचय और उनकी शिक्षाएं

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The famous Buddha , for example , lived during 1887 to 1807 B. दासी कहती आपका जन्म राजप्रसार में हुआ है, इसलिए आप युवराज हैं और उसका जन्म एक छोटे घर में हुआ है, इसलिए वह सार्थी पुत्र है। सिद्धार्थ कहते हैं तो इसमें भिन्नता क्या है? निम्न में से किसे लाइट ऑफ एशिया Light of Asia के नाम से जाना जाता है? The dates tally with 27-3-1807 as the date of Nirvana of Lord Buddha. आप यह क्या कह रहे हैं? बौद्ध धर्म में, पतिमोक्खए किसके प्रतीक होता है? दासी कहती है, वह नीची जात का है और आप उसे छू नहीं सकते। सिद्धार्थ पूछते हैं यह जात क्या होती है? गौतम बुद्ध ने आत्मज्ञान प्राप्त किया d. निम्नलिखित में से कौन बौद्धों की पवित्र पुस्तक है? Gautam Buddha Story Hindi : एक समय की बात है, भगवान गौतम बुद्ध वन के रास्ते से होकर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति मिला, जो एक गड्ढा खोद रहा था। उस कलश में बहुत ही कीमती हीरे जवाहरात भरे हुए थे। यह सब देखकर वह व्यक्ति बहुत खुश हुआ और सोचने लगा आज मेरा भाग्य जाग उठा है। उस व्यक्ति ने हीरे जवाहरात से भरे हुए उस कलश को भगवान गौतम बुद्ध के चरणों में रख दिया और कहा, हे भगवान आपके आशीर्वाद से ही मुझे यह बेसुमार धन दौलत प्राप्त हुई है। इसलिए मैं इनमें से कुछ हीरे जवाहरात आपको भेंट करना चाहता हूं। यह सब सुनकर भगवान गौतम बुद्ध ने उस व्यक्ति से कहा, तुम्हारे लिए यह धन दौलत है लेकिन मेरी नजर में यह जहर के समान है क्योंकि बिना मेहनत के प्राप्त हुई धन दौलत जहर के समान ही होती है। इतना सुनकर वह व्यक्ति गौतम बुद्ध से नाराज होकर उस कलश लेकर चला जाता है। Gautam Buddha Story Hindi उस व्यक्ति ने बाजार में सभी हीरे जवाहरात बेचकर बंगला, गाड़ी और बहुत सारी सम्पत्ति खरीद ली और गरीब से करोड़पति बन गया। थोड़े दिनों बाद किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति ने राजा से उस व्यक्ति की शिकायत कर दी और बोला महाराज जमीन में दबा धन राजकोष का होता है। लेकिन उस व्यक्ति ने उस धन दौलत को अपने ऐशो आराम के लिए खर्च करके राजद्रोह किया है और ऐसा करना नियमो का उल्लंघन है। यह सब सुनकर राजा ने अपने सैनिकों को उस व्यक्ति को पकड़ने का आदेश दिया और राजदरबार में बुलवाया गया तो राजा ने उस व्यक्ति से उस कलश को जमा कराने के लिए बोला। राजा के सामने आकर वह व्यक्ति घबरा गया और उसने सब कुछ उगल दिया कि मैंने सभी हीरे जवाहरात बाजार में बेचकर सम्पत्ति खरीद ली है। Gautam Buddha Story Hindi यह सब सुनकर राजा ने उस व्यक्ति से कहा, ऐसा करके तुमने हमारे राज्य के नियमों का उल्लंघन किया है इसलिए तुम्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी और राजा के आदेश से उसे अपने परिवार सहित जेल में डाल दिया गया और उसकी सारी सम्पत्ति जब्त कर ली गई। काफी दिनों बाद वह राजा जेल में कैद, कैदियों के निरीक्षण के लिए गया। तभी उस व्यक्ति ने राजा से अपनी सजा माफ करने के लिए आग्रह किया और कहा, महाराज जब मुझे वह कलश जमीन में गड्ढा खोदते समय मिला तो भगवान गौतम बुद्ध वहीं पर मौजूद थे। भगवान गौतम बुद्ध ने मुझसे कहा था कि इसमें धन दौलत नही जहर भरा हुआ है। लेकिन उनकी यह बात न मानकर मैंने उनका अपमान किया था। और आज जेल में रहकर मुझे एहसास हो रहा है कि उनकी बात बिल्कुल सच थी। क्योंकि बिना मेहनत के प्राप्त धन दौलत जहर के समान ही होती है। इसलिए मैं एक बार भगवान गौतम बुद्ध के दर्शन कर उनसे क्षमा मांगना चाहता हूं। उस राजा ने भगवान बुद्ध को ससम्मान अपने राज्य में आमंत्रित किया और जेल से निकाल कर उस व्यक्ति को भगवान बुद्ध के पास लाया गया। Gautam Buddha Story Hindi उस व्यक्ति ने भगवान बुद्ध के चरणों में बैठकर क्षमा मांगी तथा कहा भगवन! अभिगमन तिथि 14 अप्रैल 2010. Thus he lived during 1887-1807 B. हीनयान बौद्ध धर्म का वर्णन Ans. महायान बौद्ध धर्म का वर्णन c.

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Gautam Buddha History Hindi

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This essay is very simple and easy to remember. गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया Ans. तब ऐसी विकट व विषम परिस्थिति में किसी महापुरुष का जन्म होता है, जो तत्कालीन भटकते हुए मानवों को सद्पथ दिखाकर एक नूतन मत का सूत्रपात करता है. It is known that Gautama Buddha left his palace and luxury life to see outside world and in search of peace. मैं भी और तुम भी? Buddha's Nirvana happened in 1807 B.

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Gautam Buddha's Biography in Hindi and English

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गौतम बुद्ध के उपदेश मुख्य रूप से किससे संबंधित थे? चन्ना कहता है युवराज यही जीवन का सत्य है। सिद्धार्थ रोते हुए कहते हैं यह जीवन कितना पीड़ादायक है चन्ना। मैंने आज तक मृत्यु के बारे में सुना था , परंतु आज देख भी लिया। रथ वापस घुमा लो, चन्ना , अब मुझे और कुछ नहीं देखना। अपने मन की गहरी पीड़ा के कारण सिद्धार्थ कपिलवस्तु वापस लौट आते हैं। उसके कुछ ही दिनों के बाद सिद्धार्थ जब किसी महोत्सव के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में उन्हें एक गेरवी वस्त्र धारण किया हुआ एक व्यक्ति दिखता है। उन्होने आज तक कभी भी ऐसे व्यक्ति को देखा नही था, इसीलिए वो चन्ना से पूछता है, की चन्ना ये गेरवी वस्त्र धारण किया हुआ व्यक्ति कौन है और उसने ऐसे क्यों वस्त्र पहने हुए हैं? निम्नलिखित में से कौन-सा एक बौद्ध धर्म के आठ-गुना पथ में झुकाव नहीं है? Who was Gautam Buddh? गौतम बुद्ध का निधन b. शिष्य ने कहा — नहीं! गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम क्या था? महावीर को बताए गए लंबे उपदेशों का संग्रह b. गया से वे काशी के निकट सारनाथ पहुंचे. विक्रमशिला महाविहार को किस वंश के शासक द्वारा सम्मानित किया गया था? दोस्तों गौतम बुद्ध ने इसा पूर्व 483 में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने भिक्षुओ से कहा की में अब महापरिनिर्वाण लेने वाला हु, दोस्तों महापरिनिर्वाण यानि की अपने शरीर को त्यागना. प्रथम बौद्ध परिषद का आयोजन निम्नलिखित में से किस शहर में हुआ था? एक ईश्वर में विश्वास करो c. गौतम बुद्ध के जीवित काल के लगभग उसी समय और कोन था? क्या कोई ऐसा उपाय भी है जो उनके सभी दुखों को दूर कर सके? It is said that this practice occurred under a Pipal tree named Bodhi Tree which is situated in Bodh Gaya, Bihar.

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