Cyclone in hindi essay. चक्रवात पर निबंध 2022-10-20

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हालांकि साइक्लोन एक आम घटना है, लेकिन इसके प्रभाव बहुत भयानक हो सकते हैं। यह एक तेज हवाई तटस्थ वितरण होता है जो अधिकतर माहिरातपात की तरह हवाओं से बनता है। इसकी वजह से साइक्लोन सामान्यतः महासागरों में होते हैं, जहां तापमान कम होता है और हवाएं सुखमतवार होती हैं।

साइक्लोन का प्रभाव बहुत ज्यादा अधिकतम होता है जब यह अपनी ताकत और तेजी से किसी क्षेत्र तक पहुंचता है। साइक्लोन से संभवतः हमले होते हैं, जैसे हवाई हमले, जमकर बारिश, तटस्थ हमले और तटस्थ बहने वाली लहरें। ये सभी साइक्लोन से होने वाले हमलों से

उष्णकटिबंधीय चक्रवात पर निबंध

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ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति Origin of Tropical Cyclone : ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के बारे में अभी तक पूर्ण ज्ञान नहीं है । इनकी उत्पत्ति शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों से भिन्न होती है । ऊष्ण कटिबंध में सागरों पर वायु का तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता लगभग समान होती है । गर्म सागरों पर वाष्पीकरण की प्रक्रिया से वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा निरंतर बड़ी रहती है । गर्म सागरों पर निहित ऊर्जा एवं केरोलिस बल के कारण इनकी उत्पत्ति मानी जाती है । ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति 8 ० से 25 ० अक्षांशों के से सागरीय क्षेत्रों में होती हैं इन अक्षांशों में गर्म वायु में सापेक्षिक आर्द्रता बढ़ी रहती है । ऊष्ण कटिबँध के चक्रवातों की उत्पत्ति एक लघु भार को गति देने में किरोलिस बल की भी एक मुख्य भूमिका है । ऊष्ण कटिबंध में विषुवत रेखा की ओर चलने वाली व्यापारिक पवनों का तापमान ऊँचा परंतु यह पवनें छिछली होती हैं जिसके ऊपर ऊष्ण शुष्क पवन अवतल पवन पाई जाती है । सागरों से ऊपर की ओर उठती पवनों से लघु कम वायु भार की परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो अंततः एक चक्रवात का रूप धारण कर लेता है । ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के लिये निम्न परिस्थितियों की आवश्यकता होती है: 1. प्रति घंटा होती है तथा इनमें केन्द्र व परिधि के बीच वायुदाब का अंतर 40-55mb रहता है । टोरनैडो मुख्यरूप से संयुक्त राज्य अमेरिका एवं गौण रूप से आस्ट्रेलिया में उत्पन्न होते हैं । ये आकार की दृष्टि से लघुतम व प्रभाव की दृष्टि से सबसे प्रलयकारी उष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं । इनकी आकृति कीपाकार होती है । ऊपर का चौड़ा भाग कपासी-वर्षी मेघ Cummulo-Nimbus से जुड़ा होता है । केन्द्र में वायुदाब न्यूनतम होता है । केन्द्र व परिधि के वायुदाब में इतना अधिक अंतर होता है कि हवाएँ 800 किमी. के मध्य में उत्पन्न होते है तथा इन्हीं अक्षांशों में इनकी उत्पत्ति दक्षिणी गोलार्द्ध में होती है । ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों में पवन की गति 39 से 73 किलोमीटर होती है । इन कटिबंधीय चक्रवातों को विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है । ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं Characteristics of Tropical Cyclone : a सम भार रेखाएँ वृत्ताकार होती हैं । b इनका व्यास 150 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक हो सकता है । ADVERTISEMENTS: g इनसे मूसलाधार वर्षा होती है और प्रायः बाढ का कारण बनती है । h इनको विनाशकारी माना जाता है जिससे जान-माल की भारी हानि होती है । Essay 2. दक्षिणी हिंद महासागर में मेडागास्कर के पूर्वी सागरीय क्षेत्र । 6. उष्ण वृतांश Warm Sector : उष्ण वृतांश के आगमन के साथ ही मौसम में अचानक परिवर्तन हो जाता है । वायु की दिशा पूर्ण दक्षिणी हो जाती है । आकाश बादल रहित होकर साफ हो जाता है । तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, तथा वायुदाब कम होने लगता है । वर्षा समाप्त हो जाती है यद्यपि कभी-कभी हल्की फुहार भी पड़ जाती है । मौसम कुल मिलाकर साफ व सुहावना हो जाता है । iv. इंटर ट्रोपिकल कंवर्जेस जोन के सागरों में छोटे भंवर की उत्पत्ति होना । उत्पत्ति के पश्चात् ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात मद गति से उत्तरी गोलार्द्ध में पूर्व से पश्चिम की ओर निचले अक्षांशों में प्रवाहित होती है । समय बीतने पर इसकी गति बढ़ती जाती है और किरोलिस बल प्रभाव के कारण अपने दाहिने हाथ की ओर मुड़ जाती है तथा धीरे-धीरे सबट्रोपिकल एवं शीतोष्ण कटिबंध की ओर बढ़ने लगते हैं । जब तक ये चक्रवात महासागर या सागर पर रहते हैं, इनकी गति में तीव्रता आती जाती है । संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन तथा जापान में ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात, शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेशों तक प्रवेश कर जाते हैं । इसका मुख्य कारण खाड़ी की धारा तथा कियुरो-शिवों गर्म पानी की जलधाराएँ है, जिनसे वाष्पीकरण के द्वारा वायुमंडल में वाष्प एवं निहित ऊर्जा बनी रहती है । उत्तरी अरब महासागर में लेबरोडोर ठंडे पानी की धारा तथा उत्तरी प्रशांत महासागर ओया-सिवा के संपर्क में आने के कारण ये चक्रवात समाप्त हो जाते हैं । यदि चक्रवात थल की और बढ़ रहा है तो थल के संपर्क में आने पर घर्षण बल के कारण तथा वेग की कमी के कारण शीघ्र विलीन हो जाते हैं । Essay 3.


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चक्रवात पर निबंध

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प्रति घंटे तक मिलती है । इनकी उत्पत्ति उष्णकटिबंधीय सागरीय भागों पर गर्मियों में होती है जबकि तापमान 27 ०C से अधिक हो । अत्यधिक वाष्पीकरण के कारण आर्द्र हवाओं के ऊपर उठने से इनका इज्मणि होता है । उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को ऊर्जा, संघनन की गुप्त ऊष्मा से मिलती है । परिणामस्वरूप आकाश में काले कपासी मेघ छा जाते हैं तथा घनघोर वर्षा होती है । उष्ण-कटिबंधीय चक्रवात अपने निम्न दाब के कारण ऊँची सागरीय लहरों का निर्माण करते हैं एवं अगर इनकी प्रभाविता अधिक हो, तो ये तटीय भागों में व्यापक विनाश लाते हैं । इन चक्रवातों का मुख्य प्रभाव तटीय भागों में ही हो पाता है, क्योंकि उसके पश्चात् इनकी ऊर्जा स्रोत अर्थात् संघनन की गुप्त ऊष्मा में ह्रास होता चला जाता है । भारत में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले अवदाबों का प्रभाव सामान्य बात है । ये अप्रैल से नवंबर के बीच आते हैं । सामान्य रूप से इनकी गति 40-50 किमी. उष्ण वाताग्र प्रदेशीय वर्षा: उष्ण वाताग्र के आने पर मुख्यतः वर्षा स्तरी Nimbo-Stratus मेघों के साथ वर्षा होती है । वाताग्र का ढाल हल्का होने के कारण गर्म हवा धीमी गति से ऊपर उठती है तथा विस्तृत क्षेत्र में लम्बे समय तक परंतु हल्की वर्षा होती है । समस्त आकाश मेघाछन्न रहता है । iii. तक होता है परन्तु कुछ इतने छोटे होते हैं जिनका व्यास 50 किमी, से भी कम होता है । इनकी आकृति सामान्यतः वृताकार या अंडाकार होती है परन्तु इनमें समदाब रेखाओं की संख्या बहुत कम होती है । उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की गति साधारण से लेकर प्रचंड तक होती है । क्षीण चक्रवातों में पवन की गति 32 किमी, प्रति घंटा होती है जबकि हरीकेन में पवन गति 120 किमी. कुल 10 रडार लगाए गए हैं पूर्व में 6 और पश्चिम में 4 इनसे तटीय भागों एवं जहाजों को समय-समय पर इन चक्रवातों के वायुदाब व गति सम्बधी जानकारी मिलती रहती है । ii. बम चक्रवात हरिकेन चक्रवात सर्दियों या शुरुआती वसंत गर्मियों में ठंडी हवा तूफानों को तीव्र कर देती है ठंडी हवा तूफान को कमजोर कर देती है मध्य से उच्च अक्षांशों की घटना उत्तर पश्चिमी अटलांटिक, उत्तर पश्चिमी प्रशांत उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की घटना विशेषकर महासागरीय क्षेत्र केंद्र, बाहरी परिवेश से अपेक्षाकृत ठंडा केंद्र, बाहरी परिवेश से अपेक्षाकृत गर्म. दक्षिणी प्रशांत महासागर का मध्य एवं पश्चिमी भाग । महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति दक्षिणी अंध महासागर में नहीं होती है । इसका मुख्य कारण है कि विषुवत रेखीय अभिसारी पेटी का प्रस्थान दक्षिणी अंध महासागर में 50 अक्षांश से अधिक दूरी तक नहीं होता, केवल विषुवत रेखा के आस-पास ही रहता है । विषुवत रेखा के आस-पास किरोलिस बल नाम मात्र होता है जिसके बिना चक्रवात की उत्पत्ति नहीं होती । Essay 4.


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Bomb cyclone

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ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात की संरचना Structure of Tropical Cyclone : ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात के केंद्रीय भाग में वायु भार सबसे कम होता है । चक्रवात के इस भाग को चक्रवात की आँख कहते हैं । चक्रवात की नेत्र का व्यास 20 से 40 किलोमीटर तक होता है । चक्रवात के केंद्रीय भाग में मामूली तथा परिवर्तित गति की हवा चलती है या शांत वातावरण रहता है । इस भाग अर्थात् चक्रवात के केंद्र में बादल नहीं पाये जाते नीला आकाश चक्रवात के केंद्र में देखा जा सकता है । चक्रवात के केंद्रीय भाग में तापमान भी अधिक होता है । सागर स्तर से लगभग 12 किलोमीटर ऊँचाई तक काले-घने बादल छाये रहते हैं । इन घने बादलों में काले रंग के बैंड पाये जाते है, जिनकी दिशा में निरंतर परिवर्तन होता रहता है । काले घने बादलों से मूसलाधार वर्षा होती है । चक्रवात के आगे बढ़ने पर तूफानी हवाओं की गति में कमी आने लगती और केंद्र में वायुमंडल शांत रहता है । वर्षा की तीव्रता भी कम होती जाती है । Essay 5. ट्रोपिकल सागर पर लघु वायुभार का विकसित होना । 4. प्रति घंटे तक की रफ्तार से प्रवाहित होती है । जब टॉरनेडो के कीपाकार बादलों का निचला भाग धरातल से छूकर चलता है तो मिनटों में महान विनाश हो जाता है । इन चक्रवातों में तापक्रम सम्बन्धी विभिन्नता नहीं होती क्योंकि इनमें विभिन्न वाताग्र नहीं होते । उष्णकटिबंधीय चक्रवात में मौसम Season in Tropical Cyclone : इनके आने के पहले वायु मंद पड़ने लगती है, तापमान बढ़ने लगता है व वायुदाब में कमी आने लगती है । आकाश पर पक्षाभ मेघ Cirrus Clouds दिखने लगता है । सागर में ऊँची तरंगें उठने लगती हैं । जैसे ही हरीकेन नजदीक आ जाता है, हवाएँ तूफानी रूप धारण कर लेती हैं । आकाश में काले कपासी-वर्षी मेघ छाने लगते हैं तथा मूसलाधार, भीषण वर्षा प्रारंभ हो जाती है । आकाश पूरी तरह से मेघाच्छादित हो जाता है । दृश्यता समाप्त हो जाती है । यह स्थिति कुछ घंटों तक रहती है । इसके बाद अचानक वायु गति मंद हो जाती है । आकाश मेघ रहित व साफ हो जाता है एवं वर्षा रुक जाती है । यह लक्षण चक्रवात के चक्षु Eye का परिचायक है । यहाँ वायुदाब न्यूनतम होता है । यह अवस्था लगभग आधे घंटे तक रहती है । इसके बाद चक्रवात का पृष्ठ भाग आ जाता है व घनघोर वर्षा प्रारम्भ हो जाती है । यह दशा लम्बे समय तक बनी रहती है । जैसे-जैसे चक्रवात आगे बढ़ता जाता है वायुदाब बढ़ता जाता है, वायुवेग मंद पड़ने लगता है तथा बादलों का आवरण हल्का होते जाने से वर्षा क्षीण हो जाती है । चक्रवात के आगे निकल जाने पर आकाश से बादल छँट जाते हैं तथा मौसम साफ हो जाता है । वितरण Distribution : ये चक्रवात मुख्य रूप से 5 ०-15 ० अक्षांशों के मध्य दोनों 0177 में सागरों के ऊपर पाए जाते हैं तथा महाद्वीपों के तटीय भागो को प्रभावित करने के बाद समाप्त हो जाते हैं । उष्णकटिबंधीय भागों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का कोई न कोई रूप अवश्य देखने को मिलता है । परन्तु ये दक्षिणी अटलांटिक महासागर, दक्षिण पूर्व प्रशान्त महासागर एवं भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5 ० अक्षांशों के मध्य बिल्कुल नहीं देखे जाते । भारत में उष्ण-कटिबंधीय चक्रवात Tropical Cyclone in India : उष्ण-कटिबंधीय चक्रवात कर्क रेखा एवं मकर रेखा के बीच उत्पन्न होने वाले चक्रवात हैं । इसकी तीव्रता सामान्य से लेकर काफी अधिक तक भी हो सकती है । इनमें पवन वेग 30 किमी. प्रति घंटे तक मिलती है । ADVERTISEMENTS: उत्पत्ति व जीवन चक्र Origin and Lifecycle : इनकी उत्पत्ति का संबंध ध्रुवीय वाताग्रों से जोड़ा जाता है जहाँ पर दो विपरीत स्वभाव वाली हवाएँ एक ठंडी व शुष्क एवं दूसरी गर्म व आर्द्र मिलती है । इसकी उत्पत्ति हेतु दिए गए सिद्धान्तों में बर्कनीज Bjerknes का ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त सर्वाधिक मान्य है । उन्होंने इसके जीवन चक्र को 6 क्रमिक अवस्थाओं में देखा है । प्रथम अवस्था में गर्म और ठंडी वायुराशियाँ एक दूसरे के समानान्तर चलती है तथा वाताग्र स्थायी होता है । दूसरी अवस्था में दोनों वायुराशियाँ एक दूसरे के प्रदेश में प्रविष्ट होने का प्रयास करती है तथा लहरनुमा वाताग्र का निर्माण होता है । तीसरी अवस्था में उष्ण एवं शीत वाताग्रों का पूर्ण विकास हो जाता है तथा चक्रवात का रूप प्राप्त हो जाता है । चौथी अवस्था में शीत वाताग्र के तेजी से आगे बढ़ने के कारण उष्ण वृतांश संकुचित होने लगता है । पाँचवीं अवस्था में चक्रवात का अवसान प्रारंभ हो जाता है तथा छठी या अंतिम अवस्था में उष्ण वृत्तांश विलीन हो जाता है और चक्रवात का अंत हो जाता है । ADVERTISEMENTS: वायु प्रणाली Air System : इसके केन्द्र में न्यून दाब होता है जबकि परिधि की ओर अधिक दाब की स्थिति होती है । अतः हवाएँ परिधि से केन्द्र की ओर चलती है । परन्तु ये सीधे केन्द्र पर न पहुँचकर कॉरिऑलिस बल और घर्षण के कारण समदाब रेखाओं को 20 ० से 40 ० के कोण पर काटती है, जिससे संचार प्रणाली उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों की विपरीत दिशा में व दक्षिणी गोलार्द्ध में अनुकूल दिशा में हो जाती है । चक्रवात में मौसम तथा वर्षा Weather in Cyclone and Rain : चक्रवात के भिन्न-भिन्न भागों के गुजरते समय भिन्न-भिन्न मौसम का आभास होता है । ADVERTISEMENTS: i. प्रारंभिक परीक्षा : भारतीय और विश्व भूगोल-भारत और विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल। मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र:1- महत्वपूर्ण भूभौतिकीय घटनाएं जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, चक्रवात आदि, भौगोलिक विशेषताएं और उनके स्थान-महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं और वनस्पतियों और जीवों में परिवर्तन और ऐसे परिवर्तनों के प्रभाव। चर्चा में क्यों? चक्रवात का आगमन The Arrival of Cyclone : आकाश में सबसे पहले पक्षाभ मेघ दिखाई पड़ते हैं एवं चक्रवात के आने पर वायुदाब तेजी से गिरने लगता है । चन्द्रमा व सूर्य के चारों तरफ प्रभामंडल Halo स्थापित हो जाता है । ऐसा पश्चिम दिशा से बढ़ते पक्षाभ व पक्षाभ स्तरी मेघों के कारण होते हैं । जैसे-जैसे चक्रवात निकट आता जाता है, बादल काले व घने होने लगते हैं । वायु दिशा पूर्वी से बदलकर द.

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चक्रवर्ती तूफान पर निबंध Essay on Cyclonic Storm in Hindi

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होने लगती है । ii. उत्तरी महासागर के बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के क्षेत्र । 5. What is a Cyclonic Storm in Hindi? सूखे खेतों की मिट्टी में नमी बढ जाती है । 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात Essay on Tropical Cyclone : कर्क रेखा व मकर रेखा के मध्य उत्पन्न होने वाले चक्रवातों को उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है । निम्न अक्षांशों के मौसम खासकर वर्षा पर इन चक्रवातों का पर्याप्त प्रभाव होता है । ग्रीष्मकाल में केवल गर्म सागरों के ऊपर इनकी उत्पत्ति अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण ITCZ के सहारे उस समय होती है जब यह खिसककर 5 ० से 30 ० उत्तरी अक्षांश तक चली आती है । इन प्रदेशों की गर्म व आर्द्र पवनें जब संवहनीय प्रक्रिया से ऊपर उठती है तो घनघोर वर्षा होती है । इन चक्रवातों की ऊर्जा का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त ऊष्मा है । ऊपर उठने वाली वायु जितनी गर्म व आर्द्र होगी मौसम उतना ही तूफानी होगा । सामान्य रूप से इन चक्रवातों का व्यास 80 से 300 किमी. क्षेत्र तक का फैलाव रखते हैं । शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात 35 ०-65 ० अक्षांशों के मध्य दोनों गोलार्द्धों में पाए जाते हैं, जहाँ ये पछुआ पवनों के प्रभाव में पश्चिम से पूर्व दिशा में चलते हैं तथा मध्य अक्षांशों के मौसम को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं । इनके चलने के मार्ग को झंझा-पथ Storm Track कहा जाता है । इसकी गति सामान्य रूप से 32 किमी. इस लेख में चक्रवाती तूफान पर निबंध Essay on Cyclonic storm in Hindi बेहद सरल रूप से लिखा गया है। दिए गए निबंध में चक्रवाती तूफान की परिभाषा तथा आने के कारण व प्रभाव साथ ही चक्रवाती तूफान से बचाव के उपाय इस निबंध में दिया गया है। प्रस्तावना चक्रवाती तूफान पर निबंध Essay on Cyclonic storm in Hindi तूफान यह एक प्राकृतिक घटना है। जिसमें हवाओं के असंतुलन के कारण अनियमित दबाव बनता है। दबाव के बढ़ने से पवन गतिज ऊर्जा धारण कर लेता है तथा रास्ते में पड़ने वाले सभी चीजों को अपने चक्र में समाहित कर लेता है। मौसम विज्ञान में चक्रवात तरल के साथ पृथ्वी के समान घूमने लगता है इसकी अंतः ऊर्जा बेहद बलशाली होती है। आधुनिक विज्ञान में चक्रवाती तूफान का पहले से पता लगाने वाली मशीनें बन चुकी है। उपग्रहों के माध्यम से पृथ्वी तथा समुद्रों के दबाव का आकलन कर यह तकनीकें तूफान का सटीक अंदाजा लगा सकती हैं। चक्रवाती तूफान सिर्फ पृथ्वी पर ही नहीं वरन मंगल, गुरु तथा शुक्र ग्रह पर भी देखे जाते हैं। पृथ्वी पर तूफान आना यह प्राकृतिक घटना नहीं रह गई बल्कि दूषित वातावरण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हवा का कहीं भी अनियमित दबाव बनने लगता है। हाल में ही आए अम्फान तूफान से भारी तबाही हुई जिसमें सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई थी तथा हजारों लोग बेघर हो गए थे। साथ ही कई करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नाश भी हुआ। हालांकि चक्रवात पर मनुष्य का कोई नियंत्रण नहीं है। लेकिन अगर मनुष्य प्रकृति के प्रति अपनी उदासीनता को त्याग कर अपनी सुरक्षा के इंतजाम स्वयं जुटाए तो खतरा कई गुना कम हो सकता है। चक्रवाती तूफान क्या है? कैरिबियन सागर तथा मैक्सिको की खाडी । 2. शीत वाताग्र प्रदेशीय वर्षा: उष्ण वृतांश के गुजर जाने पर शीत वाताग्र आ जाता है, जिसके फलस्वरूप तापक्रम गिरने लगता है तथा सर्दी पड़ने लगती है । ठंडी वायु गर्म वायु को ऊपर धकेलने लगती है । वायु दिशा में पर्याप्त अंतर हो जाता है । आकाश में काले कपासी वर्षी Cummulo-Nimbus बादल छा जाते हैं, व तीव्र वर्षा प्रारम्भ हो जाती है । वाताग्र का ढाल तीव्र होने के कारण गर्म व आर्द्र वायु तेजी से ऊपर उठती है । अतः वर्षा लघु क्षेत्र में अल्प समय तक परंतु मूसलाधार होती है । यहाँ तड़ित झंझा Thunder Storm का भी आविर्भाव होता है एवं बिजली की चमक व बादलों की गरज के साथ वर्षा होती है । यदि ऊपर उठने वाली गर्म वायु आर्द्र तथा अस्थिर हो तो वर्षा तीव्र होती है । v.

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चक्रवात पर निबंध (Essay on Cyclone in Hindi)

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होता है परन्तु लघु व्यास 1040 किमी. पश्चिमी प्रशांत महासागर का फिलीपाइन एवं चीन सागर । 4. प्रति घंटा से भी अधिक देखी जाती है । उष्ण कटिबंधीय चक्रवात सदैव गतिशील नहीं होते । कभी-कभी एक ही स्थान पर ये कई दिनों तक वर्षा करते रहते हैं । इनका भ्रमणपथ भिन्न-भिन्न होता है । साधारणतः ये व्यापारिक हवाओं के साथ पूर्व से पश्चिम दिशा में अग्रसर होते हैं । भूमध्यरेखा से अक्षांशों तक इनकी दिशा पश्चिमी, 15 ० से 30 ० तक ध्रुवों की ओर तथा इसके आगे पुनः पश्चिमी हो जाती है । ये चक्रवात जब उपोष्ण कटिबंध में पहुँचते हैं तो समाप्त होने लगते हैं । सागरों के ऊपर इन चक्रवातों की गति तीव्र होती है, परंतु स्थल तक पहुँचने के क्रम में ये क्षीण होने लगते हैं । यही कारण है कि ये केवल तटीय भागों को ही प्रभावित कर पाते हैं । तीव्रता के आधार पर इन चक्रवातों को कई उप-प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है । क्षीण चक्रवातों के अंतर्गत हिंद महासागर व उसकी शाखाओं के उष्णकटिबंधीय विक्षोभ व अवदाब शामिल किए जाते हैं, जिनकी गति 40-50 किमी. वाष्पीकरण के द्वारा ऊष्ण आर्द्र पवन के द्वारा वायुमंडल में निहित ऊर्जा प्रवेश । 2. . शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात Essay on Temperate Cyclone : ये गोलाकार, अंडाकार या V- आकार के होते हैं, जिनके कारण इन्हें लो Low , गर्त Depression या टूफ Trough कहते हैं । आदर्श शीतोष्ण चक्रवात का दीर्घ व्यास 1920 किमी. ADVERTISEMENTS: उष्णकटिबंधीय चक्रवात पर निबंध Essay on Tropical Cyclone in Hindi.

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जल चक्र में सहायता मिलती है तथा जल-बजट में संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलती है ।. ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात का अर्थ और विशेषताएं Meaning and Characteristics of Tropical Cyclone : ADVERTISEMENTS: ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात विषुवत रेखा से 80 द. प्रशांत महासागर का मैक्सिको देश के पश्चिम का भाग । 3. प्रति घंटे से 48 किमी. ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के मार्ग Tracks of Tropical Cyclone : ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति महासागरों के पश्चिमी भाग में होती है । उनकी उत्पत्ति 8 ०N तथा 25 ० उत्तरी गोलार्द्ध में तथा इन्हीं अक्षांशों में दक्षिणी गोलार्द्ध में होती है । विषुवत रेखा पर इनकी उत्पत्ति होती है क्योंकि विषुवत रेखा के आस-पास केरोलिस फोर्स नाममात्र को होता है । केरोलिस बल के बिना इनकी उत्पत्ति नहीं होती । प्रतिवर्ष विश्व में लगभग 20 ऊष्णकटिबंधीय चक्रवात आते हैं । विश्व में निम्न सागरीय प्रदेशों में इन चक्रवातों की उत्पत्ति होती है: 1. भारी वर्षा के कारण जलाशय, पोखर, तालाब, एवं झीलों में पानी भर जाता है । 2. सार्थक किरोलिस बल प्रभाव । 3.

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तक भी मिलते हैं । कभी-कभी ये चक्रवात 10 लाख वर्ग किमी. भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होती है । 4. उपग्रहों के द्वारा और भी सूक्ष्मतर तरीकों से इन चक्रवातों के सम्बध में जानकारी प्राप्त की जाती है । इस प्रकार, वर्तमान समय में कम से कम 48 घंटे पहले इन चक्रवातों की सूचना दी जा रही है । परंतु महाचक्रवात के आने पर चक्रवात के प्रभाव की जानकारी दे पाना आसान नहीं रह पाता । चक्रवात के आने की जानकारी मछुआरों को जहाजों को और तटीय क्षेत्र के निवासियों को, प्राप्त सूचना के आधार पर पूर्व में ही दे दी जाती है परंतु उस पर उनके द्वारा अधिक ध्यान नहीं दिए जाने के कारण अधिक नुकसान उठाना पड़ जाता है ।. प्रति घंटा से भी अधिक होती है, परन्तु कम संख्या में आने के कारण इनका जलवायुविक महत्व नगण्य होता है । वायु-प्रणाली, आकार तथा वर्षा के सम्बन्ध में ये लगभग शीतोष्ण चक्रवात की भांति दिखाई पड़ते हैं, परन्तु इनके बीच कुछ मौलिक अंतर हैं । सामान्यतः इनकी समदाब रेखा अधिक सुडौल होती है । इन चक्रवातों के केन्द्र में वायुदाब बहुत कम होता है । दाब प्रवणता अधिक 10-55mb होने के कारण ये प्रचंड गति से आगे बढ़ते हैं । इनमें वाताग्र नहीं होते, अतः वर्षा का असमान वितरण भी नहीं होता । चक्रवात के चक्षु को छोड़कर वर्षा हर जगह व मूसलाधार होती है । सं. हवाई जहाजों के द्वारा भी रेडियो तरंगों Radio Waves को भेजकर चक्रवातों के क्रियाविधि सम्बन्धी जानकारी प्राप्त कर इनके बारे में पूर्वानुमान लगाया जाता है । iii.

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शीतवृतांश Cold Sector : शीत वाताग्र के गुजरने पर शीघ्र ही शीत वृतांश का आगमन हो जाता है । मौसम में अचानक परिवर्तन दिखलाई पड़ता है तथा आकाश मेघरहित होकर स्वच्छ हो जाता है । तापक्रम में तेजी से कमी आती है, वायुदाब बढ़ने लगता है एवं प्रतिचक्रवाती दशाएँ व्याप्त हो जाती है । वायुमार्ग में 45 ० से 180 ० का परिवर्तन हो जाता है तथा उसकी दिशा प्रायः पश्चिमी हो जाती है । चक्रवात के विलीन हो जाने पर उस स्थान पर चक्रवात आने से पहले की दशाएँ पुनः स्थापित हो जाती है । चूंकि शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात का व्यापक विस्तार होता है, अतः इसका जो भाग जिस प्रदेश पर होगा वहाँ वैसी ही मौसमी दशाएँ होंगी । 2. प्रति घंटे से लेकर 225 किमी. प्रस्तावना चक्रवात मतलब तेज हवा से बना हुआ एक तूफान होता है। जिसमे हवा तेज गति से गोल गोल घूमती रहती है। जिसमे हवा की गति इतनी तेज होती है की, उससे चारों तरफ नुकसान होता है। चक्रवाद जैसी समस्या ज्यादातर समुद्री किनारों के पास रहने वाले कम दबाव वाले क्षेत्रों में निर्माण होती है। इस चक्रवात में हवा गोलाकार रूप में तेज गति से ऊपर की तरफ घूमती रहती है। जिस कारण इस चक्रवात के मार्ग में आने वाली हर चीज का बहुत ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए यह एक हानिकारक प्राकृतिक आपदा है। चक्रवात — एक विपत्तिपूर्ण समस्या जिस जगह चक्रवात की आपदा आती है, उस जगह बहुत ज्यादा समस्याएं उत्पन्न होती है। इस समस्याओं में जीवन की हानि और वित्तीय हानि दोनों शामिल होते है। क्योंकि चक्रवात हमेशा गोलाकार रूप से घूमते रहता है। जिसमे हवा नीचे से ऊपर की तरफ घूमती रहती है। इसलिए इसकी चपेट में आने वाली हर चीज पूरी तरह से नष्ट होने की संभावना रहती है। जिसमे मानवनिर्मित और प्राकृतिक दोनों चीज़े शामिल है। जैसे की पेड़ पौधे, बड़ी बड़ी इमारते, हर तरह के वाहन और बहुत कुछ। भारत देश में घटी हुई हानिकारक चक्रवात आपदाएँ चक्रवात एक बहुत ज्यादा हानिकारक समस्या होती है। जिससे बहुत ज्यादा नुकसान होता है। अपने भारत देश में भी ऐसी कई सारी चक्रवात आपदाएँ निर्माण हुई है। इन चक्रवात आपदाओं से अपने देश को बहुत ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ा है। जिसमे साल 2013 में उड़ीसा में आया हुआ वह हानिकारक चक्रवात, साल 2014 का वह हुदहुद चक्रवाद जो विशाखापट्टनम में निर्माण हुआ था, उसके बाद साल 2017 का वह ओखी चक्रवात जो हिंद महासागर में निर्माण हुआ था। इन आपदाओं की वजह से कई सारे लोगों की मृत्यु हुई थी, तो कई सारे लोगों के घर नष्ट हो गए थे। जिससे अपने देश को बहुत ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ा था। चक्रवात के प्रकार चक्रवात की समस्या दो प्रकारों में निर्माण होती है। जिसमे उष्ण कटिबंधीय चक्रवात और शीत कटिबंधीय चक्रवात शामिल है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात हमेशा उष्ण कटिबंधीय प्रदेश में सबसे ज्यादा होते है और बाकी क्षेत्रों में साधारण रूप में रहते है और शीत कटिबंधीय चक्रवात हमेशा मध्य और उच्च अक्षांशों का निम्न वायुदाब तूफान होता है। यह बर्फ और बारिश लाता है। निष्कर्ष हमारे धरती पर जीतनी भी प्राकृतिक आपदाएँ आती है। उनमे चक्रवात जैसी आपदा हानिकारक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। जिसमे हर प्रकार की हानी होती है। फिर चाहे वह वित्त हानी हो या फिर जीवित हानी। इसलिए हमे चक्रवात जैसी आपदाओं से बचने के लिए कई सारे उपायों को अपनाना होगा। जिससे हमारा चक्रवात जैसी समस्याओं से बचाव हो सके। जिसमे अपने घर की मरम्मत, इमरजेंसी किट, बचाव दल, एंबुलेंस और अग्नि शमन का नंबर अपने पास रखना और ऐसे ही कई सारे उपाय।. अमेरिका में इन्हें हरीकेन, चीन व फिलीपींस में टाइफून एवं जापान में टाइफू कहा जाता है । बंगाल की खाड़ी में आने वाले सुपर साइक्लोन Super Cyclone की गति 225 किमी. सागर स्तर से लगभग 9000 से लेकर 15000 मीटर की ऊँचाई पर प्रति चक्रवात की परिस्थिति का उत्पन्न होना । 5. जब वायुमंडल का दबाव कम होता है तब उसके चारो ओर गर्म हवा की तेज आधी आती है, जिसे चक्रवाती तूफ़ान कहते हैं। दक्षिणी गोलार्ध में इन गर्म हवाओं को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये क्लोक वाइज यानि घड़ी की सुई की दिशा में चलते हैं। उत्तरी गोलार्ध में इन गर्म हवाओं को हरीकेन या टाइफून के नामों से जानते हैं। हरिकेन या टाइफून घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में चलते हैं। चक्रवाती तूफान के 6 प्रकार होते हैं। ध्रुवीय चक्रवाती तूफान, ध्रुवीय निम्न दबाव के चक्रवाती तूफान, अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान, अंत:उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान, उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान और मेसोसाईंक्लोनेस। ध्रुव प्रदेशों में आने वाले तूफान को द्रव्य चक्रवाती तूफान कहते हैं। जब तूफान निम्न दबाव के साथ आगे बढ़ते हैं तो उन्हें ध्रुवीय निम्न दबाव के चक्रवाती तूफान कहा जाता है। जब उसमें कटिबंध के सीमाओं पर दबाव बनता है तथा तूफान कसक ले लेता है तो उसे उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान कहते हैं। उष्णकटिबंधीय तूफानों में उनके दबाव के कारण उन्हें तीन अलग नामों से भी जाना जाता है। चक्रवाती तूफान आने के कारण Reasons of Coming Cyclonic Storms इस वजह से बने खाली जगह को भरने के लिए नम हवा तेजी से नीचे जाकर ऊपर आती है। जब हवा बहुत तेजी से उस क्षेत्र के चारों तरफ घूमती है तो घने बादलों और बिजली के साथ मूसलाधार चक्रवाती तूफान आने के कारणों में सबसे मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में असंतुलन व अनियमितता आती है। जिसके कारण वातावरणीय दबाव अनिश्चित व अनियमित होने लगता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों का पिघलना भी चक्रवाती तूफानों के आने का मुख्य कारण है। ग्लेशियरों के पिघलने के कारण समुद्र अपनी सतह से ऊंचा उठने लगता है और गर्म हवाओं के संपर्क में आकर भयानक रूप धारण कर लेता है। वनों का आच्छादन, इन तूफानों के कारणों में शामिल है क्योंकि वृक्ष वातावरण में संतुलन बनाए रखते हैं। एक ओर जमीन का कटाव रोकते हैं तो दूसरी ओर चक्रवाती तूफान के प्रभाव Impact of Cyclonic Storms in Hindi किसी भी प्राकृतिक आपदा से सजीव और निर्जीव दोनों का नुकसान होता है। चक्रवाती तूफान के प्रभाव से लोग अपने आवास को छोड़ अन्य जगहों पर विस्थापित हो जाते हैं। जंगली जीव-जंतु प्राण गवा देते हैं। जिन लोगों की आजीविका जंगलों पर निर्भर होती है। वे लोग बेरोजगार हो जाते हैं। चक्रवाती तूफान से अगर सबसे ज्यादा किसी को नुकसान होता है, तो वह किसान है। तूफान के एक छोटे से झोंके से ही फसलें बर्बाद हो जाती हैं। चक्रवाती तूफान से यातायात तथा जन-संपर्क टूट जाता है। जिससे लोगों तक पहुंचना व उन्हें सही सलामत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। एक तरफ प्राकृतिक संसाधन जैसे झील तालाब नदियां यह सभी चक्रवाती तूफान के कारण प्रदूषित हो जाती है। चक्रवाती तूफान के बाद धन का एक बड़ा हिस्सा इन्हें साफ करने में लगाना पड़ता है। चक्रवाती तूफान से लोगों की निजी संपत्ति के साथ सरकारी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंचती है। मात्र कुछ घंटों के चक्रवाती तूफान से हजारों करोड़ों का नुकसान हो जाता है। भारत के तटवर्ती इलाके विशेषकर ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश ,पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक महाराष्ट्र और गोवा चक्रवाती तूफान से ज्यादा प्रभावित होते हैं। चक्रवाती तूफान से बचाव के उपाय प्रबंधन Prevention Measures for Cyclonic Storm in Hindi चक्रवाती तूफान आने पर नुकसान की मात्रा बहुत अधिक होती है लेकिन अगर पहले से सतर्क रहा जाए तो नुकसान की मात्रा कम की जा सकती है। चक्रवाती तूफान के आगाही पर समुद्री तटों पर रहने वाले लोगों को सबसे पहले विस्थापित कर देना चाहिए। नदियों जलाशयों के पास रहने वाले लोगों को किन्हीं सुरक्षित जगहों पर विस्थापित कर देना चाहिए। क्योंकि चक्रवाती तूफान नदियों के संपर्क में आने पर भयानक हो जाता है। प्रशासन को पहले से ही सक्रिय होना चाहिए तथा बिजली विभाग, जल विभाग तथा आपातकालीन खाद्य आपूर्ति विभाग को तूफान से पहले तैयार रहना चाहिए। चक्रवाती तूफान आने से पहले जरूरी दवाइयां, अनाज तथा पानी को सुरक्षित कर लेना चाहिए। तूफान के समय कहीं भी आने-जाने से बचना चाहिए तथा टेलीविजन, रेडियो या इंटरनेट के माध्यम से रक्षा स्त्रोत से संपर्क बनाए रखना चाहिए। चक्रवाती तूफान के समय पशुओं को बांधकर नहीं रखना चाहिए तथा जितना हो सके उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहले ही पहुंचा देना चाहिए। निष्कर्ष Conclusion इस लेख में आपने चक्रवाती तूफान पर निबंध Essay on Cyclonic storm in Hindi हिंदी में पढ़ा। आशा है यह लेख आपको जानकारी से भरपूर लगा हो पूनम अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें। Categories. सागर स्तर पर मंद लंबवत् पवन का चलना । 6.

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